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oi-Sohit Kumar
Supreme Court, Sonam Wangchuk: सुप्रीम कोर्ट (SC) ने लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) की हिरासत के मामले में केंद्र सरकार (Central Govt) के रवैये पर सख्त नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि वांगचुक के जिस भाषण को आधार बनाकर उन पर कार्रवाई की गई, उसके अनुवाद और असल रिकॉर्डिंग में जमीन-आसमान का अंतर है।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने कहा कि आज के आधुनिक युग (Modern era) में, जहां हमारे पास AI जैसी तकनीक मौजूद है, वहां अनुवाद में 98% सटीकता (accuracy) होनी चाहिए, न कि ऐसी गंभीर गलतियां।

Sonam Wangchuk Case: केंद्र सरकार के अनुवाद पर सवाल
सुनवाई के दौरान जब वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो (Gitanjali Angmo) की ओर से सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने दलीलें पेश कीं, तो उन्होंने केंद्र द्वारा दिए गए अनुवाद पर सवाल उठाए। सिब्बल ने कहा कि ट्रांसक्रिप्ट में ‘लद्दाखियों का आत्मदाह’ और ‘सरकार को उखाड़ फेंकने’ जैसे शब्द जोड़े गए हैं, जबकि वांगचुक ने ऐसा कुछ कहा ही नहीं था।
इस पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) के.एम. नटराज से कहा, ‘हमें इन भाषणों की वास्तविक ट्रांसक्रिप्ट चाहिए। यदि भाषण केवल 3 मिनट का है और आपकी ट्रांसक्रिप्ट 7-8 मिनट तक चलती है, तो इसमें निश्चित रूप से दुर्भावना (Malice) नजर आती है।’
Sonam Wangchuk Case Update: कपिल सिब्बल ने ली चुटकी
जब ASG ने सफाई देते हुए कहा कि विभाग ने यह रिपोर्ट तैयार की है और वे एक्सपर्ट नहीं हैं, तो कोर्ट ने तीखी टिप्पणी की। कोर्ट ने शायराना अंदाज में कहा, ‘एक शेर है- हमने वो भी सुना जो उन्होंने कहा ही नहीं।’ इस पर कपिल सिब्बल ने भी चुटकी लेते हुए कहा, ‘हां, और जो हम कह रहे हैं वो उन्होंने सुना ही नहीं।’
NSA के तहत कार्रवाई पर सवाल
सोनम वांगचुक वर्तमान में जोधपुर जेल में बंद हैं और उन पर ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कानून’ (NSA) लगाया गया है। कपिल सिब्बल ने दलील दी कि वांगचुक केवल अपने चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादों (राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची) को पूरा करने की मांग कर रहे थे। उन्होंने पूछा कि क्या 2022 के बाद उनके किसी भी भाषण ने हिंसा भड़काई है?
Supreme Court News: कोर्ट का अगला कदम
कोर्ट ने अब उस पेनड्राइव को तलब किया है जिसमें वांगचुक के भाषणों की मूल रिकॉर्डिंग है। यह पेनड्राइव जोधपुर जेल से एक सीलबंद बॉक्स में मंगवाई गई है, जिसे कल अदालत में पेश किया जाएगा। कोर्ट यह देखना चाहता है कि हिरासत का आदेश जिन दस्तावेजों के आधार पर दिया गया, उनमें कितनी सच्चाई है।
क्यों हुई सोनम वांगचुक को जेल? क्या है पूरा मामला?
दरअसल, सोनम वांगचुक पिछले काफी समय से लद्दाख के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को बचाने और केंद्र शासित प्रदेश को संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) के तहत सुरक्षा देने की मांग कर रहे हैं। मामला तब बिगड़ गया जब पिछले साल सितंबर में उन्होंने राज्य के दर्जे की मांग को लेकर 35 दिनों का उपवास (Anshan) शुरू किया।
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान लद्दाख में हिंसा भड़क गई, जिसमें चार लोगों की जान चली गई। हालांकि वांगचुक ने तुरंत अनशन खत्म कर युवाओं से शांति की अपील की, लेकिन प्रशासन ने उन पर हिंसा भड़काने और सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने के गंभीर आरोप लगाए। कोर्ट अब उन विवादित भाषणों की असल रिकॉर्डिंग की जांच कर रहा है ताकि यह साफ हो सके कि गिरफ्तारी के आधार सही थे या नहीं।

