नई दिल्ली. जियो के आईपीओ ने शेयर बाजार में धूम मचा रखी है. पहले दिन ही 3 गुना ज्यादा सब्सक्राइब हो चुके इस आईपीओ में दांव लगाने का 23 अक्टूबर यानी शुक्रवार आखिरी दिन है. जियो प्लेटफॉर्म ने अपने आईपीओ में 4 कैटेगरी बनाई है. यह कैटेगरी अलग-अलग निवेशकों के लिए है और इनकी योग्यता भी अलग है. अगर आप इनमें से किसी कैटेगरी में आते हैं, तो उसी के तहत आईपीओ पर दांव लगाएं. इससे शेयर अलॉटमेंट होने का चांस ज्यादा होगा. कंपनी ने किस तरह के निवेशकों के लिए कौन सी कैटेगरी बनाई है, इसकी डिटेल में जानकारी होना जरूरी है.
जियो प्लेटफॉर्म ने अपने आईपीओ के लिए सामान्य रिटेल कैटेगरी के अलावा गैर संस्थागत निवेश की कैटेगरी भी बनाई है. इसके अलावा रिलायंस के शेयरहोल्डर्स और समूह के सभी कर्मचारियों के लिए भी कैटेगरी बनाई है. इन कैटेगरी में शामिल लोगों को शेयरों का आवंटन तरजीही तौर पर किया जाएगा. इसका मतलब है कि जो निवेशक इसकी योग्यता पूरी करेगा, उसे शेयरों का आवंटन होना आसान रहेगा.
शेयरहोल्डर्स के लिए कितना अलोकेशन?
जियो प्लेटफॉर्म ने सबसे बड़ी हिस्सेदारी शेयरहोल्डर्स को दी है. पूरे आईपीओ में से 2,50 करोड़ रुपये के शेयर इस कैटेगरी के लिए रिजर्व रखे गए हैं. रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरहोल्डर्स को आईपीओ के लिए डेडिकेटेड रूट दिया गया है. ऐसे निवेशक जिनके पास 14 अक्टूबर से पहले आरआईएल के शेयर थे, उन्हें इस कैटेगरी में अप्लाई करने की छूट दी गई है. कंपनी ने 13 अक्टूबर तक टी-1 सेटलमेंट साइकिल के तहत आरआईएल के शेयर खरीदने की शर्त रखी है. इस कैटेगरी के निवेशक अधिकतम 2 लाख रुपये के शेयर खरीद सकते हैं. वैसे तो इस कैटेगरी में भी अलॉटमेंट की कोई गारंटी नहीं है, लेकिन इससे शेयर मिलना आसान हो जाता है.
एम्पलॉयी कोटा में कौन-कौन आता है?
कंपनी ने आईपीओ में एम्पलॉयीज के लिए भी एक कोटा बनाया है. इस कोटे में 500 करोड़ के शेयरों को रखा गया है. इस कोटे में रिलायंस इंडस्ट्रीज, जियो प्लेटफॉर्म और जियो प्लेटफॉर्म की सब्सिडियरी के कर्मचारियों को दांव लगाने का मौका मिलता है. इस कैटेगरी में अधिकतम 5 लाख रुपये का निवेश किया जा सकता है. कंपनी ने साफ किया है, लिस्ट में दिए गए कर्मचारी ही शामिल होंगे. इसके अलावा रिलायंस समूह की अन्य कंपनियों के कर्मचारियों को इस कोटे में शामिल नहीं किया गया है. योग्य कर्मचारी अपनी स्टेटस का सत्यापन करके निश्चित फॉर्मेट में अप्लीकेशन कर सकते हैं.
रिटेल कैटेगरी सबसे खास
इस आईपीओ की सबसे खास कैटेगरी रिटेल है, क्योंकि इसमें कोई भी निवेशक दांव लगा सकता है. इसका मतलब है कि यह एक खुली कैटेगरी है जो सबके लिए है. इस कैटेगरी में अधिकतम 2 लाख रुपये तक का दांव लगाया जा सकता है. हालांकि, इसमें छोटे निवेशकों को ही शामिल किया गया है. इस कैटेगरी में शेयरों का आवंटन सामान्य रूट से किया जाएगा, लिहाजा इसमें अलॉटमेंट होने का चांस कम ही रहता है. इस कैटेगरी में कोटे वाले निवेशक जैसे शेयरहोल्डर्स और कर्मचारी भी दांव लगा सकते हैं.
गैस संस्थागत निवेशकों के लिए क्या खास?
ऐसे निवेशक जो 2 लाख रुपये से ज्यादा का निवेश करना चाहते हैं, उन्हें गैर संस्थागत निवेशक वाली कैटेगरी में दांव लगाना होगा. यह कैटेगरी ऐसे निवेशकों के लिए है, जो ज्यादा पैसे लगाना चाहते हैं. हालांकि, ऐसे निवेशक जो रिटेल कैटेगरी में दांव लगा चुके हैं, उन्हें इसके जरिये निवेश करने की छूट नहीं मिलेगी.
क्या एक से ज्यादा कैटेगरी में लगा सकते हैं दांव?
जियो प्लेटफॉर्म ने साफ किया है कि उसके आईपीओ में एक से ज्यादा कैटेगरी में निवेश किया जा सकता है. आरआईएल के शेयरहोल्डर्स वाली कैटेगरी का निवेशक चाहे तो रिटेल कैटेगरी में भी दांव लगा सकता है. रिलायंस के कर्मचारियों को भी अपने कोटे के अतिरिक्त रिटेल कैटेगरी में निवेश का मौका दिया गया है. अगर एक ही पैन के जरिये कई आवेदन किए जाते हैं तो उन्हें रिजेक्ट किया जा सकता है.
(डिस्क्लेमर – नेटवर्क18 और टीवी18 कंपनियां चैनल/वेबसाइट का संचालन करती हैं, जिनका नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज एकमात्र लाभार्थी है.)

