सुखोई को लेकर HAL से डील
फाइटर जेट सुखोई 30-एमकेआई को लेकर गुरुवार को महत्वपूर्ण समझौता हुआ। करीब 13,500 करोड़ रुपये के इस समझौते में 12 ‘सुखोई -30एमकेआई’ लड़ाकू विमानों की खरीद और अन्य प्रावधानों के लिए एचएएल के साथ यह अनुबंध किया गया है। सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को बढ़ावा देते हुए रक्षा मंत्रालय और मेसर्स हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के बीच 12 सुखोई 30-एमकेआई फाइटर जेट और संबंधित उपकरणों की खरीद के लिए एक करार पर मुहर लगी।
100 K-9 होवित्जर बनाने की मंजूरी
रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ को बड़ी कामयाबी मिली है। CCS ने भारतीय वायुसेना के लिए 12 Su-30 MKI लड़ाकू विमान और भारतीय सेना के लिए 100 K-9 वज्र सेल्फ-प्रोपेल्ड होवित्जर बनाने की मंजूरी दे दी है। इन दोनों परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 20,000 करोड़ रुपये है। CCS ने गुरुवार को इन परियोजनाओं को मंजूरी दी। Su-30-MKI जेट के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर पहले ही हस्ताक्षर हो चुके हैं।
HAL और L&T से कॉन्ट्रैक्ट
HAL नासिक स्थित अपनी फैक्ट्री में 12 SU-30MKI जेट का निर्माण करेगा। इसकी लागत लगभग 13,000 करोड़ रुपये होगी। ये जेट उन विमानों की जगह लेंगे जो पिछले कुछ सालों में दुर्घटनाग्रस्त हो गए थे। लार्सन एंड टर्बो (L&T) गुजरात के हजीरा में 100 K-9 सेल्फ-प्रोपेल्ड होवित्जर तोप बनाएगा। यह एक रिपीट ऑर्डर है क्योंकि सेना में पहले ही 100 हॉवित्जर शामिल किए जा चुके हैं। L&T ने इन हॉवित्जर में स्वदेशी सामग्री की मात्रा बढ़ा दी है।
इसलिए अहम है ये प्रोजेक्ट
ये दोनों प्रोजेक्ट सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी HAL और L&T के लिए हैं। इनसे इनकी आपूर्ति श्रृंखला में शामिल छोटे और मध्यम उद्यमों को मजबूती मिलने की उम्मीद है। इन होवित्जर को रेगिस्तानी इलाकों के साथ-साथ लद्दाख में चीन सीमा पर भी तैनात किया गया है। यह कदम रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे न सिर्फ़ हमारी रक्षा क्षमता मजबूत होगी बल्कि देश में रोज़गार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
सुखोई-होवित्जर से बढ़ेगी ताकत
सुखोई-30 MKI भारतीय वायुसेना का एक प्रमुख फाइटर जेट है। यह ऐसा लड़ाकू विमान है, जो हवा से हवा में और हवा से जमीन पर हमला करने में सक्षम है। K-9 वज्र होवित्जर तोप एक शक्तिशाली सेल्फ-प्रोपेल्ड हॉवित्जर है। यह दुश्मन के ठिकानों पर सटीक निशाना लगा सकता है। यह भारतीय सेना की फायर पावर को काफी बढ़ाता है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अहम कदम
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। यह कदम आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। HAL और L&T जैसी भारतीय कंपनियों को ये बड़े प्रोजेक्ट मिलने से देश में रक्षा उत्पादन का इकोसिस्टम मजबूत होगा। इससे छोटे और मझोले उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा, और रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

