जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के बसोहली इलाके में मंगलवार 29 सितंबर की शाम सीआईएसएफ कैंप में हुई फायरिंग (CISF Camp Firing ) की घटना ने हड़कंप मचा दिया. सेवा-II हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट में तैनात सीआईएसएफ जवानों के बीच मामूली कहासुनी के बाद झगड़ा इतना बढ़ गया कि एक जवान ने अपनी सर्विस राइफल से साथियों पर गोलियां चला दीं. इस ताबड़तोड़ फायरिंग में एक असिस्टेंट कमांडेंट समेत चार CISF कर्मियों की मौत हो गई.
यह घटना शाम करीब सात बजे बसोहली के हट्ट मस्का इलाके में स्थित सेवा-II पावर प्रोजेक्ट के सीआईएसएफ कैंप में हुई. घटना की सूचना मिलते ही बसोहली पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और पूरे इलाके को घेरकर जांच शुरू कर दी.
कहासुनी के बाद अचानक चली गोलियां
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, कैंप में तैनात सीआईएसएफ कर्मियों के बीच किसी बात को लेकर तीखी कहासुनी हुई थी. देखते ही देखते बात बढ़ गई और एक हेड कांस्टेबल ने गुस्से में अपनी बंदूक से फायरिंग कर दी. बताया जा रहा है कि आरोपी जवान 2009 बैच का है.
असिस्टेंट कमांडेंट समेत चार की मौत
इस घटना में जान गंवाने वाले चार CISF कर्मियों की पहचान असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडे, सब-इंस्पेक्टर लक्ष्मण सिंह, कॉन्स्टेबल रफीक अहमद और कॉन्स्टेबल संदीप कुमार के रूप में बताई गई है. पुलिस के मुताबिक चारों कर्मी सेवा-II हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट की सुरक्षा में तैनात थे. फायरिंग के बाद उन्हें बचाने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी.
सेवा-II पावर प्रोजेक्ट में हुई घटना
यह घटना कठुआ जिले के पहाड़ी इलाके बसोहली के माशका क्षेत्र में स्थित सेवा-II हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट में हुई. इस महत्वपूर्ण पावर प्रोजेक्ट की सुरक्षा के लिए CISF की तैनाती की गई है.
कठुआ पुलिस ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार CISF कर्मियों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था और इसके बाद एक जवान ने कथित तौर पर अपने सहयोगियों पर फायरिंग कर दी.
पुलिस ने शुरू की जांच
घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे हैं. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि विवाद की असली वजह क्या थी, फायरिंग किन परिस्थितियों में हुई और आरोपी जवान ने किन परिस्थितियों में अपनी सर्विस राइफल का इस्तेमाल किया.
घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है. सुरक्षा एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि फायरिंग से पहले कैंप में क्या हुआ था.

