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HRA Tax Deduction : अगर आप भी किराये पर रहते हैं और नौकरी करते हैं, तो हाउस रेंट अलाउंस के रूप में आप हजारों रुपये टैक्स का दावा कर सकते हैं. एचआरए क्लेम करने से पहले आपको इसकी पूरी जानकारी होना जरूरी है. गलत तरीके से क्लेम किया गया एचआरए खारिज हो सकता है.
एचआरए पर टैक्स छूट क्लेम करने के लिए कई डॉक्यूमेंट जरूरी हैं.
नई दिल्ली. दिल्ली-एनसीआर जैसे बड़े शहरों में रहकर नौकरी करने वाले ज्यादातर लोग किराये के मकान में ही जिंदगी बिताते हैं. ऐसे नौकरीपेशा को इनकम टैक्स विभाग भी छूट के रूप में बड़ी राहत देता है. अगर आप भी आईटीआर भरने की तैयारी कर रहे हैं तो यह समझ लीजिए कि अपने और परिवार के रहने के लिए जो किराया चुकाते हैं, उस पर टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं. वैसे तो यह टैक्स छूट किसी भी शहर में किराये पर रहने वालों को मिलती है, लेकिन मेट्रो शहरों में रहते हैं तो ज्यादा छूट दी जाएगी.
नौकरीपेशा को उसकी कंपनी की ओर से होम रेंट अलाउंस ( HRA) दिया जाता है, जो किराये चुकाने के एवज में मिलता है. आईटीआर भरते समय इसी एचआरए पर टैक्स छूट क्लेम की जाती है. इनकम टैक्स की धारा 10(13ए) के तहत एचआरए पर टैक्स छूट मिलती है. एचआरए क्लेम करने के लिए यह जरूरी है कि आपकी कंपनी सैलरी पैकेज में इस अलाउंस को जोड़कर रखे. ऐसी कोई भी टैक्स छूट को सिर्फ पुराने टैक्स रिजीम के तहत ही क्लेम किया जा सकता है. नए टैक्स रिजीम में ऐसी सभी टैक्स छूट को खत्म कर दिया गया है.
कैसे तय किया जाता है एचआरए
हाउस रेंट अलाउंस की राशि तय करने में कई फैक्टर भूमिका निभाते हैं, जिसमें सबसे जरूरी है कि आपके सैलरी पैकेज में कितना पैसा कंपनी ने एचआरए के तहत जोड़ा है. अगर आप मेट्रो शहरों में रहते हैं तो मूल वेतन और डीए यानी महंगाई भत्ते को जोड़कर उसका 50 फीसदी एचआरए के रूप में दिया जा सकता है. इसी तरह, गैर मेट्रो शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को डीए और मूल वेतन को जोड़कर उसकी 40 फीसदी राशि एचआरए में दी जा सकती है. इसके अलावा आपने जो जो भी किराया सालभर में चुकाया है, वह कुल सैलरी का 10 फीसदी तक हो सकता है.
सिर्फ 8 शहरों में 50 फीसदी एचआरए
इनकम टैक्स विभाग ने देश के 8 शहरों के लिए ही 50 फीसदी एचआरए क्लेम करने की सुविधा दी है. इन शहरों के अलावा अन्य किसी जगह पर रहने वाले कर्मचारियों को 40 फीसदी राशि ही एचआरए के रूप में क्लेम करने की सुविधा दी जाएगी. इन शहरों में दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बैंगलुरु, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद शामिल हैं. इन शहरों में रहकर किराया चुकाते हैं तो एचआरए के रूप में 50 फीसदी सैलरी क्लेम कर सकते हैं.
मेट्रो शहर में कितनी टैक्स छूट
मान लीजिए कोई टैक्सपेयर दिल्ली में रहता है और हर महीने 18 हजार रुपये का किराया देता है, जबकि उनकी बेसिक सैलरी 27 हजार रुपये है, जबकि पूरे वित्तवर्ष में नियोक्ता से 1.62 लाख रुपये मिले हैं. इनकम टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 84 कहती है कि बेसिक सैलरी और डीए का 10 फीसदी रेंट के रूप में क्लेम कर सकते हैं. लिहाजा कर्मचारी को 1,83,600 रुपये तक एचआरए क्लेम करने की छूट मिलेगी. इसका मतलब हुआ कि कंपनी की ओर से मिले 1.62 लाख रुपये के कुल एचआरए को क्लेम किया जा सकता है.
एचआरए क्लेम करने के लिए क्या डॉक्यूमेंट जरूरी
- एचआरए क्लेम करने के लिए किराये की रसीद जरूरी होगी.
- अपने नियोक्ता को रेंटल एग्रीमेंट भी देना होगा.
- एचआरए के लिए फॉर्म 12बीबी की जरूरत होगी.
- अगर आपके पास किराये का बैंक पेमेंट प्रूफ है तो बेहतर होगा.
- सैलरी स्लिप जिसमें एचआरए शामिल हो.
- अगर किराया 1 लाख रुपये सालाना से ज्यादा है तो मकान मालिक का पैन कार्ड जरूरी होगा.
- अगर मकान मालिक के पास पैन नहीं है तो उसे लिखकर देना होगा, जिस पर हस्ताक्षर भी होंगे.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें

