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Pusa Hybrid Karela New Variety: दिल्ली पूसा ने हाथ के बराबर लंबा, कम कड़वा और पौष्टिक हाइब्रिड करेला विकसित किया है. जिसकी उत्पादकता देसी करेले से 30-40% अधिक है. एक करेला बाजार में 50–80 रुपए तक बिक सकता है, जिससे किसानों को तीन गुना मुनाफा होगा. इस करेले की लंबाई बाजार में मिलने वाले देसी करेले से ज्यादा होती है. यह पौष्टिक तत्वों से भी भरा होता है और यह ज्यादा मोटा होता है.
यह देसी करेला नहीं है बल्कि उन्नत किस्म का करेला है जिसे विकसित किया है दिल्ली के भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) पूसा के डिवीजन ऑफ वेजिटेबल ने. इसे आमतौर पर पूसा हाइब्रिड करेला कहते हैं. इस करेले की लंबाई बाजार में मिलने वाले देसी करेले से ज्यादा होती है. यह पौष्टिक तत्वों से भी भरा होता है और यह ज्यादा मोटा होता है.
सामान्य देसी करेले से कम कड़वा होता है. गूदा कोमल और कम रेशेदार होता है. बीज नरम इसलिए पकाने में आसान होता है. सही तरीके से अगर हल्का नमक लगाकर 10–15 मिनट रखकर इसे पकाने पर इसकी कड़वाहट और भी कम हो जाती है, जबकि पौष्टिकता बनी रहती है.
इस करेले को खाने से ब्लड शुगर कंट्रोल में मदद, खून साफ रखने और त्वचा के लिए अच्छा, एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन-सी त्वचा और इम्युनिटी बढ़ती है. पाचन बेहतर करता है. फाइबर ज्यादा होने से कब्ज, गैस और अपच में राहत मिलती है. वजन नियंत्रित करने में सहायक कम कैलोरी, ज्यादा फाइबर, लंबे समय तक पेट भरा महसूस होता है. यह करेला लिवर फंक्शन सही करता है. इसमें आयरन जैसे पोषक तत्व मौजूद.
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इस हाइब्रिड करेले की लंबाई की बात करें तो इसकी लंबाई 20–35 सेमी या उससे अधिक होती है. इसकी खासियत यह है कि इसमें एक समान मोटाई होती है और आकर्षक हरा रंग होता है. यह करेला रोग सहनशील होता है. इसको ज्यादा उत्पादन के लिए ग्रीनहाउस या नेट हाउस में लगाया जाता है. इस तकनीक के जरिए ही इस हाइब्रिड करेले के उत्पादन में वृद्धि देखी जाती है.
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के डिवीज़न ऑफ वेजिटेबल की माने तो इस करेले की अच्छी कीमत के लिए किसान इसे सुपर मार्केट में भी बेच सकते हैं या फिर बड़ी मंडियों में भी से ले जा सकते हैं. जहां उनका यह हाइब्रिड करेला हाथों हाथ बिक जाएगा. उन्हें काफी अच्छा मुनाफा होगा. इसमें मेहनत भी कम लगती है, क्योंकि इसकी तकनीक भी नई है. यह खाने में भी देसी करेला जितना कड़वा नहीं होता है.
बात करें इसके उत्पादन की तो देसी करेले से इसकी उत्पादक क्षमता 30–40 फीसदी ज्यादा होती है. एक एकड़ में 80–120 क्विंटल तक इसका उत्पादन होता है. जिस वजह से किसानों को बंपर मुनाफा हो सकता है. भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान का मानना है कि अगर किसान इस हाइब्रिड करेले को लगाएंगे तो इसका उत्पादन ज्यादा होगा और यह खाने में भी अच्छा है और देखने में भी इसका आकार काफी बड़ा है. ऐसे में जब किसान इसे बाजार में बेचेंगे तो देसी करेला जहां एक किलो 50 से 60 रुपए में बिकता है तो वहीं यह एक करेला ही यानी इसका सिर्फ एक पीस ही मार्केट में 50 या 80 रुपए तक का बिक जाएगा. यानी कम जगह में ज्यादा उत्पादन और तीन गुना ज्यादा मुनाफा किसानों को होगा.

