NCERT Class 9 Textbook: NCERT की कक्षा 9 की नई सोशल साइंस की किताब में मध्यकालीन भारत के इतिहास को एक नए तरीके से पेश किया गया है. इसमें उन शासकों और लोगों के संघर्ष और प्रतिरोध को प्रमुखता दी गई है जिन्होंने अलग-अलग दौर में भारत पर हुए आक्रमणों और विजय के प्रयासों का सामना किया.किताब में 1178 में माउंट आबू के पास रानी नायकी देवी द्वारा मुहम्मद गोरी को हराने की घटना का भी जिक्र किया गया है.
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक नई किताब में केवल संघर्ष और युद्ध की घटनाओं पर ही जोर नहीं है. इसमें अलग-अलग धर्मों और समुदायों के बीच सहयोग की घटनाओं को भी जगह दी गई है. इसके साथ ही पाठ्यक्रम में भारत की परंपराओं को आज की शासन व्यवस्था से जोड़ने की कोशिश की गई है. छात्रों को टैक्स, इंश्योरेंस, निवेश और उद्यमिता जैसे विषयों की व्यावहारिक जानकारी भी दी जा रही है.
छह अध्यायों में इतिहास से अर्थशास्त्र तक की पढ़ाई
नई किताब का नाम ‘Understanding Society: India and Beyond’ है. इसका नया Part 2 छह अध्यायों का है. इसमें इतिहास, भूगोल, राजनीतिक विज्ञान और अर्थशास्त्र को शामिल किया गया है.यह बदलाव पुराने पाठ्यक्रम में किए जा रहे व्यापक बदलाव का हिस्सा है. पुराने सिलेबस में कक्षा 9 की इतिहास की पढ़ाई की शुरुआत फ्रांसीसी क्रांति से होती थी. वहीं अर्थशास्त्र में गांवों में उत्पादन, गरीबी और खाद्य सुरक्षा जैसे विषयों पर ज्यादा ध्यान दिया जाता था.नई किताब नेशनल कैरीकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन 2023 के अनुसार तैयार की गई है.इसमें भूगोल के हिस्से में Oceans and Life और Life on Earth जैसे अध्याय शामिल हैं.
मध्यकालीन इतिहास में प्रतिरोध को दी गई प्रमुख जगह
नई किताब के इतिहास वाले हिस्से में ‘Resistance and Resilience (1000–1700 CE)’ शीर्षक के तहत 1000 से 1700 ईस्वी के बीच भारत में हुए संघर्ष और प्रतिरोध को प्रमुखता दी गई है.
इसमें महाराणा प्रताप के प्रतिरोध, लचित बरफुकन की सरायघाट की जीत और मुगल उत्पीड़न के खिलाफ सिखों के विरोध का उल्लेख किया गया है.इतिहास की इस कहानी को केवल मुस्लिम शासकों के खिलाफ हुए संघर्ष तक सीमित नहीं रखा गया है. इसमें रानी अब्बक्का चौटा के पुर्तगालियों के खिलाफ प्रतिरोध को भी शामिल किया गया है. इससे किताब में मध्यकालीन भारत के अलग-अलग तरह के संघर्षों को जगह मिलती है.किताब में मंदिरों के विनाश और उनके दोबारा निर्माण का भी जिक्र है. इसके साथ ही यह बताया गया है कि व्यापार और भक्ति परंपराओं ने समुदायों को बनाए रखने और उनके बीच जुड़ाव कायम रखने में किस तरह भूमिका निभाई.
किताब में संघर्ष के साथ सहयोग का भी जिक्र
नई किताब में मध्यकालीन भारत को केवल संघर्षों के दौर के रूप में नहीं दिखाया गया है. इसमें अलग-अलग समुदायों के बीच सहयोग और मेल-जोल को भी जगह दी गई है.किताब में अकबर के शासन के बाद के दौर को अपेक्षाकृत समावेशी बताया गया है. इसके अलावा सूफी परंपरा पर भी ध्यान दिया गया है.भक्ति परंपरा से जुड़े योगदान के संदर्भ में मुस्लिम कवियों रसखान और रहीम का भी उल्लेख किया गया है. किताब मध्यकालीन दौर को संघर्ष और सहयोग, दोनों का समय बताती है यानी छात्रों को इतिहास को केवल युद्ध और सत्ता संघर्ष के नजरिए से देखने के बजाय उस दौर में मौजूद सामाजिक और सांस्कृतिक मेल-जोल को भी समझने का अवसर मिलेगा.
शासन व्यवस्था को आज के संदर्भ से जोड़ने की कोशिश
नई किताब में इतिहास के साथ-साथ शासन और सार्वजनिक नीतियों को भी भारत की परंपराओं से जोड़कर समझाया गया है.इसमें महात्मा गांधी की रामराज्य की अवधारणा का जिक्र किया गया है. साथ ही सेंगोल के चोल संबंधों और प्राचीन स्रोतों में मिलने वाले संस्थागत आदर्श वाक्यों के बारे में भी बताया गया है.किताब में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को नीतियां बनाने के एक उदाहरण के तौर पर पेश किया गया है. इसे परामर्श, विशेषज्ञों की सलाह और जनता की भागीदारी के जरिए नीति बनाने का ‘एक उत्कृष्ट उदाहरण’ बताया गया है.
छात्रों को बताया जाएगा: शासन में उनकी भूमिका
नई किताब में केवल सरकार और शासन व्यवस्था की जानकारी देने तक बात सीमित नहीं है. छात्रों को यह समझाने की कोशिश की गई है कि शासन व्यवस्था में नागरिकों की भी भूमिका होती है.इसमें सरकारी पद के दुरुपयोग और लोगों को सरकारी सेवाओं तक समान पहुंच नहीं मिलने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की गई है.वहीं Khelo Bharat Niti 2025 को सरकारों, संस्थानों और नागरिकों के बीच समन्वय के उदाहरण के रूप में शामिल किया गया है.छात्रों को शासन व्यवस्था में अपनी भूमिका के बारे में सोचने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है.इसमें अपनी प्रतिक्रिया देना और सार्वजनिक अधिकारियों से जवाबदेही की मांग करना भी शामिल है.
अब अर्थशास्त्र की पढ़ाई भी ज्यादा प्रैक्टिकल होगी
नई किताब में अर्थशास्त्र को भी रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़ने की कोशिश की गई है. छात्रों को केवल आर्थिक अवधारणाएं पढ़ाने के बजाय उन्हें वास्तविक जीवन में इस्तेमाल होने वाली चीजों को समझने का मौका दिया जाएगा.छात्र इनकम टैक्स स्लैब को समझेंगे. इसके अलावा उधार लेने और निवेश से जुड़े जोखिमों को भी जानेंगे.किताब में हेल्थ इंश्योरेंस को समझाने के लिए आयुष्मान भारत का उदाहरण दिया गया है. वहीं उद्यमिता को विकसित भारत 2047 से जोड़ा गया है.इस तरह छात्रों को यह समझाने की कोशिश की गई है कि अर्थव्यवस्था और वित्त से जुड़े फैसले उनकी रोजमर्रा की जिंदगी से किस तरह जुड़े होते हैं.
लिज्जत पापड़ और ओबेरॉय से समझेंगे बिजनेस
उद्यमिता को समझाने के लिए किताब में वास्तविक कारोबारी उदाहरण भी दिए गए हैं.इसमें लिज्जत पापड और होटल कारोबारी मोहन सिंह ओबेरॉय के उदाहरण को बिजनेस केस स्टडी के तौर पर शामिल किया गया है.इन उदाहरणों के जरिए छात्रों को बिजनेस शुरू करने, उसे आगे बढ़ाने और उद्यमिता से जुड़ी सोच को समझने का अवसर मिलेगा.किताब के अभ्यासों में छात्रों से अपने घर के बजट का अध्ययन करने के लिए कहा गया है. इसके अलावा उन्हें टैक्स रिटर्न भरने की प्रक्रिया पर रिसर्च करने और अपना बिजनेस प्लान तैयार करने जैसे काम भी दिए गए हैं. किताब में टैक्स देना नागरिक जिम्मेदारी के रूप में भी प्रस्तुत किया गया है.
पुराने प्लान में किए गए दो बड़े बदलाव
किताब के परिचय में पुराने पाठ्यक्रम की योजना में किए गए दो प्रमुख बदलावों का भी स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है.पहला बदलाव यह है कि Authority की जगह Governance and Public Policy को शामिल किया गया है.दूसरा बदलाव ‘India and the World-I’ को कक्षा 9 से हटाकर कक्षा 10 में ले जाना है.NCERT के अनुसार इन बदलावों का उद्देश्य पढ़ाई को ज्यादा सुसंगत, उम्र के हिसाब से उपयुक्त और छात्रों के जीवन से जुड़ा बनाना है.इस तरह कक्षा 9 की नई सोशल साइंस किताब में इतिहास और समाज को समझाने के साथ-साथ शासन, नागरिक जिम्मेदारी, टैक्स, इंश्योरेंस, निवेश और उद्यमिता जैसे विषयों को भी पढ़ाई का हिस्सा बनाया गया है. NCERT के नए पाठ्यक्रम में पारंपरिक इतिहास, वर्तमान शासन व्यवस्था और रोजमर्रा की आर्थिक जरूरतों के बीच संबंध समझाने पर खास ध्यान दिया गया है.

