रिपोर्ट के मुताबिक रिलायंस ने सेना की कार्रवाई के कुछ घंटे बाद ऑपरेशन सिंदूर ट्रेडमार्क के लिए आवेदन किया। इसके बाद तीन और लोगों ने भी ऑपरेशन सिंदूर नाम के ट्रेडमार्क के लिए एप्लीकेशन दिए। ये सभी आवेदक क्लास 41 के तहत ऑपरेशन सिंदूर के लिए एक्सक्लूसिव राइट्स चाहते हैं। क्लास 41 में मनोरंजन, शिक्षा, सांस्कृतिक और मीडिया सेवाएं शामिल हैं। ये चार आवेदन 7 मई को सुबह 10:42 बजे से शाम 6:27 बजे के बीच फाइल किए गए। आवेदकों में रिलायंस के अलावा मुंबई के रहने वाले मुकेश चेतराम अग्रवाल, रिटायर्ड इंडियन एयर फोर्स ऑफिसर ग्रुप कैप्टन कमल सिंह ओबर और दिल्ली के वकील आलोक कोठारी शामिल हैं।
ऑपरेशन सिंदूर
पहलगाम में 22 अप्रैल को आतंकवादियों ने 26 लोगों को हत्या कर दी थी। इसका बदला लेने के लिए भारतीय ‘ऑपरेशन सिंदूर‘ चलाया। इस नाम ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा। भारतीय संस्कृति में ‘सिंदूर’ बलिदान और वीरता का प्रतीक है। यही वजह है कि यह नाम बहुत जल्दी फेमस हो गया। इस नाम में इमोशन और देशभक्ति की भावना जुड़ी हुई है। इसलिए फिल्म, मीडिया और पब्लिक में इसका इस्तेमाल करने की होड़ मची है। सभी आवेदन क्लास 41 के तहत रजिस्टर किए गए हैं।
यह कैटेगरी OTT प्लेटफॉर्म, प्रोडक्शन हाउस, ब्रॉडकास्टर और इवेंट कंपनियां इस्तेमाल करती हैं। इससे पता चलता है कि ऑपरेशन सिंदूर जल्द ही किसी फिल्म का टाइटल, वेब सीरीज या डॉक्यूमेंट्री ब्रांड बन सकता है। इंडियन ट्रेडमार्क लॉ में यह जरूरी नहीं है कि पहला एप्लीकेशन फाइल करने वाले को ही राइट्स मिलेंगे। फाइलिंग की तारीख जरूरी है, लेकिन रजिस्ट्रार दूसरी चीजों पर भी ध्यान देता है।

