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Rice Price Update : भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है और सबसे ज्यादा निर्यात भी करता है. लेकिन, 10 साल में पहली बार देश में चावल का उत्पादन कम होने की आशंका जताई जा रही है. इससे आने वाले समय में कीमतें बढ़ने की आशंका को देखते हुए सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाने की तैयारी शुरू कर दी है. इसके अलावा ओपन मार्केट में दोगुना चावल उतारने की भी योजना बनाई है.
भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक और निर्यातक देश है.
नई दिल्ली. चीनी के बाद अब चावल की कीमतों में उछाल आने की आशंका बढ़ रही है. यही वजह है कि पिछले दिनों सरकार ने चावल से एथनॉल बनाने की लिमिट तय कर दी थी, ताकि खुदरा बाजार में उपभोक्ताओं पर बढ़ी कीमत का बोझ न पड़े. अब सरकार ने कहा है कि उत्पादन को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण चावल की कीमतों को काबू में करने के लिए चालू वित्तवर्ष में दोगुना चावल बाजार में उतारा जाएगा. अभी तक ओपन मार्केट के जरिये प्राइवेट कारोबारियों 2026-27 में करीब 25 लाख टन चावल बेचने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर दोगुना यानी 50 लाख टन कर दिया गया है.
उद्योग जगत के अधिकारियों का कहना है कि 10 साल में पहली बार चावल उत्पादन में कमी की आशंका जताई जा रही है. यह बीते 20 साल की सबसे बड़ी गिरावट होगी, क्योंकि फसल पकने के समय ही देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से अधिक बारशि हो गई और फसल खराब हो गई. इसका असर आने वाले समय में चावल की खुदरा कीमतों पर भी पड़ सकता है. उपभोक्ताओं को इससे बचाने के लिए सरकार भारतीय खाद्य निगम यानी एफसीआई के गोदाम से बाजार में चावल बेचने की तैयारी कर रही है.
सरकार ने पहले ही लगा दिए प्रतिबंध
सरकार ने कहा है कि आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना के दक्षिणी राज्यों को पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित करने, जमाखोरी रोकने और कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए 31 जनवरी, 2027 तक चावल और धान पर स्टॉक लिमिट लगाने का आदेश दे दिया है. सरकार इस योजना के तहत इस साल निजी खरीदारों को पहले ही 25 लाख मीट्रिक टन चावल बेच चुकी है, जबकि पिछले वित्तवर्ष की इसी अवधि में 11 लाख मीट्रिक टन बेचा गया था.
सबसे बड़ा चावल उत्पादक है भारत
चावल उत्पादन को लेकर चिंताएं इसलिए भी बढ़ रही हैं, क्योंकि भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है और सबसे ज्यादा निर्यात भी करता है. इस साल मानसून की बारिश सामान्य से 13 फीसदी कम रही, जिससे चावल उत्पादन पर असर पड़ा. इसके अलावा फसल पकने के समय हुई बारिश ने भी उत्पादन पर बुरा असर डाला है. अब सरकार का मकसद सप्लाई को बेहतर बनाना और जमाखोरी-कालाबाजारी पर रोक लगाना है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…

