हमारे यहां कई लोगों को लग रहा था कि ब्रिक्स समिट से क्या ही होगा. नेता आएंगे, हाथ मिलाएंगे, फोटो खिंचवाएंगे और चले जाएंगे, लेकिन डिप्लोमेसी में मैसेजिंग बहुत बड़ी चीज होती है. इसी मैसेजिंग के लिए सब काम छोड़कर पुतिन भी भारत आए. जिनपिंग भी सात साल बाद भारत आए. क्योंकि ये वक्त दुनिया के लिए मुश्किल वक्त है. दो-दो युद्ध छिड़े हुए हैं. उधर ट्रंप की इस सनक के साथ चल रहे हैं कि वही दुनिया के बॉस हैं. ऐसे वक्त में भारत में ब्रिक्स के मंच से ट्रंप को कैसे जवाब मिला है. ये आपको बताएंगे.
पीएम मोदी, रूस के राष्ट्रपति पुतिन औऱ चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग जब भी मिलते हैं तो ग्लोबल हेडलाइन बनती है. इस बार भी ब्रिक्स में पीएम मोदी, पुतिन और जिनपिंग की एक साथ तस्वीरें सामने आई हैं. ब्रिक्स समिट के दौरान पीएम मोदी ने सभी ब्रिक्स नेताओं के साथ पौधारोपण किया. पीएम मोदी के एक तरफ पुतिन और दूसरी तरफ जिनपिंग खड़े थे.
भारत मंडपम में भी तीनों नेता एक साथ चलते दिखाई दिए. ये तस्वीरें देखिए पीएम मोदी, पुतिन और जिनपिंग एक साथ समिट के लिए जा रहे हैं. पीएम मोदी पूरे कॉन्फिडेंस के साथ सभी को लीड कर रहे हैं.
पीएम मोदी, जिनपिंग और पुतिन को एक साथ देखकर ट्रंप जरूर टेंशन में होंगे. क्योंकि पिछले साल SCO समिट में पीएम मोदी, पुतिन और जिनपिंग एक साथ मिले थे. जिसे देखकर ट्रंप ने यहां तक कहा था कि हमने भारत को चीन के हाथों खो दिया है.
अब एक बार फिर से ट्रंप का वही हाल हो रहा होगा. लेकिन सिर्फ तस्वीरों से ही नहीं. पीएम मोदी ने खुलकर ब्रिक्स के मंच से कह दिया कि किसी एक के हिसाब से दुनिया नहीं चलेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘भारत में आयोजित इस ब्रिक्स समिट का संदेश स्पष्ट होना चाहिए. अगर हमारा भविष्य साझा है तो उसके निर्माण का अधिकार भी साझा होना चाहिए. आवाज से प्रभाव तक, विशेषाधिकार से साझेदारी तक, यही ब्रिक्स @ 20 का संकल्प हो.’
ब्रिक्स समिट की शुरुआत करते हुए आज पीएम मोदी ने जो ओपनिंग रिमार्क दिया, उसमें पीएम मोदी ने दुनिया को समझा दिया कि वर्ल्ड ऑर्डर ग्लोबल साउथ के हिसाब से बदलना पड़ेगा. आपको बताता हूं कि पीएम मोदी ने क्या क्या कहा और उसके मायने क्या है…
ब्रिक्स का मंच गुटबाजी का नहीं
पीएम मोदी ने कहा कि ब्रिक्स किसी के खिलाफ नहीं है. यानी पीएम मोदी ने सबको ये बता दिया कि ब्रिक्स का मंच गुटबाजी या एंटी वेस्ट मंच बनाने के लिए नहीं है. पीएम मोदी ने साफ कहा कि अब दुनिया के पुराने नियम बदलने होंगे. जिसकी जितनी आर्थिक ताकत है उसके हिसाब से उसे भागीदारी देनी होगी. भारत जैसे देश जो ग्लोबल इकॉनमी को गति दे रहे हैं. उन्हें ग्लोबल इकॉनमी गवर्नंस को दिशा देने में उनकी भूमिका मिलनी चाहिए.
पीएम मोदी ने UN को भी लपेटा. उन्होंने कहा कि UN में रिफॉर्म को टाला नहीं जा सकता. यानी UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता का टाइम आ गया है. पीएम मोदी ने IMF, वर्ल्ड बैंक जैसी संस्थाओं में दबदबा रखने वाले देशों की भी क्लास लगाई. पीएम मोदी ने ग्लोबल गवर्नंस को भी बदलने पर जोर दिया और कहा कि इस पिरामिड ऑफ प्रिवलिज को प्लेटफॉर्म ऑफ पार्टनरशिप में बदलना होगा.
