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Shani Pradosh Vrat Katha : आज शनि प्रदोष व्रत है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल भगवान शिव का अत्यंत प्रिय समय होता है. इस दौरान शिव पूजन, मंत्र जाप, आरती और व्रत कथा का श्रवण विशेष फलदायी माना गया है. कथा के माध्यम से भक्तों को यह संदेश मिलता है कि सच्ची श्रद्धा, अच्छे कर्म, विनम्रता और धैर्य के साथ किया गया हर प्रयास अंततः शुभ फल प्रदान करता है. यहां पढ़ें संपूर्ण शनि प्रदोष व्रत कथा…
Shani Pradosh Vrat Katha in Hindi: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. जब प्रदोष व्रत शनिवार के दिन पड़ता है, तो उसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है. इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और शनिदेव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि पूजा के साथ शनि प्रदोष व्रत कथा का श्रवण या पाठ करने से व्रत पूर्ण माना जाता है और साधक को भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है. हालांकि, यह मान्यता धार्मिक आस्था और पुराणों में वर्णित परंपराओं पर आधारित है.
शनि प्रदोष व्रत कथा (Shani Pradosh Vrat Katha)
शनि प्रदोष व्रत कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक नगर सेठजी रहते थे. सेठजी के घर में हर प्रकार की सुख-सुविधाएं थीं लेकिन संतान ना होने वजह से सेठ और सेठानी हमेशा दुखी रहते थे. सेठ को इस बात की चिंता थी कि उसका वंश आगे कैसे बढ़ेगा. काफी सोच-विचार करके सेठजी ने अपना काम नौकरों को सौंप दिया और खुद सेठानी के साथ तीर्थयात्रा पर निकल पड़े.
अपने नगर से बाहर निकलने पर सेठजी को एक साधु मिले, जो ध्यानमग्न बैठे थे. सेठजी ने सोचा, क्यों ना साधु से आशीर्वाद लेकर आगे की यात्रा की जाए. वे सेठानी को साथ लेकर साधु के पास गए और उनके पास जाकर बैठ गए. साधु ने जब आंखें खोलीं तो उन्हें ज्ञात हुआ कि सेठ और सेठानी काफी समय से आशीर्वाद की प्रतीक्षा में बैठे हैं. आज्ञा पाकर सेठ और सेठानी ने साधु को प्रणाम किया और अपने बारे में जानकारी दी. साधु ने सेठ और सेठानी से कहा कि मैं तुम्हारा दुःख जानता हूं. तुम शनि प्रदोष व्रत करो, इससे तुम्हें संतान सुख प्राप्त होगा. साधु ने सेठ-सेठानी प्रदोष व्रत की विधि भी बताई और शंकर भगवान की निम्न वंदना बताई.
हे रुद्रदेव शिव नमस्कार .
शिवशंकर जगगुरु नमस्कार ॥
हे नीलकंठ सुर नमस्कार .
शशि मौलि चन्द्र सुख नमस्कार ॥
हे उमाकांत सुधि नमस्कार .
उग्रत्व रूप मन नमस्कार ॥
ईशान ईश प्रभु नमस्कार .
विश्वेश्वर प्रभु शिव नमस्कार ॥
दोनों साधु से आशीर्वाद लेकर तीर्थयात्रा के लिए आगे चल पड़े. वे दोनों साधु का आशीर्वाद लेकर खुशी खुशी तीर्थ यात्रा पर चले गए. वहां से लौटकर आने के बाद उन दोनों ने विधि विधान से शनि प्रदोष का व्रत रखा. दान और दक्षिणा दिया. भगवान शिव की कृपा से सेठ और सेठानी को पुत्र की प्राप्ति हुई और खुशियों से उनका जीवन भर गया. इस प्रकार से जो भी शनि प्रदोष का व्रत रखकर शिव पूजा करेगा, शनि प्रदोष की व्रत कथा सुनेगा, निश्चित ही उसे शिव कृपा प्राप्त होगी.
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पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें

