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RBI in Action : पहले रेपो रेट बढ़ाया और अब बाजार से 25 हजार करोड़ रुपये उठाने की तैयारी में है रिजर्व बैंक. आखिर ऐसी क्या रणनीति है, जो आरबीआई ने बैंकिंग सिस्टम में पैसे डालने के बजाय, वहां से उठाने की तैयारी कर ली है. इन पैसों पर आरबीआई को ब्याज भी देना पड़ेगा. इससे आने वाले समय में फायदा होगा या नुकसान.
आरबीआई ने बाजार से सरप्लस नकदी वापस लेने का फैसला किया है.
नई दिल्ली. अभी 2 दिन ही तो बीते हैं, जब रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा की अगुवाई में मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद कर्ज महंगा गया है. अब आरबीआई ने बाजार से 25 हजार करोड़ रुपये वापस लेने का ऐलान कर दिया है. आरबीआई के इस फैसले से आपके मन में भी यह सवाल जरूर उठ रहा होगा कि आखिर रेपो रेट बढ़ाने के तत्काल बाद रिजर्व बैंक बाजार से पैसे क्यों वापस ले रहा है. इससे क्या नफा या नुकसान होने वाला है.
दरअसल, आरबीआई ने 9 अक्टूबर को ऐलान किया कि वह ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO) बिक्री के जरिये बाजार से 25 हजार करोड़ की नकदी वापस लेने जा रहा है. आरबीआई ने कहा है कि वह सरकारी प्रतिभूतियों की मदद से बैंकिंग सिस्टम में मौजूद सरप्लस नकदी को वापस लेगा, ताकि बैंकों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े. हालांकि, बाजार के जानकारों का कहना है कि इस घोषणा से बॉन्ड की कीमतों पर दबाव बढ़ेगा और सोमवार को जब प्राइमरी बाजार खुलेगा, तो यील्ड में भी बढ़त दिखेगी.
सोमवार को बढ़ जाएगी बॉन्ड यील्ड
प्राइमरी बाजार के एक डीलर ने बताया कि आरबीआई के ओएमओ ऐलान के बाद सोमवार को बॉन्ड यील्ड 4 से 5 आधार अंक बढ़ सकती है. आरबीआई यह नीलामी 13 अक्टूबर को शुरू करेगा और साल 2030 तक सरकारी प्रतिभूतियों पर 7.88 फीसदी का ब्याज देगा और 2031 तक 6.10 फीसदी, 2032 तक 7.95 फीसदी, 2033 तक 7.26 फीसदी, 2034 तक 7.10 फीसदी का ब्याज ऑफर किया जाएगा.
1 लाख करोड़ पहले भी जुटा चुका है आरबीआई
आरबीआई ने ओएमओ के जरिये पहले भी 1 लाख करोड़ रुपये जुटाए थे. सितंबर में आरबीआई ने तीन किस्तों में 1 लाख करोड़ रुपये बाजार से वापस लिया था. इसका मकसद अतिरिक्त नकदी को सोखकर बैंकिंग सिस्टम पर कैश का दबाव खत्म करना था. आरबीआई ने तब 17 सितंबर को 50 हजार करोड़, 21 सितंबर को 25 हजार करोड़ और 28 सितंबर को 25 हजार करोड़ रुपये बाजार से वापस उठाए थे. आरबीआई ने हालिया एमपीसी बैठक के बाद बताया था कि बैंकिंग सिस्टम में अभी 5.9 लाख करोड़ रुपये का सरप्लस कैश मौजूद है, जो बैंकों को कर्ज बांटने में आसानी देता है. आरबीआई ने करीब साढ़े तीन साल बाद रेपो रेट को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50 फीसदी कर दिया है, क्योंकि महंगाई अब काबू से बाहर जा रही थी.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
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