पीएम मोदी ने ब्रिक्स समिट को संबोधित करते हुए कहा, ‘हम किसी के विरुद्ध नहीं हैं, बल्कि सबको साथ लेकर चलने की सोच के साथ आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं. अब समय है कि हम ब्रिक्स में हमारी एकता और आम सहमति को वैश्विक मंच पर ठोस परिणामों में बदले.’
पीएम मोदी ने कहा, ‘ग्लोबल साउथ आज वैश्विक संकटों की फ्रंट रो (अग्रिम पंक्ति) में है, लेकिन डिसीजन-मेकिंग (फैसले लेने की प्रक्रिया) की बैक रो (पिछली पंक्ति) में है. हमें इस पिरामिड और प्रिविलेज को प्लेटफॉर्म और पार्टनरशिप में बदलना है. जहां हर देश की आवाज़ हो, हर सदस्य का स्टेक हो, हर प्रयास के केंद्र में मानवता का विकास हो. हमें ग्लोबल साउथ को रूल-टेकर से रूल-शेपर बनाने के लिए प्रयास करने होंगे. ब्रिक्स के माध्यम से हम ग्लोबल साउथ के देशों के युवा डिप्लोमेट्स और पॉलिसीमेकर को नेगोशिएशन स्किल्स, प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और लीगल एक्सपर्टीज़ प्रदान कर सकते हैं.’
पीएम मोदी ने ये भी साफ कर दिया कि ब्रिक्स का मंच किसी के खिलाफ नहीं है यानी उन्होंने ये मैसेज दे दिया कि भारत ना कभी किसी गुटबाजी में पड़ा है, ना पड़ेगा. भारत तो सबको साथ लेकर चलने में विश्वास रखता है.
इसके साथ ही पीएम मोदी ने दुनिया के बाकी ताकतवर देशों को भी ये भी मैसेज दे दिया कि अब चीजें को बदलने का टाइम आ गया है. पुराना ढर्रे पर चीजें नहीं चलेगी. इसके लिए UNITED NATION में भी रिफॉर्म करना होगा. ब्रिक्स के साझा घोषणापत्र में इसी का जिक्र किया गया है. संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में भारत की एंट्री का खुलकर समर्थन किया गया है.
साझा घोषणापत्र में UN में रिफॉर्म का जोर दिया गया है. सिक्योरिटी काउंसिल को भागीदारी बढ़ाने की बात कही गई है. ये कहा गया है कि सिक्योरिटी काउंसिल में स्थायी सदस्य चीन और रूस दोनों UN की सिक्योरिटी काउंसिल में भारत और ब्राजील के बड़े रोल का समर्थन करते हैं.
पीएम मोदी ने भी ब्रिक्स के मंच से UNSC में रीफॉर्म की बात की. पीएम मोदी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र परिषद में रीफॉर्म को अब टाला नहीं जा सकता है. पीएम मोदी ने कहा, ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों को अब और टाला नहीं जा सकता है। इस विषय पर टेक्स्ट-आधारित वार्ताओं को एक निश्चित समय सीमा और स्पष्ट परिणामों के साथ जोड़ना होगा. उसी तरह, वित्तीय संस्थानों में वोटिंग पावर, नेतृत्व के पद और नीतिगत प्राथमिकताएं आज की आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप होनी चाहिए.’
वर्ल्ड ऑर्डर पर अमेरिका और यूरोप को मैसेज मिल गया तो उधर टैरिफ पर ट्रंप को तगड़ा मैसेज मिल गया. आप देखिए कि ब्रिक्स के नई दिल्ली घोषणापत्र में अमेरिका का नाम लिए बिना, टैरिफ पर ट्रंप की नीतियों का विरोध किया गया है. साझा घोषणापत्र में कहा गया है
- हम एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों में बढ़ोतरी पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हैं
- क्योंकि ये व्यापार को विकृत करते हैं और WTO के नियमों के अनुरूप नहीं हैं.
- ऐसे कदमों से वैश्विक व्यापार में कमी, वैश्विक सप्लाई चेन में बाधा आती है
- इससे वैश्विक आर्थिक विकास की संभावनाओं पर नकारात्मक असर पड़ सकता है
इसके अलावा साझा घोषणापत्र में एकतरफा प्रतिबंधों का भी विरोध किया गया है, ये जो आए दिन अमेरिका कभी रूस, कभी ईरन पर प्रतिबंध लगा देता है, उस पर निशाना साधते हुए ये कहा गया कि ऐसे प्रतिबंध UN चार्टर के खिलाफ हैं.
