Shiv Ji Ki Aarti Om Jai Shiv Omkara: सावन सोमवार के दिन भगवान शिव की आरती करना अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा, जलाभिषेक और मंत्र जाप के बाद श्रद्धापूर्वक शिव आरती करने से भगवान भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी विशेष कृपा बरसाते हैं. आरती के माध्यम से भक्त अपनी श्रद्धा, भक्ति और समर्पण भाव को भगवान शिव के चरणों में अर्पित करते हैं. मान्यता है कि सावन सोमवार पर नियमित रूप से शिव आरती करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है. इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और परिवार में सकारात्मक वातावरण बना रहता है. भगवान शिव की कृपा से जीवन की बाधाएं कम होती हैं तथा मन को शांति और आत्मिक संतोष की अनुभूति होती है. यहां पढ़ें संपूर्ण शिवजी की आरती…
शिवजी की आरती ॐ जय शिव ओंकारा | Shiv Ji Ki Aarti Om Jai Shiv Omkara
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा.
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे.
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे.
त्रिगुण रूप निरखत त्रिभुवन जन मोहे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी.
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघंबर अंगे.
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमण्डल चक्र त्रिशूलधारी.
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका.
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा.
भांग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला.
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी.
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे.
कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥ स्वामी ॐ जय शिव ओंकारा॥

