नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) का किला ढहने और देश की राजधानी दिल्ली में पार्टी के 20 लोकसभा सांसदों द्वारा बगावत का बिगुल फूंकने के बाद ममता बनर्जी के राजनीतिक करियर पर काले बादल मंडरा रहे हैं. संसद में दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए दो-तिहाई का आंकड़ा जुटा चुके बागी सांसदों के रुख से घबराईं ममता बनर्जी इस समय दिल्ली में चौतरफा डैमेज कंट्रोल में जुटी हैं. सोमवार को कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक के दौरान सोनिया गांधी से गले मिलने और राहुल गांधी से गर्मजोशी से हाथ मिलाने के ठीक 24 घंटे के भीतर एक और बहुत बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है.
मंगलवार को टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी सीधे कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी के आधिकारिक आवास, 10 जनपथ (10 Janpath) पहुंच गईं. इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात ने देश की राजनीति में हलचल तेज कर दी है क्योंकि 24 घंटे के भीतर दोनों नेताओं की यह दूसरी मुलाकात है.
कितने साल बाद 10 जनपथ की दहलीज पर ममता बनर्जी?
ममता बनर्जी पूरे 5 साल बाद सोनिया गांधी से मिलने उनके घर 10 जनपथ पहुंची हैं. इससे पहले जुलाई 2021 में ममता बनर्जी ने 10 जनपथ जाकर सोनिया गांधी से मुलाकात की थी, जिसमें राहुल गांधी भी मौजूद थे. उसके बाद दोनों दलों के बीच रिश्तों में ऐसी कड़वाहट आई कि जब एक बार मीडिया ने ममता से पूछा था कि क्या वे दोबारा 10 जनपथ जाएंगी, तो उन्होंने भड़कते हुए कहा था कि “वहां जाना क्या मेरी कोई संवैधानिक बाध्यता है?”
अब समय का चक्र गया घूम
लेकिन समय का चक्र ऐसा घूमा कि आज जब बंगाल हाथ से निकल चुका है, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी दिल्ली में टीएमसी के बागी सांसदों के साथ ‘ऑपरेशन लोटस’ चला रहे हैं और खुद शताब्दी रॉय व डॉ. काकोली घोष दस्तिदार जैसी फायरब्रांड सांसद पाला बदल चुकी हैं, तब ममता बनर्जी को अपनी पुरानी दोस्त सोनिया गांधी की याद आई है.
24 घंटे में दूसरी मुलाकात के 3 सबसे बड़े सियासी मायने
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, 24 घंटे के भीतर सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की इस वन-टू-वन क्लोज डोर मीटिंग के बेहद गंभीर और गहरे राजनीतिक संदेश हैं.
सांसदों की टूट को रोकने के लिए कांग्रेस से गुहार: टीएमसी के 20 बागी सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र सौंपकर अलग बैठने की तैयारी में हैं. ममता बनर्जी जानती हैं कि इस संकट से उन्हें केवल कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व ही बचा सकता है. वे सोनिया गांधी के जरिए विपक्षी दलों के उन सांसदों और नेताओं पर नैतिक दबाव बनवाना चाहती हैं जो पर्दे के पीछे बागियों को शह दे रहे हैं.
संसद के मानसून सत्र के लिए कड़ा चक्रव्यूह: ममता बनर्जी और सोनिया गांधी के बीच आगामी सत्र को लेकर रणनीति बनी है. ममता बनर्जी अपनी राष्ट्रीय प्रासंगिकताओं को बचाए रखने के लिए कांग्रेस के पाले में पूरी तरह झुकने को तैयार हैं, ताकि संसद में तृणमूल कांग्रेस को विपक्षी खेमे का मजबूत संरक्षण मिल सके.
गांधी परिवार पर पूर्ण भरोसा जताना: कभी राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाने वाली ममता बनर्जी आज पूरी तरह गांधी परिवार के संकटमोचक अवतार के सामने नतमस्तक नजर आ रही हैं. सोनिया गांधी का राजनीतिक रसूख आज भी क्षेत्रीय क्षत्रपों के बीच सबसे बड़ा है, और ममता इसी रसूख का इस्तेमाल अपनी डूबती नैया को पार लगाने के लिए करना चाहती हैं.
क्या कहते हैं जानकार?
टीएमसी की राजनीति को करीब से जानने वालों की मानें सोमवार को गठबंधन की बैठक में जो केमिस्ट्री दिखी थी, मंगलवार को 10 जनपथ की बैठक में वह रणनीति में बदल गई. ममता बनर्जी भली-भांति जानती हैं कि अगर दिल्ली में उनके 19 से 20 सांसद अलग गुट बना लेते हैं, तो चुनाव आयोग में उनकी राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा और सिंबल दोनों खतरे में पड़ जाएंगे. ऐसे में वे सोनिया गांधी के सामने अपने राजनीतिक वजूद को बचाने की आखिरी गुहार लेकर गई हैं. अब देखना यह है कि सोनिया गांधी का यह सुरक्षा कवच बंगाल के बागी सांसदों के गुस्से को शांत कर पाता है या नहीं.
10 जनपथ से बाहर निकलते हुए ममता बनर्जी के चेहरे पर तनाव साफ देखा जा सकता था, हालांकि उन्होंने मीडिया से दूरी बनाए रखी. अगले 24 घंटे यह तय कर देंगे कि सोनिया गांधी के घर की गई यह गुप्त मंत्रणा टीएमसी में होने जा रही इस ऐतिहासिक महाटूट को टाल पाती है या शुभेंदु अधिकारी का दिल्ली वाला चक्रव्यूह तृणमूल कांग्रेस को दो फाड़ कर के ही दम लेगा.

