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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने CJI सूर्यकांत को लिखी चिट्ठियों में प्रशासनिक शक्तियों के कथित दुरुपयोग और केस लिस्टिंग में हेरफेर का मुद्दा उठाया. जस्टिस शर्मा पर अन्य नियुक्तियों और प्रशासनिक फैसलों को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं. हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. CJI सूर्यकांत ने कहा है कि आरोप अपने आप में किसी जज के खिलाफ निष्कर्ष नहीं हैं. जस्टिस शर्मा को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिलेगा और फैसला तय संस्थागत प्रक्रिया के तहत होगा. तो आइए इस खबर में जानते हैं जस्टिस एसपी के बारे में डिटेल में.
राजस्थान HC के कार्यवाहक चीफ जस्टिस एसपी शर्मा पर जस्टिस संदीप मेहता ने गंभीर आरोप लगाए हैं. (फाइल फोटो)
राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के भीतर उठे सवाल अब सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गए हैं. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने CJI सूर्यकांत को तीन अलग-अलग चिट्ठियां लिखकर जस्टिस शर्मा के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं. इन पत्रों में प्रशासनिक शक्तियों के कथित दुरुपयोग से लेकर केस लिस्टिंग में हेरफेर तक के आरोप हैं. मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि जस्टिस शर्मा अगले महीने रिटायर होने वाले हैं. ऐसे में सवाल सिर्फ आरोपों का नहीं है. सवाल यह भी है कि एक मौजूदा हाईकोर्ट जज के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के ही जज की शिकायत पर संस्थागत स्तर पर क्या कार्रवाई होती है. CJI सूर्यकांत ने फिलहाल साफ कर दिया है कि आरोप अपने आप में किसी जज को दोषी नहीं बना देते और मामले को तय संस्थागत प्रक्रिया के तहत ही देखा जाएगा.
जस्टिस मेहता ने 2, 10 और 17 अगस्त को लिखी चिट्ठियों में जस्टिस शर्मा के कामकाज को लेकर कई चिंताएं जताईं. उन्होंने दावा किया कि राजस्थान हाईकोर्ट के कुछ जजों ने उनसे मुलाकात के दौरान जस्टिस शर्मा के व्यवहार को लेकर अपनी नाराजगी और चिंता जाहिर की थी. आरोपों में साथी जजों को ट्रांसफर जैसी कार्रवाई की कथित धमकी देने और CJI से करीबी का दावा करने जैसी बातें भी शामिल हैं. एक शिकायत में हाईकोर्ट में नियुक्तियों और केस लिस्टिंग से जुड़े फैसलों पर भी सवाल उठाए गए हैं. हालांकि ये सभी आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है. खुद CJI ने भी इसी बात पर जोर दिया है कि जस्टिस शर्मा को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका मिलना चाहिए.
आरोपों से लेकर CJI के स्टैंड तक, जानिए पूरा मामला
- सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने अपनी चिट्ठियों में जस्टिस शर्मा पर गंभीर प्रशासनिक आरोप लगाए हैं. इनमें कथित तौर पर प्रभावशाली मुकदमेबाजों को फायदा पहुंचाने के लिए केसों की लिस्टिंग प्रभावित करने की बात भी शामिल है. जस्टिस मेहता ने अपने पत्रों में राजस्थान हाईकोर्ट के कुछ जजों की ओर से कथित तौर पर व्यक्त की गई चिंताओं का भी उल्लेख किया है. इसके अलावा एक शिकायत में जस्टिस शर्मा पर अपने करीबी लोगों को स्थायी लोक अदालतों में नियुक्त कराने और चार महिला वकीलों के नाम हाईकोर्ट में पदोन्नति के लिए आगे बढ़ाने से जुड़े आरोप लगाए गए हैं. इन शिकायतों की सच्चाई का फैसला जांच और संस्थागत प्रक्रिया के बाद ही हो सकता है.
- एक अन्य मुद्दा उदयपुर की जमीन से जुड़े मामलों की लिस्टिंग का है. जस्टिस मेहता ने आरोप लगाया कि कुछ अपीलों को जयपुर पीठ के सामने सूचीबद्ध किया गया, जबकि जस्टिस शर्मा के ही एक पुराने फैसले में ऐसे मामलों को जोधपुर से जयपुर स्थानांतरित नहीं किए जाने की बात कही गई थी. जस्टिस मेहता ने इसे प्रशासनिक स्तर पर गंभीर विसंगति के तौर पर पेश किया. उन्होंने यह भी कहा कि जस्टिस शर्मा के खिलाफ उठे सवालों को देखते हुए राजस्थान हाईकोर्ट की अगुवाई के लिए किसी दूसरे राज्य से मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जाना संस्थान के हित में होगा.
जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा कौन हैं?
जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के पास बीएससी और एलएलबी की डिग्री है. उन्हें नवंबर 2016 में राजस्थान हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था. साल 2022 में उनका ट्रांसफर पटना हाईकोर्ट कर दिया गया. स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए राजस्थान वापसी का अनुरोध किया गया था, लेकिन तत्कालीन CJI डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने मार्च 2023 में उस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया. इसके बाद उन्हें पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट भेजा गया. मई 2025 में कॉलेजियम के नए प्रस्ताव के बाद राजस्थान वापसी की सिफारिश की गई. बाद में वह राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस बने. वह सितंबर 2025 से इस पद पर हैं और अगले महीने सेवानिवृत्त होने वाले हैं.
जजों की शिकायतों का भी चिट्ठियों में जिक्र
जस्टिस मेहता के अनुसार राजस्थान दौरे के दौरान हाईकोर्ट के कई जजों ने उनसे जस्टिस शर्मा के आचरण को लेकर अपनी चिंता साझा की. उनके पत्रों में आरोप है कि जस्टिस शर्मा कथित तौर पर साथी जजों को ट्रांसफर जैसी कार्रवाई की चेतावनी देते थे और CJI के साथ अपनी निकटता का हवाला देते थे. इसके अलावा जस्टिस उमाशंकर व्यास से जुड़ी शिकायत का भी उल्लेख किया गया है. इसमें जस्टिस शर्मा पर कथित प्रतिशोधात्मक रवैये का आरोप लगाया गया था. एक अन्य शिकायत में जोधपुर में नए कोर्ट भवन के उद्घाटन में कथित देरी को लेकर भी सवाल उठाए गए.
महिला वकीलों और लोक अदालत नियुक्तियों पर क्या आरोप?
एक वकील की शिकायत का जिक्र करते हुए जस्टिस मेहता ने कथित तौर पर कहा कि जस्टिस शर्मा ने जयपुर और अजमेर में स्थायी लोक अदालतों में अपने करीबी लोगों की नियुक्ति के लिए प्रभाव का इस्तेमाल किया. शिकायत में एक कथित बचपन के दोस्त और दो जिला जजों के जीवनसाथियों की नियुक्ति का आरोप लगाया गया. चार महिला वकीलों के नाम हाईकोर्ट में पदोन्नति के लिए भेजने पर भी सवाल उठाया गया. शिकायतकर्ता का दावा था कि ये वकील सक्रिय प्रैक्टिस में नहीं थीं और उनके संबंध वरिष्ठ वकीलों या रिटायर्ड जज से थे. इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है.
CJI सूर्यकांत ने क्या कहा?
विवाद के बीच CJI सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम पहले से ही उन हाईकोर्टों में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर काम कर रहा है, जहां पद खाली हैं या बदलाव की जरूरत है. उन्होंने जस्टिस मेहता की ओर से उठाई गई चिंताओं का संज्ञान लिए जाने की बात कही. हालांकि CJI ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी मौजूदा जज के खिलाफ लगाए गए आरोपों का फैसला सार्वजनिक मंच पर नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि जस्टिस शर्मा को अपना जवाब रखने का उचित अवसर मिलना चाहिए.
‘आरोप लगना दोष साबित होना नहीं’
CJI सूर्यकांत ने इस मामले में प्रक्रिया की अहमियत पर जोर दिया. उन्होंने कहा, ‘आरोप लगाए जाने का तथ्य अपने आप में जज के खिलाफ निष्कर्ष नहीं माना जा सकता.’ उनके मुताबिक जस्टिस मेहता की ओर से रखी गई सामग्री और जस्टिस शर्मा का जवाब, दोनों को उचित संस्थागत स्तर पर देखा जाएगा. जस्टिस शर्मा के पद पर बने रहने, उनके तबादले या किसी अन्य प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर फैसला सक्षम संस्थागत प्राधिकारी ही सामग्री पर विचार करने के बाद करेगा. यानी फिलहाल मामला आरोप और जवाब के चरण में है. किसी आरोप को अंतिम निष्कर्ष मानना जल्दबाजी होगी.
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सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…
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