इसके अलावा ट्रंप इस बात से भी उखड़े रहते थे कि ब्रिक्स डॉलर को चुनौती ना दे. अपना पेमेंट सिस्टम ना डेवलेप करे. लेकिन ब्रिक्स के साझा घोषणापत्र में भारत की तरफ से जो लोकल करेंसी में व्यापार की बात कही गई थी उस पर भी जोर दिया गया है.
- घोषणापत्र में क्रॉस बॉर्डर पेमेंट मैकेनिज्म के लिए BRICS Payment Task Force की बात कही गई.
- ट्रेड और निवेश में लोकल करेंसी के इस्तेमाल पर चर्चा की बात कही गई है.
- घोषणापत्र में कहा गया कि BRICS Payment Task Force के जरिये ब्रिक्स देशों के बीच क्रॉस बॉर्डर पेमेंट कैसे हो इसका सॉल्यूशन देखा जाए
- ऐसा उपाय जो फास्ट हो, लो कॉस्ट हो, सेफ हो
यानी ब्रिक्स देश लोकल करेंसी में व्यापार की संभावना तलाशने पर जोर दे रहे हैं. इससे बॉर्डर के दबदबे को चुनौती मिलेगी। ट्रंप की परेशानी बढ़ेगी. आप ये भी देखिए कि पीएम मोदी ने जो लाइन ली है. वही बात रूस के राष्ट्रपति भी कह रहे हैं. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी यही कह रहे हैं
रूस के राष्ट्रपति पुतिन G-7 की आर्थिक ताकत पर सवाल उठाया
पुतिन ने ग्लोबल इकॉनमी में BRICS की बढ़ती हिस्सेदारी और G7 की घटती हिस्सेदारी की तुलना की. कहा कि जहां वैश्विक अर्थव्यवस्था में BRICS देशों की हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी है, वहीं G7 की हिस्सेदारी लगभग 18 फीसदी है. इसी संदर्भ में पुतिन ने सवाल उठा दिया कि पता नहीं ये खुद को G7 क्यों कहते हैं. दूसरी तरफ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी Emerging Markets में ब्रिक्स सबसे प्रभावशाली प्लेटफॉर्म है. शी जिनपिंग ने अमेरिका ना नाम लिए बिना कहा कि पॉवर पॉलिटिक्स बढ़ रही है. इटरनेशनल ऑर्डर पर दबाव बढ़ गया है, शांति, विकास, सिक्योरिटी में कमी आई है.
जब भी ब्रिक्स की बात होती है तो उसकी तुलना G-7 से होती है. अगर आप दोनों के बीच की तुलना देखेंगे तो आंकड़ों में ब्रिक्स देश भारी पड़ते हैं. आप देखिए
| पिछले 5 साल के आंकड़े | BRICS | G7 |
| ग्लोबल GDP में हिस्सेदारी | 40% | 29% |
| ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग | 40% | 33% |
| सेना | करीब 71 लाख सैनिक | 24 लाख सैनिक |
| तेल गैस प्रोडक्शन | 43% | 26% |
| कोयला | 78% | 8% |
| आबादी | 400 करोड़ | 80 करोड़ |
| जमीन | 4.77 करोड़ वर्ग किलोमीटर | 2.11 करोड़ वर्ग किलोमीटर |
यही नहीं रेयर अर्थ मैटेरियल की बात करें तो IEA के मुताबिक, 2024 में अकेले चीन के पास रेयर अर्थ मैटेरियल का करीब 91 प्रतिशत हिस्सा था. G7 देश ही नहीं पूरी दुनिया रेयर अर्थ को लेकर चीन पर निर्भर है.
4 देशों के समूह में अब 21 देश
जब ब्रिक्स शुरू हुआ था, तो उसमें 4-5 देश ही थे. अब पार्टनर देश मिलाकर 21 देश हो गए हैं. 11 सदस्य देश हैं. यानी ब्रिक्स का आकार बड़ा हो गया है. इस वजह से ब्रिक्स के ज्वाइंट डिक्लरेशन को तैयार करना पहले के मुकाबले मुश्किल हो जाता है. ऊपर से भारत में ब्रिक्स ऐसे वक्त में हो रहा है, जब भयंकर युद्ध छिड़े हुए हैं. सप्लाई चेन बाधित है, एनर्जी क्राइसिस चल रहे हैं.
