Last Updated:
Purnia DSA Ground Story: पूर्णिया का ऐतिहासिक DSA ग्राउंड 1936 में बना था. जब स्थानीय टीम ने अंग्रेजों को फुटबॉल मैच में हराया था. जीत से खुश होकर राजा कृत्यानंद सिंह ने जमीन दान की थी. यह मैदान कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों का केंद्र रहा है और आज भी युवाओं की पहली पसंद है. जानिए इस मैदान की कहानी.
पूर्णिया: बिहार का सीमांचल क्षेत्र और विशेष रूप से पूर्णिया जिला अपनी समृद्ध ऐतिहासिक धरोहरों के लिए जाना जाता है. यहां कई प्राचीन स्थल और कहानियां आज भी मौजूद हैं. जिन्हें जानकर लोग हैरान रह जाते हैं. ऐसी ही एक ऐतिहासिक धरोहर है पूर्णिया का डीएसए ग्राउंड. आजादी से पहले अंग्रेजों के जमाने में बना यह खेल मैदान न केवल ऐतिहासिक है, बल्कि इसने देश को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी दिए हैं.
नवरत्न हाता और बाड़ीहाट के मुख्य चौराहे के पास स्थित
यह ऐतिहासिक क्रिकेट मैदान पूर्णिया जिला स्कूल रोड से महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित है. नवरत्न हाता रोड और बाड़ीहाट सड़क के मुख्य चौराहे से 100 मीटर की दूरी पर स्थित यह मैदान आज भी शहरवासियों और खिलाड़ियों के बीच ‘डीएसए ग्राउंड’ के नाम से बेहद लोकप्रिय है.
अंग्रेजों से मैच जीतने पर राजा कृत्यानंद सिंह ने दान की थी जमीन
स्थानीय जानकारों और इतिहास के अनुसार, इस मैदान के बनने की कहानी बेहद दिलचस्प है. ब्रिटिश शासनकाल के दौरान 1936 में अंग्रेजों और स्थानीय पूर्णिया के खिलाड़ियों के बीच फुटबॉल मैच प्रतियोगिता रखी गई थी. इसमें शर्त थी कि यदि पूर्णिया की टीम जीतती है, तो राजा द्वारा खेल के लिए जमीन दान दी जाएगी. उस मैच में ‘मोहन बागान’ (स्थानीय टीम) ने अंग्रेजों को हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी. इस शानदार जीत और खिलाड़ियों के प्रदर्शन से खुश होकर बनैली स्टेट के खेल प्रेमी राजा स्वर्गीय कृत्यानंद सिंह ने 1936 ईस्वी में स्टेडियम निर्माण के लिए अपनी जमीन दान कर दी. इस मैदान के प्रथम अध्यक्ष के रूप में विद्वान अधिवक्ता स्वर्गीय विश्वनाथ मुखर्जी और सचिव के रूप में स्वर्गीय सतकौड़ी डे ने जिम्मेदारी संभाली थी.
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुके हैं यहां के खिलाड़ी
डीएसए क्लब के सदस्य अवनीश कुमार और जिला खेल संघ के अध्यक्ष अधिवक्ता गौतम वर्मा बताते हैं कि 1936 में राजा कृत्यानंद सिंह द्वारा दान की गई इस जमीन पर बना यह प्रांगण पूर्णिया की खेल प्रतिभाओं का केंद्र रहा है. इस मैदान पर अभ्यास करके कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है. पूर्णिया के साथ-साथ पूरे बिहार का नाम रोशन किया है.
युवाओं और नए खिलाड़ियों की पहली पसंद
शहर के बीचों-बीच स्थित होने के कारण यह ग्राउंड आज भी युवा खिलाड़ियों की पहली पसंद है. यहां रोजाना अलग-अलग खेलों के खिलाड़ी और युवा नियमित अभ्यास करते हैं. मैदान में प्रैक्टिस कर रहे युवा खिलाड़ी युवराज कुमार, नवनीत कुमार और राजीव कुमार ने बताया कि वे पिछले कई वर्षों से इसी मैदान पर क्रिकेट का अभ्यास कर रहे हैं. खिलाड़ियों का कहना है कि शहर के केंद्र में होने से यहां पहुंचना आसान है. साथ ही, मैदान पर कुशल कोच और टीम लीडर मौजूद रहते हैं, जो मार्गदर्शन देते हैं. यही वजह है कि यहां के बच्चे जिला लीग से लेकर राज्य और राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं.
About the Author
अमित रंजन वर्तमान में News18 में बिहार, झारखंड और दिल्ली से जुड़ी खबरों के समन्वय और संपादन का कार्य देख रहे हैं. खोजी पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है. राजनीति, शिक्षा, खेल, क्राईम और मौसम जैसे विषयों …
और पढ़ें

