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मध्य प्रदेश के खंडवा में एक ऐसा शिवधाम है, जो सिर्फ भक्ति ही नहीं बल्कि अपने चमत्कार और रहस्य के लिए भी जाना जाता है. शहर के रामगंज-बुधवारा इलाके में स्थित श्री तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर करीब 500 साल पुराना बताया जाता है. यहां का शिवलिंग अपने आप में अनोखी मान्यता रखता है.
सावन का महीना शुरू होते ही देशभर में भोलेनाथ के मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ता है, लेकिन मध्य प्रदेश के खंडवा में एक ऐसा शिवधाम है, जो सिर्फ भक्ति ही नहीं बल्कि अपने चमत्कार और रहस्य के लिए भी जाना जाता है. शहर के रामगंज-बुधवारा इलाके में स्थित श्री तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर करीब 500 साल पुराना बताया जाता है. यहां का शिवलिंग अपने आप में अनोखी मान्यता रखता है.इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां स्थापित शिवलिंग को स्वयंभू माना जाता है, यानी यह धरती से खुद प्रकट हुआ है. स्थानीय लोगों और मंदिर से जुड़े पुजारी परिवार का कहना है कि यह कोई साधारण शिवलिंग नहीं, बल्कि ऐसा चमत्कारी स्वरूप है जो हर साल थोड़ा-थोड़ा बढ़ता है. मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन शिवलिंग में तिल के दाने जितनी वृद्धि होती है, और यही वजह है कि इसका नाम “तिलभांडेश्वर महादेव” पड़ा.
मंदिर से जुड़ी यह परंपरा कोई नई नहीं है. यहां सेवा कर रहे पुजारी पंडित ओमप्रकाश योगी बताते हैं कि उनके परिवार की करीब 16 पीढ़ियां इस मंदिर से जुड़ी रही हैं और हर पीढ़ी ने इस बदलाव को महसूस किया है. उनके मुताबिक, “हमारे पूर्वजों ने भी शिवलिंग को बढ़ते देखा. हम भी हर साल इस बदलाव के साक्षी बनते हैं. यह आस्था का विषय है, जिसे शब्दों में पूरी तरह समझाना आसान नहीं है.मंदिर की बनावट भी इसे खास बनाती है. ऊपर से देखने पर यह एक सामान्य मंदिर जैसा लगता है, लेकिन असली दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को सीढ़ियों से नीचे उतरना पड़ता है. नीचे पहुंचते ही माहौल बिल्कुल बदल जाता है—ऐसा लगता है जैसे किसी प्राचीन गुफा में भगवान शिव विराजमान हों. यह अनुभव श्रद्धालुओं को एक अलग ही आध्यात्मिक एहसास कराता है.
महादेव मंदिर 500 साल पुराना शिवधाम
सावन के महीने में इस मंदिर की रौनक और भी बढ़ जाती है. दूर-दूर से भक्त यहां पहुंचते हैं और नर्मदा जल व गंगाजल से जलाभिषेक करते हैं. मंदिर में सुबह से लेकर देर रात तक “हर हर महादेव” और “बम बम भोले” के जयकारे गूंजते रहते हैं. यहां की पूजा-पद्धति सिर्फ एक रिवाज नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही आस्था की परंपरा है, जिसे आज भी उतनी ही श्रद्धा से निभाया जा रहा है.आज के दौर में जहां हर चीज को विज्ञान के नजरिए से देखा जाता है, वहीं खंडवा का यह तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर एक ऐसा स्थान है, जहां आस्था और रहस्य एक साथ दिखाई देते हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु सिर्फ दर्शन ही नहीं करते, बल्कि एक ऐसे अनुभव को महसूस करते हैं जिसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं.अगर आप भी इस सावन में भोलेनाथ के किसी खास और चमत्कारी धाम के दर्शन करना चाहते हैं, तो खंडवा का यह प्राचीन मंदिर आपके लिए एक अलग ही अनुभव साबित हो सकता है.जहां हर साल बढ़ता शिवलिंग आज भी लोगों की आस्था को और मजबूत कर रहा है.

