वॉटर ग्लास टेस्ट में स्टीव जॉब्स उम्मीदवारों को एक नॉर्मल सा काम करने के लिए कहते थे, जैसे कि ‘एक ग्लास पानी लाने’ के लिए कहना. इसके जरिए वह उम्मीदवार की प्रॉब्लम सॉल्व करने की क्षमता, क्रिएटिविटी, पहल करने की ललक और प्रेशर वाली सिचुएशन में व्यवहार चेक करते थे. यह टेस्ट उनकी ‘Stay Hungry, Stay Foolish’ फिलॉसफी से जुड़ा हुआ है. वे अपने साथ ऐसे लोगों को जोड़ना चाहते थे जो इनोवेशन, जुनून और लीक से हटकर सोचने की क्षमता रखते हों.
Steve Jobs Water Glass Test: वॉटर ग्लास टेस्ट में क्या होता है?
इसके जरिए इंटरव्यूअर चेक करता है कि उम्मीदवार इस बात को कैसे संभालता है. मिसाल के तौर पर:
मूल्यांकन: उम्मीदवार की प्रतिक्रिया के आधार पर इंटरव्यूअर उनकी क्विक थिंकिंग, अडैप्टेबिलिटी, डिटेल्स पर फोकस और कंपनी के कल्चर में फिट होने की क्षमता का आकलन करता है.
मान लीजिए, उम्मीदवार से पानी लाने के लिए कहा जाता है. अगर उम्मीदवार सिर्फ पानी लाता है तो यह सामान्य प्रतिक्रिया है. लेकिन अगर वे पूछते हैं, ‘क्या आप इसे बोतल में चाहेंगे या ग्लास में?’ या फिर पानी के साथ बर्फ या नींबू लाते हैं तो यह उनकी क्रिएटिविटी और पहल करने की कला दर्शाता है.
इंटरव्यू में फिर से ट्रेंड कर रहा है वॉटर ग्लास टेस्ट
मॉडर्न रिक्रूटमेंट में क्रिएटिविटी की डिमांड: आज के समय में कंपनियां ऐसे उम्मीदवार चाहती हैं जो टेक्निकल स्किल के साथ-साथ क्रिएटिविटी और प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल की क्षमता रखते हों. वॉटर ग्लास टेस्ट जैसे अप्रोच इस तरह की क्षमताओं को परखने में मदद करते हैं.
वॉटर ग्लास टेस्ट के फायदे क्या हैं?
क्रिएटिविटी का आकलन: यह टेस्ट उम्मीदवार की क्रिएटिव थिंकिंग और लीक से हटकर सॉल्यूशन निकालने की क्षमता को परखता है.
कल्चर में फिट होना: Apple जैसी कंपनियां इनोवेशन और जुनून को महत्व देती हैं. इस टेस्ट के जरिए यह देख सकती हैं कि उम्मीदवार उनके कल्चर में फिट बैठता है या नहीं.
वॉटर ग्लास टेस्ट के नुकसान
अस्पष्टता: टेस्ट का उद्देश्य और इवैल्युएशन क्राइटेरिया स्पष्ट नहीं होते हैं, जिससे उम्मीदवार भ्रमित हो सकता है.
कल्चरल डिफरेंस: कुछ कल्चर्स में इस तरह के अप्रत्याशित अनुरोध को गंभीरता से लेने के बजाय असभ्य या अपमानजनक माना जा सकता है.

