India
oi-Puja Yadav
Ladakh
Earthquake
Today:
उत्तर-पश्चिमी
कश्मीर
और
लद्दाख
क्षेत्र
में
सोमवार,
19
जनवरी
को
भूकंप
के
तेज
झटके
महसूस
किए
गए,
जिससे
पहाड़ी
इलाकों
में
कुछ
देर
के
लिए
दहशत
का
माहौल
बन
गया।
नेशनल
सेंटर
फॉर
सीस्मोलॉजी
(NCS)
के
अनुसार,
भूकंप
की
तीव्रता
रिक्टर
स्केल
पर
5.7
मापी
गई।
यह
भूकंप
सोमवार
की
सुबह
11
बजकर
51
मिनट
14
सेकंड
(IST)
पर
आया।
भूकंप
के
झटके
कई
इलाकों
में
महसूस
किए
गए,
हालांकि
राहत
की
बात
यह
रही
कि
फिलहाल
कहीं
से
भी
किसी
तरह
के
जान-माल
के
नुकसान
की
कोई
सूचना
नहीं
मिली
है।

Earthquake
in
Ladakh:
लेह-लद्दाख
में
था
भूकंप
का
केंद्र
एनसीएस
द्वारा
जारी
आधिकारिक
जानकारी
के
मुताबिक,
इस
भूकंप
का
केंद्र
लेह-लद्दाख
क्षेत्र
में
स्थित
था।
भूकंप
की
गहराई
जमीन
से
करीब
171
किलोमीटर
नीचे
दर्ज
की
गई,
जिससे
इसे
गहरे
स्तर
(Deep
Earthquake)
का
भूकंप
माना
जा
रहा
है।
इसके
निर्देशांक
अक्षांश
36.71
डिग्री
उत्तर
और
देशांतर
74.32
डिग्री
पूर्व
बताए
गए
हैं।
विशेषज्ञों
का
कहना
है
कि
भले
ही
भूकंप
की
तीव्रता
मध्यम
से
तेज
श्रेणी
में
रही,
लेकिन
अधिक
गहराई
में
उत्पन्न
होने
की
वजह
से
सतह
पर
इसका
असर
सीमित
रहा
और
किसी
बड़े
नुकसान
की
आशंका
कम
हो
गई।
सरकार
ने
जारी
की
एडवाइजरी
प्रशासन
और
आपदा
प्रबंधन
एजेंसियों
के
अनुसार,
अभी
तक
किसी
भी
इलाके
से
जान-माल
के
नुकसान
की
पुष्टि
नहीं
हुई
है।
स्थानीय
प्रशासन
ने
बताया
कि
स्थिति
पर
लगातार
नजर
रखी
जा
रही
है।
एहतियात
के
तौर
पर
लोगों
को
सतर्क
रहने
की
सलाह
दी
गई
है,
क्योंकि
भूकंप
के
बाद
आफ्टरशॉक्स
आने
की
संभावना
से
इनकार
नहीं
किया
जा
सकता।
आपदा
प्रबंधन
विभाग
ने
स्पष्ट
किया
है
कि
फिलहाल
हालात
पूरी
तरह
सामान्य
हैं,
लेकिन
निगरानी
बढ़ा
दी
गई
है
और
सभी
संबंधित
एजेंसियां
अलर्ट
मोड
पर
हैं।
आपदा
प्रबंधन
अधिकारियों
ने
लोगों
से
अपील
की
है
कि
वे
किसी
भी
तरह
की
अफवाहों
पर
ध्यान
न
दें
और
केवल
आधिकारिक
सूचनाओं
पर
भरोसा
करें।
साथ
ही,
भूकंप
से
जुड़ी
सुरक्षा
गाइडलाइंस
की
जानकारी
रखना
बेहद
जरूरी
है,
ताकि
किसी
बड़े
झटके
की
स्थिति
में
जान-माल
के
नुकसान
को
कम
किया
जा
सके।
भूकंप
के
लिहाज
से
बेहद
संवेदनशील
हिमालयी
क्षेत्र
लेह-लद्दाख
और
जम्मू-कश्मीर
का
यह
इलाका
हिमालयी
भूकंपीय
बेल्ट
का
हिस्सा
है,
जिसे
भूकंप
के
लिहाज
से
अत्यंत
संवेदनशील
माना
जाता
है।
वैज्ञानिक
दृष्टिकोण
से
यह
क्षेत्र
सिस्मिक
जोन-4
और
जोन-5
में
आता
है,
जो
दुनिया
के
सबसे
संवेदनशील
भूकंप
क्षेत्रों
में
गिने
जाते
हैं।
विशेषज्ञों
के
अनुसार,
इस
क्षेत्र
में
भारतीय
और
यूरेशियन
टेक्टोनिक
प्लेटों
की
टक्कर
के
कारण
लगातार
भूगर्भीय
गतिविधियां
होती
रहती
हैं।
इसी
वजह
से
यहां
समय-समय
पर
हल्के
से
मध्यम
तीव्रता
के
भूकंप
दर्ज
किए
जाते
हैं।
गहरे
और
उथले
भूकंप
में
क्या
है
फर्क?
भूकंप
विशेषज्ञों
का
कहना
है
कि
उथले
भूकंप
(Shallow
Earthquakes)
आमतौर
पर
ज्यादा
खतरनाक
होते
हैं,
क्योंकि
उनकी
तरंगें
जमीन
की
सतह
तक
जल्दी
पहुंचती
हैं
और
अधिक
नुकसान
कर
सकती
हैं।
वहीं,
गहरे
भूकंप
अपेक्षाकृत
कम
नुकसानदेह
होते
हैं,
क्योंकि
ऊर्जा
का
बड़ा
हिस्सा
जमीन
के
भीतर
ही
खत्म
हो
जाता
है।
इस
मामले
में
भूकंप
की
गहराई
अधिक
होने
के
कारण
इसके
झटके
सीमित
प्रभाव
वाले
रहे।
हिमालयन
क्षेत्र
में
बढ़ी
भूकंपीय
गतिविधि
यह
भूकंप
ऐसे
समय
में
आया
है
जब
आसपास
के
क्षेत्रों
में
हाल
के
दिनों
में
लगातार
भूकंपीय
गतिविधियां
दर्ज
की
गई
हैं।
एक
दिन
पहले
ही
अफगानिस्तान
में
4.1
तीव्रता
का
भूकंप
आया
था।
इससे
पहले
15
जनवरी
को
वहां
4.2
तीव्रता
और
14
जनवरी
को
3.8
तीव्रता
के
भूकंप
दर्ज
किए
गए
थे।
इन
सभी
भूकंपों
की
गहराई
90
से
96
किलोमीटर
के
बीच
बताई
गई
थी।
लगातार
आ
रहे
इन
झटकों
से
यह
संकेत
मिल
रहा
है
कि
पूरे
हिमालयी
क्षेत्र
में
फिलहाल
भूकंपीय
गतिविधियां
तेज
बनी
हुई
हैं।
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