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UAE Shahzadi Khan News: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की रहने वाली शहजादी खान का सपना था कि वह प्लास्टिक सर्जरी कराकर अपने चेहरे को संवार सके। लेकिन उसे क्या पता था कि यह सपना ही उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा धोखा बन जाएगा। सोशल मीडिया के जरिए उसे आगरा के उजैर से प्यार हुआ, जिसने उसे शादी और इलाज का झांसा देकर अबू धाबी बुला लिया। पर हकीकत यह थी कि वह उसे एक घरेलू नौकरानी के रूप में बेच चुका था।
अबू धाबी पहुंचते ही शहजादी को पता चला कि उसे एक परिवार में नौकरानी बना दिया गया है। जब उसने विरोध किया और बाहर नौकरी करने की इच्छा जताई, तो उसे बाहर जाने से मना कर दिया गया। इसी बीच परिवार के चार महीने के बच्चे की टीकाकरण के बाद अचानक मौत हो गई। अस्पताल ने पोस्टमार्टम कराने की बात कही, लेकिन परिवार ने इनकार कर दिया।

कुछ दिनों बाद जब शहजादी वापस भारत लौटने की जिद करने लगी, तो उसे घर में ही बंदी बना लिया गया। आरोप है कि उसे प्रताड़ित कर उसके कपड़े उतरवाकर एक वीडियो बनाया गया, जिसमें उसे बच्चे की हत्या कबूलने के लिए मजबूर किया गया। इसी वीडियो को आधार बनाकर उसे गिरफ्तार कर लिया गया और अबू धाबी की अदालत ने उसे मौत की सजा सुना दी।
15 फरवरी को हुई शहजादी की फांसी का पता दिल्ली हाईकोर्ट में 03 मार्च को चला, जब शहजादी के परिवार ने उसकी खैरियत को लेकर अदालत में याचिका दायर की। जिसके जबाव में केंद्र सरकार ने बताया कि उसको 15 फरवरी को फांसा दी चुकी है।
हाई कोर्ट के जस्टिस सचिन दत्ता ने इसे बहुत दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने बताया कि शहजादी को 15 फरवरी को फांसी दी गई। उसका अंतिम संस्कार 5 मार्च किया जाएगा। बता दें कि शहजादी खान को अबू धाबी की जेल ‘अल-वाथबा’ में कैद किया गया था। इसी जेल में उसे गोली मारकर हमेशा के लिए सुला दिया गया।
मोहब्बत में धोखा और फिर धोखे से अबू धाबी ले जाई गई, फिर वहां धोखे में घर की नौकरानी बनी और फिर उसी धोखे और फरेब ने उसे क़ातिल बना दिया। जो अब कभी अपने देश नहीं लौट पाएगी।
बचपन की कठिनाइयों से संघर्ष तक का सफर
शहजादी खान 19 दिसंबर 2021 को अबू धाबी गई थी, लेकिन इससे पहले उसका जीवन संघर्षों से भरा था। जब वह केवल आठ साल की थी, तब एक हादसे में उबलता पानी उसके चेहरे पर गिर गया, जिससे उसका चेहरा और शरीर का कुछ हिस्सा झुलस गया। इसके बावजूद उसने हिम्मत नहीं हारी और पढ़ाई जारी रखी। वह एक एनजीओ ‘रोटी बैंक’ से भी जुड़ी थी, ताकि अपने चेहरे की प्लास्टिक सर्जरी के लिए पैसे जुटा सके।
इसी बीच, कोरोना महामारी के दौरान उसकी मुलाकात आगरा के उजैर से हुई, जिसने उसे अबू धाबी में इलाज कराने के लिए राजी किया। उजैर ने उससे 90 हजार रुपये और कुछ जेवर भी लिए। अबू धाबी पहुंचने पर उसे अपने फूफा और फूफी के घर भेज दिया गया। उसकी फूफी, नाजिया, वहां की नाहयान यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर थी।
जिस जुर्म को उसने किया ही नहीं,उसकी मिली सजा ए मौत
6 दिसंबर 2022 को नाजिया के चार महीने के बच्चे को टीका लगाया गया था, लेकिन कुछ ही घंटों में उसकी मौत हो गई। नाजिया और उनके पति ने अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाया, लेकिन पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। जल्दबाजी में बच्चे को दफना दिया गया।
कुछ समय बाद जब शहजादी भारत लौटने की जिद करने लगी, तो 10 फरवरी 2023 को नाजिया और उसके पति ने उसे बेरहमी से पीटा, उसके कपड़े उतरवाए और उसका वीडियो बना लिया। इस वीडियो के जरिए उस पर दबाव बनाया गया कि वह कबूल करे कि उसने बच्चे की हत्या की है। अगर वह ऐसा नहीं करती, तो यह वीडियो भारत में उसके परिचितों को भेजकर उसे बदनाम कर दिया जाता।
झूठे आरोप, अदालत का फैसला और मौत की सजा
टॉर्चर और मानसिक प्रताड़ना के बाद, शहजादी ने मजबूरी में वीडियो में हत्या की बात कबूल कर ली। इसके बाद, नाजिया और उसके पति उसे कार में बैठाकर एयरपोर्ट ले जाने के बहाने पुलिस स्टेशन ले गए और वहां वीडियो दिखाकर उसे गिरफ्तार करवा दिया।
अबू धाबी की अदालत में मुकदमा चला और वीडियो को सबूत मानते हुए उसे दोषी ठहरा दिया गया। निचली अदालत से लेकर सर्वोच्च अदालत तक, सभी ने उसे मौत की सजा सुनाई। अल-वाथबा जेल में बंद शहजादी ने अपने परिवार को फोन कर यह जानकारी दी कि 20 सितंबर 2024 के बाद कभी भी उसकी सजा-ए-मौत दी जा सकती है।
न्याय की गुहार, लेकिन कोई सुनवाई नहीं!
शहजादी के पिता ने कई बार भारतीय सरकार और विदेश मंत्रालय से मदद की अपील की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। 15 फरवरी 2025 को शहजादी को अबू धाबी की अल-वाथबा जेल में दे दी गई।
क्या UAE की अदालत ने की लापरवाही?
इस केस में कई सवाल उठते हैं:
- पोस्टमार्टम क्यों नहीं हुआ? बच्चे की मौत स्वाभाविक थी या किसी और कारण से हुई, यह जानने के लिए पोस्टमार्टम जरूरी था, जिसे परिवार ने नहीं कराया।
- 54 दिन बाद हत्या का शक क्यों? बच्चे की मौत के 54 दिन बाद अचानक शहजादी पर हत्या का आरोप क्यों लगाया गया?
- कब्र से दोबारा जांच क्यों नहीं हुई? UAE में अब भी शव को निकालकर मौत की असली वजह पता की जा सकती थी, लेकिन अदालत ने ऐसा नहीं किया।
- क्या शहजादी को निष्पक्ष कानूनी मदद मिली? एक गरीब भारतीय महिला को विदेशी जमीन पर अपनी बेगुनाही साबित करने का सही मौका मिला या नहीं, यह बड़ा सवाल है।
क्या शहजादी को इंसाफ मिलेगा?
शहजादी खान की कहानी एक दुखद सच्चाई बयां करती है कि कैसे एक लड़की को प्यार, धोखे और साजिश का शिकार बनाकर उसकी जिंदगी छीन ली गई। अब सवाल यह उठता है कि क्या भारत सरकार इस मामले में कुछ कर सकती है? क्या शहजादी की मौत के बाद भी सच सामने आएगा?
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