ब्रिक्स के मंच पर ही ऐसे देश हैं, जिनके बीच में तनातनी है. जैसे ईरान और यूएई… इन सब दिक्कतों के बावजूद ब्रिक्स के ज्वाइंट डिक्लरेशन को बिना आपत्ति के अपना लिया गया है. ये भी भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत है. इतने मुश्किल वक्त में भी भारत सभी देशों को एक पेज पर लेकर आया. साझा बयान जारी हुआ. ऐसा साझा बयान जिसकी भाषा पर किसी देश के सदस्य ने आपत्ति नहीं जताई.
ब्रिक्स समिट में कैसे कैसे बड़े धमाल हो गए उसकी एक और तस्वीर आपको दिखाता हूं. ब्रिक्स समिट के दौरान UAE और ईरान के नेता मिले. अबू धाबी के क्राउन प्रिंस और ईरान के राष्ट्रपति के बीच मुलाकात हुई. ये मुलाकात इसलिए चौंकाती है, क्योंकि अभी पश्चिम एशिया के युद्ध को लेकर दोनों देशों में तनातनी चल रही है. ईरान यूईए पर कई मिसाइलें दाग चुका है. UAE के एनर्जी इंस्टॉलेशन को फोड़ चुका है. लेकिन अब ब्रिक्स समिट के मंच ये दोनों देशों के नेता बातचीत कर रहे हैं.
बैठक में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई. दोनों नेताओं ने तनाव कम करने, तनावपूर्ण स्थिति को नियंत्रित करने और क्षेत्र में स्थिरता कायम करने की बात की. UAE और ईरान के नेता मुलाकात कर रहे हैं, लेकिन ये सब संभव कैसे हुआ, कैसे इन देशों में साझा घोषणा पत्र को लेकर सहमति बनी उसकी भी कहानी आपको बताता हूं.
ब्रिक्स में शामिल यूएई, ईरान और सऊदी अरब के बीच पश्चिम एशिया के हालात को लेकर गहरे मतभेद थे. लेकिन इस घोषणापत्र को पूरा करने के लिए कल रात 4 बजे तक मीटिंग्स चली हैं.
भारत ने बाकी देशों को डिप्लोमेट्स के साथ जो माथापच्ची की उसका पॉजिटिव रिजल्ट दिखा और ये बड़ी बात इसलिए भी है क्योंकि इससे पहले विदेश मंत्रियों की बैठक में आम सहमति नहीं बन पाई थी. भारत ने मतभेद दूर करने के लिए लबी बातचीत की. प्रधानमंत्री मोदी की ईरानी राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद भरोसा बढ़ा. पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच भारत ने लगातार बातचीत कर मतभेद दूर किए. कई विवादास्पद मुद्दों पर असहमति थी लेकिन भारत सबको एक मंच पर लाया. भारत की कोशिश रही कि विवादित मुद्दे व्यापक प्रक्रिया और संयुक्त घोषणा को रोक न दें. भारत की कोशिश थी कि मतभेदों के बावजूद आम सहमति वाले मुद्दों पर फोकस रहे.
आप ये भी देखिए कि ज्वाइंट डेक्लरेशन में एक बड़ी बात ये भी हुई कि चीन के सामने ही पाकिस्तान की धुलाई हो गई. सबसे अहम बात यह है कि इस घोषणापत्र में पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी शब्दों में निंदा की, 26 लोगों की मौत का स्पष्ट जिक्र किया गया है. आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात कही गई, यानी ब्रिक्स के मंच पर आतंकवाद के मुद्दे पर चीन भी पाकिस्तान को बचा नहीं पाया.
ब्रिक्स घोषणापत्र में आतंकवाद पर कड़ा संदेश
घोषणापत्र में आतंकवाद के हर रूप से लड़ने की प्रतिबद्धता दोहराई गई है. खास तौर पर सीमा पार आतंकवाद, आतंकवाद की फंडिंग, आतंकियों को सुरक्षित पनाह देने के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया गया है. आतंकवाद और उसे समर्थन देने वालों को जवाबदेह ठहराकर कानून के तहत न्याय के कटघरे में लाने की बात कही गई है. BRICS ने आतंकवाद के खिलाफ किसी भी तरह के दोहरे मापदंड को खारिज किया है.
