बिहार विधानसभा चुनाव नवंबर 2025 में होने हैं और उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव 2027 में होने हैं. दोनों जगहों पर बीजेपी यादव जाति को साधने में लगी है. बिहार में अगर लालू यादव के वोट बैंक में बीजेपी सेंध लगा लेती है तो यूपी में 2027 के चुनाव में एक नरेटिव सेट हो जाएगा. इससे अखिलेश यादव के पिछड़ा, दलित और मुस्लिम वोट बैंक में बड़ा डेंट लग सकता है. ऐसे में नए अध्यक्ष का चयन न केवल बीजेपी की रणनीति को दिशा देगा, बल्कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ तालमेल और संघ की विचारधारा के प्रति समर्पण पर भी निर्भर करेगा.
जेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए भूपेंद्र यादव, शिवराज सिंह चौहान, धर्मेंद्र प्रधान तीन दावेदार उभरकर आए हैं.
तीन दावेदार, लेकिन किसका दावा सबसे मजबूत?
भूपेंद्र, शिवराज या फिर धर्मेंद्र?
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को संघ का पसंदीदा चेहरा माना जाता है. मध्य भारत में मजबूत पकड़ उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाती है. सूत्रों के अनुसार, संघ ने पहले भी उन्हें अध्यक्ष पद के लिए प्रस्तावित किया था, लेकिन मोदी ने उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया. बिहार और उत्तर प्रदेश में उनकी स्वीकार्यता और सामाजिक समीकरणों को संतुलित करने की क्षमता उनके पक्ष में है.
नवंबर 2025 में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव और 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव बीजेपी के लिए अहम हैं.
यूपी-बिहार चुनाव का कनेक्शन
नवंबर 2025 में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव और 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव बीजेपी के लिए अहम हैं. बिहार में महागठबंधन के खिलाफ बीजेपी को मजबूत रणनीति चाहिए और उत्तर प्रदेश में 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद संगठन को फिर से मजबूत करना जरूरी है. नए अध्यक्ष को इन राज्यों में सामाजिक समीकरणों को साधने और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की जिम्मेदारी होगी. भूपेंद्र यादव का बिहार में पहले का अनुभव और शिवराज की हिंदी पट्टी में लोकप्रियता उन्हें इन राज्यों के लिए उपयुक्त बनाती है.
सूत्रों के अनुसार, पीएम मोदी की जुलाई के दूसरे सप्ताह में विदेश यात्रा से वापसी के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष की घोषणा हो सकती है. पार्टी और संघ के बीच सहमति बनने के बाद यह फैसला हिंदू नववर्ष के पहले महीने, अप्रैल 2026 तक टल भी सकता है. नए अध्यक्ष के सामने 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी और डिलिमिटेशन जैसे मुद्दों को संभालने की चुनौती होगी. बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन पार्टी के भविष्य और आगामी चुनावों के लिए निर्णायक होगा. भूपेंद्र यादव, शिवराज सिंह चौहान और धर्मेंद्र प्रधान में से किसी एक का नाम अंतिम रूप से सामने आने की संभावना है, जिसमें भूपेंद्र यादव का पलड़ा सबसे भारी दिख रहा है.

