राजनीतिक विरासत बनी रोड़ा
अरविंद केजरीवाल को हराने वाले प्रवेश वर्मा का नाम मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे चल रहा था, लेकिन प्रवेश वर्मा की राजनीतिक विरासत ही उनके सीएम पद की राह में रोड़ा बन गया। प्रवेश वर्मा एक प्रमुख दिल्ली राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं। वह पूर्व बीजेपी नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे हैं। उनके चाचा आजाद सिंह ने उत्तर दिल्ली नगर निगम के महापौर के रूप में कार्य किया और 2013 विधानसभा चुनाव में मुंडका सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा था। बीजेपी के इतिहास में आज तक ऐसा कोई भी शख्स सीएम नहीं बना है, जिसके माता या पिता पहले सीएम रह चुके हैं। बीजेपी ने प्रवेश वर्मा को सीएम ना बनाकर परिवारिक राजनीति के आरोप से बचना मुनासिब समझा। बीजेपी ने रेखा गुप्ता को सीएम बनाकर संदेश दिया है कि व्यक्ति नहीं, पार्टी महत्वपूर्ण है।
कट्टर नेता की छवि
प्रवेश वर्मा की छवि दिल्ली में एक कट्टर हिंदू नेता के तौर पर है। प्रवेश वर्मा मुसलमानों के खिलाफ बयानबाजी करते आए हैं। ऐसे में बीजेपी प्रवेश वर्मा को दिल्ली का सीएम बनाकर मुसलमानों से दूरियां नहीं बनाना चाहती थी। दरअसल बीजेपी को महिलाओं ने सबसे ज्यादा वोट दिया है। जिसमें मुस्लिम महिलाओं का वोट भी शामिल है।
महिलाओं पर बीजेपी का फोकस
दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी का फोकस सबसे ज्यादा महिलाओं पर था। बीजेपी ने महिलाओं के लिए कई योजनाओं की घोषणाएं की थी। महिलाओं ने भी बीजेपी को खुलकर वोट किया। दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने कुल 48 सीटें जीतीं है। इसमें पार्टी को कुल 45.56 प्रतिशत वोट मिला है। ऐसे में बीजेपी ने दिल्ली को महिला मुख्यमंत्री देकर देश की आबादी को बड़ा संदेश दिया है।

