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Kolkata News: कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में ट्रेनी डॉक्टर के रेप और मर्डर केस में उम्रकैद की सजा पाने संजय रॉय को आखिरकार नौकरी मिल गई है. संजय रॉय को जेल में काम करने के लिए रोजाना 80 रुपये मिलेंगे पर वह पूरा…और पढ़ें
आरजी कर केस के दरिंदे को जेल में मिली कौन सी नौकरी
कोलकाता. आरजी कर में ट्रेनी डॉक्टर के रेप केस में उम्रकैद की सजा काट रहे संजय रॉय को चार महीने हो गए. पिछले साल 9 अगस्त को आरजी कर अस्पताल में 31 वर्षीय डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या के आरोप में संजय रॉय को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी उसके बाद से वह प्रेसिडेंसी जेल में है और वहां अब उसे बागवानी का काम सौंपा गया है. 35 साल के संजय रॉय को 20 जनवरी को इस अपराध के लिए सजा सुनाई गई थी.
टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, अब वह एक ‘अकुशल’ मजदूर के रूप में रोजाना 80 रुपये कमाता है. जेल अधिकारियों के अनुसार, संजय रॉय सेल नंबर 6 में रहता है और अपना दिन जेल के बगीचे की देखभाल और अपने सेल की सफाई में बिताता है.
जेल के कैदियों से शुरू की बातचीत
एक जेल अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया है कि शुरुआत में वह निराश और अकेला दिखाई देता था. उन्होंने कहा कि समय के साथ वह दिनचर्या में ढल गया और अपने सौंपे गए कामों में अधिक रुचि लेने लगा. उसने अन्य कैदियों से भी बातचीत शुरू कर दी. केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जिसने इस मामले की जांच की और संजय रॉय को आरजी कर रेप और मर्डर केस में हमले का एकमात्र अपराधी माना है. यह अपराध अस्पताल के चौथे मंजिल के सेमिनार हॉल में हुआ था. हालांकि, सीबीआई ने कहा है कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है. इस मामले ने देश और विशेष रूप से चिकित्सा समुदाय को झकझोर कर रख दिया था और 164 दिनों के बाद रॉय को दोषी ठहराया गया.
काफी प्रभावशाली था संजय रॉय
आरजी कर केस में गिरफ्तारी से पहले रॉय पुलिस विभाग में अपने स्वयंसेवक स्थिति के बावजूद काफी प्रभावशाली था. उसके पास पुलिस मोटरसाइकिल का अनधिकृत उपयोग था और वह कोलकाता पुलिस की 4वीं बटालियन के बैरक बी14 में रहता था, जो उसे आधिकारिक रूप से नहीं मिलना चाहिए था. एक पूर्व मुक्केबाज, वह खुद को अजेय मानता था. अब, जेल नियमों के तहत रॉय अपनी कमाई का केवल आधा हिस्सा – 40 रुपये प्रतिदिन – व्यक्तिगत जरूरतों के लिए उपयोग कर सकता है.
संजय क्या करता है 40 रुपये का
40 रुपये खुद पर खर्च करने के बाद बची हुई रकम को बैंक खाते में जमा करता है. यह रकम उसे रिहाई के समय दी जाएगी. जेल में काम को तीन श्रेणियां में बांटा गया है, अकुशल, अर्ध-कुशल और कुशल, जिनकी दैनिक मजदूरी 80 रुपये से 100 रुपये तक होती है.
जेल में कैसे दिया जाता है काम
जेल के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि पहले तीन महीने कैदी को कोई काम सौंपने से पहले अलग-अलग जगहों पर लगाया जाता है. उन्होंने कहा कि इसके बाद के असाइनमेंट कैदी की दक्षता और आचरण पर निर्भर करते हैं. निचली अदालत के फैसले के बाद से संजय रॉय के वकील ने इसको हाईकोर्ट में चुनौती नहीं दी है. रॉय, जो पहले शंभुनाथ पंडित स्ट्रीट पर रहता था और उसकी आरजी कर और एनआरएस सहित कई सरकारी अस्पतालों में बिना रोक-टोक पहुंच थी क्योंकि वह अपनी सिविक वॉलंटियर की स्थिति का उपयोग करता था.

