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Mobile Manufacturing Scheme : देश में मोबाइल के उत्पादन, निर्यात और इस सेक्टर में रोजगार बढ़ाने के लिए सरकार ने 62,500 करोड़ की नई योजना शुरू की है. इस योजना का मकसद देसी मोबाइल कंपनियों को बढ़ावा देना और उनके लिए ग्लोबल मार्केट के रास्ते खोलने के साथ ही देश के मोबाइल उत्पादन को बढ़ाना है.
मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम से भारतीय ब्रांड को फायदा होगा.
नई दिल्ली. भारत में मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने Mobile Phone Manufacturing Scheme (MPMS) का ऐलान किया है. इस योजना का कुल बजट 62,500 करोड़ रुपये रखा गया है और इसकी अवधि वित् वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच साल के लिए होगी. खास बात ये है कि इस योजना में देसी मोबाइल ब्रांड को बढ़ावा देने के लिए अलग रणनीति बनाई गई है. सरकार का मकसद देसी मोबाइल कंपनियों को ग्लोबल मार्केट तक पहुंचाना है.
योजना के पीछे सरकार का लक्ष्य मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाना, उत्पादन का पैमाना बढ़ाना, घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करना और भारतीय मोबाइल ब्रांड्स को वैश्विक बाजार तक पहुंचाना है. योजना में दो प्रमुख हिस्से होंगे. पहला, मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहन देना और दूसरा भारतीय मोबाइल ब्रांड्स को सपोर्ट करना. इसका मतलब है कि विदेशी कंपनियों को भारत में विनिर्माण के लिए प्रोत्साहन देने के साथ ही भारतीय मोबाइल कंपनियों को बढ़ावा देन के लिए योजना में अलग से कदम उठाए जाएंगे.
भारतीय ब्रांड्स को 5% तक इंसेंटिव
MPMS के तहत कंपनियों को 2.25% से 5% तक अलग-अलग दरों पर इंसेंटिव दिया जाएगा. भारतीय ब्रांड्स के लिए इंसेंटिव की दर 5% रखी गई है. इसके अलावा प्रमुख कंपोनेंट्स और सब-असेंबली की घरेलू खरीद पर 1.5% तक अतिरिक्त इंसेंटिव और भारतीय ब्रांड्स के लिए इंडियन डिजाइन और R&D पर 3% अतिरिक्त इंसेंटिव का प्रावधान किया गया है. घरेलू स्तर पर डिस्प्ले मॉड्यूल, कैमरा मॉड्यूल, बैक कवर और चेसिस, बैटरी सेल और USB केबल/चार्जर की सोर्सिंग पर अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा.
5 साल में 39 लाख करोड़ रुपये के उत्पादन का लक्ष्य
सरकार को उम्मीद है कि MPMS की अवधि में मोबाइल उत्पादन का कुल मूल्य करीब 39 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. इस स्कीम के बलबूते ही देश के मोबाइल निर्यात को करीब 15 लाख करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है. योजना से मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग और इससे जुड़े क्षेत्रों में करीब 60,000 प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है. इसका मतलब है कि उत्पादन और रोजगार के साथ ही निर्यात के मोर्चे पर भी भारत को बढ़त मिलेगी. यह योजना एकसाथ तीन मोर्चे पर सफलता दिलाने में कारगर होगी.
मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में बड़ा उछाल
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2014 से 2026 के बीच भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन करीब 7 गुना, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 11 गुना और मोबाइल उत्पादन 33 गुना बढ़ा है. मोबाइल निर्यात में करीब 166 गुना की वृद्धि दर्ज की गई है. भारत अब वॉल्यूम के लिहाज से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है और देश में इस्तेमाल हो रहे करीब 99.2% मोबाइल फोन भारत में ही बने हैं. इलेक्ट्रॉनिक्स अब भारत की तीसरी सबसे बड़ी एक्सपोर्ट कैटेगरी बन चुकी है. 2014-15 में कुल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में इसकी हिस्सेदारी करीब 1.7% थी, जो 2025-26 में बढ़कर करीब 11% हो गई है. सरकार के मुताबिक मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग के विस्तार से स्मार्ट स्पीकर, TWS ईयरबड्स, लैपटॉप, ड्रोन, स्मार्टवॉच, मेडिकल डिवाइस, EV मॉड्यूल और ऑटोमोबाइल कैमरा जैसे कई दूसरे सेक्टरों में भी टेक्नोलॉजी और स्किल ट्रांसफर को बढ़ावा मिलेगा.
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आज तक से टीवी पत्रकारिता शुरू करने वाली प्रियंका कांडपाल को अब तक तकरीबन 11 साल का अनुभव है. तकरीबन चार साल आज तक में रिपोर्टिंग के साथ एंकरिंग भी कर चुकी हैं. उसके बाद इंडिया टीवी में पांच साल तक काम किया. 201…
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