भूकंप वार्निंग सिस्टम विकसित करने की जरूरत- पीएम
IMD की 150वीं वर्षगांठ पर दिल्ली के भारत मंडपम में एक समारोह को संबोधित हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खास अपील की। उन्होंने कहा कि मौसम की सटीक भविष्यवाणी ने चक्रवात से होने वाले नुकसान को कम किया है। पीएम मोदी ने कहा कि विज्ञान की तरक्की देश की वैश्विक प्रतिष्ठा बढ़ाती है। ऐसे में भूकंप के लिए चेतावनी प्रणाली विकसित करने की जरूरत है और वैज्ञानिकों और रिसर्चर्स को इस दिशा में काम करना चाहिए। इसका मतलब स्पष्ट है कि भूकंप वार्निंग सिस्टम बनाने की जरूरत है। वैज्ञानिकों को इस पर काम करना चाहिए।
जानिए भूकंप वार्निंग सिस्टम से क्या होगा
भूकंप वार्निंग सिस्टम, ऐसी प्रणाली है जिसमें भूकंप आने से पहले ही आपको अलर्ट मिल जाएगा। ये सिस्टम भूकंप की लहरों को पकड़कर लोगों को पहले ही सूचना भेज देते हैं, जिससे वो सुरक्षित जगह पर पहुंच सकें। ये खास तरह का सिस्टम होता है जो भूकंप की लहरों को पहले भांप लेता है। ऐसा इसलिए क्योंकि ये लहरें काफी तेजी से चलती हैं। इसके बाद, सेंसर इस जानकारी को प्रोसेसिंग सेंटर भेजते हैं। इससे भूकंप की लोकेशन, तीव्रता और गहराई का अंदाजा लगाया जाता है।
जानिए ये सिस्टम कैसे करेगा काम
इस सिस्टम की खास बात है कि अगर कहीं काफी अधिक तीव्रता का भूकंप आने के आसार होते हैं तो अलर्ट भेज दिया जाता है। ये अलर्ट उन इलाकों में भेजा जाता है जहां भूकंप का असर ज्यादा होने की संभावना होती है। इस सिस्टम से सबसे बड़ा फायदा ये है कि लोग खुद को ड्रॉप, कवर जैसी सुरक्षा की तैयारी करने का समय मिल जाता है। इसके अलावा, कुछ जरूरी काम अपने आप भी शुरू हो जाते हैं, जैसे बिजली और गैस सप्लाई बंद करना।
भूकंप वार्निंग सिस्टम से बच सकती हैं कई जानें
भूकंप वार्निंग सिस्टम डेवलप होने से सोचिए कितना फायदा मिल सकता है। जैसे कि अगर कहीं भूकंप आने वाला है उससे कुछ समय पहले ही उस क्षेत्र के लोगों को पता चल जाए, तो वो अलर्ट हो जाएंगे। इससे कितनी ही जानें बचाई जा सकती हैं। ये भूकंप वार्निंग सिस्टम का ही कमाल है। ये सिस्टम भूकंप के खतरे से निपटने में बड़ी मदद कर सकता है। हमें सुरक्षित रख सकता है।
IMD के पूर्वानुमान का जिक्र कर पीएम ने कही ये बात
पीएम मोदी ने कहा कि IMD के पूर्वानुमान जितने सटीक होंगे, उनका महत्व उतना ही बढ़ेगा। मौसम विज्ञान की तरक्की से भारत की आपदा प्रबंधन क्षमता में सुधार हुआ है। इससे भारत के साथ-साथ दुनिया के अन्य देशों को भी फायदा हुआ है। उन्होंने कहा कि आज, हमारी बाढ़ गाइडेंस सिस्टम नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका सहित पड़ोसी देशों को भी सूचनाएं दे रही है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत आपदा के समय अपने पड़ोसी देशों की मदद के लिए सबसे पहले आगे आता है।
प्राचीन ग्रंथों में भी मिलती थी मौसम की जानकारी
प्रधानमंत्री ने भारत के प्राचीन ग्रंथों का जिक्र किया और कहा कि वेदों, संहिताओं और सूर्य सिद्धांत जैसे ग्रंथों में मौसम विज्ञान पर काफी जानकारी है। तमिलनाडु के संगम साहित्य और उत्तर भारत के घाघ भड्डरी के लोक साहित्य में भी मौसम की जानकारी मिलती है। कृषि पाराशर, पाराशर रूचि और वृहत संहिता जैसे ग्रंथों में बादलों के प्रकार और उनके बनने की प्रक्रिया के बारे में बताया गया है। ‘प्री-मॉडर्न कच्छी नैवीगेशन टेक्निक्स एंड वॉयेज’ पुस्तक में गुजरात के नाविकों के समुद्री ज्ञान का वर्णन है।