इधर ब्रिक्स में भारत का जलवा दुनिया देख रही है. उधर आप पाकिस्तान को देखिए कि पाकिस्तान भी ब्रिक्स का सदस्य बनना चाहता है, लेकिन पाकिस्तान की दाल गल नहीं पा रही है. पाकिस्तान ने 2023 में BRICS की सदस्यता के लिए अप्लाई किया था. 2023 में BRICS की अध्यक्षता रूस के पास थी. साल 2024 में BRICS के सदस्यों की संख्या बढ़ी थी. मिस्र, इथोपिया, ईरान और UAE ब्रिक्स के सदस्य बने थे. इसके बाद भी पाकिस्तान BRICS का मेंबर नहीं बन पाया है. भारत ने BRICS में पाकिस्तान की एंट्री का विरोध किया है. पाकिस्तान के आवेदन पर भारत ने Veto लगा दिया था.
यानी पाकिस्तान ने पूरी कोशिश की है, ब्रिक्स में शामिल होने की, लेकिन भारत के वीटो की वजह से उसे ब्रिक्स में एंट्री नहीं मिल पा रही है.
इधर पाकिस्तान की क्लास लगी उधर चीन को भी संदेश मिल गया कि रिश्ते तभी मजबूत होंगे जब सहमति से विवाद सुलझाए जाएंगे. ये बातें आज पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात में हुई. ब्रिक्स समिट के पहले दिन के सेशन के खत्म होने के बाद दोनों नेताओं की द्विपक्षीय वार्ता हुई. ये मुलाकात करीब 45 मिनट चली.
चीन के साथ भारत के संबंध उतार चढ़ाव से भरे रहे हैं. ऐसे में पीएम मोदी और जिनपिंग की मुलाकात काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. मीटिंग के दौरान पीएम मोदी ने ब्रिक्स में चीन के सकारात्मक सहयोग के लिए धन्यवाद दिया.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘भारत में आपका हार्दिक स्वागत करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है. ब्रिक्स समिट में आपके सकारात्मक वक्तव्य के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद. महोदय, भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान चीन से मिले समर्थन और सहयोग के लिए मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं. अब हमें द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा करने का अवसर मिल रहा है. एक बार फिर भारत में आपका हार्दिक स्वागत है.
पीएम मोदी ने जिनपिंग को 3 एम का फॉर्मूला
पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच हुई मुलाकात के दौरान दोनों देशों ने रिश्तों में स्थिरता, सीमा पर शांति और व्यापार असंतुलन जैसे मुद्दों पर जोर दिया. पीएम मोदी ने कहा कि भारत और चीन को आपसी मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए. पीएम मोदी ने आपसी रिश्तों में मजबूती के लिए 3 ‘Mutuals’ का फॉर्मूला दिया. उन्होंने Mutual Respect , Mutual Sensitivity और Mutual Interest को रिश्तों में सुधार का आधार बताया.
बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने सीमा विवाद को सुलझाने के लिए निष्पक्ष, तर्कसंगत और दोनों पक्षों की सहमति वाले समाधान निकालने की प्रतिबद्धता दोहराई. व्यापार में असंतुलन, सप्लाई चेन और बाजार तक बेहतर पहुंच जैसे मुद्दों पर भी एक दूसरे की चिंताओं को दूर करने की जरूरत पर जोर दिया गया.
पीएम मोदी से मुलाकात के दौरान जिनपिंग ने जो बातें कहीं वो भी बताते हैं. जिनपिंग ने पीएम मोदी से कहा कि आपने अपने जन्मदिन पर मुझे अपने गृह नगर में आमंत्रित किया था. हमारी अब तक 21 बार मुलाकात हो चुकी है, हमने कई महत्वपूर्ण सहमति बनाई, जिससे चीन-भारत संबंधों को स्थिर विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाने में मदद मिली.
उन्होंने कहा, चीन ने हमेशा रणनीतिक-दीर्घकालिक दृष्टिकोण से चीन-भारत संबंधों के विकास को देखा. भले ही हमारे दोनों देशों की राष्ट्रीय परिस्थितियां अलग-अलग हैं. लेकिन हम निश्चित रूप से एक-दूसरे की ताकत से सीख सकते हैं. एक-दूसरे का सहयोग कर सकते हैं. एक-दूसरे की सफलता में मदद कर सकते हैं और साझा विकास हासिल कर सकते हैं. हम समानता और व्यवस्थित बहुध्रुवीय विश्व की वकालत करते हैं. अपने अधिकारों और हितों पर एकाधिकार बनाने की कोशिश नहीं करते. विश्व में शांति, स्थिरता, विकास को बढ़ावा देने के लिए सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करना चाहते हैं.’

