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oi-Pallavi Kumari
Iranian Soldiers Female: मिडिल ईस्ट में इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। इजरायल के ईरान पर किए गए हमले और उसके बाद अमेरिका की पुष्टि ने हालात को और गंभीर बना दिया। तेहरान समेत कई शहरों में धमाकों की आवाजें सुनी गईं और इजरायल ने राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया। इसी बीच एक सवाल तेजी से चर्चा में है – आखिर ईरान की सेना में महिलाओं की कितनी भागीदारी है।
ईरान की सेना में महिलाओं की स्थिति (Iranian Women in Military)
ईरान में अनिवार्य सैन्य सेवा केवल पुरुषों के लिए है। 18 साल से ऊपर के पुरुषों को करीब 24 महीने की सेवा करनी होती है, जबकि महिलाओं के लिए कोई बाध्यता नहीं है। पारंपरिक रूप से ईरान की नियमित सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड में महिलाओं की भूमिका सीमित और विशेष इकाइयों तक रही है। वे अधिकतर मेडिकल, इंटेलिजेंस, प्रशासनिक या सपोर्ट रोल में दिखाई देती हैं। हालांकि आधिकारिक आंकड़े बहुत स्पष्ट नहीं होते, लेकिन यह माना जाता है कि नियमित सैन्य ढांचे में महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में काफी कम है।

National Liberation Army में महिलाओं की बड़ी हिस्सेदारी (NLA Women Soldiers)
- सबसे ज्यादा चौंकाने वाले आंकड़े ईरान की विपक्षी सशस्त्र संगठन नेशनल लिबरेशन आर्मी यानी NLA से जुड़े हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस संगठन में करीब 30,000 सैनिक हैं, जिनमें लगभग 35 प्रतिशत महिलाएं हैं। इससे भी ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि अधिकारियों के स्तर पर महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 70 प्रतिशत बताई जाती है।
- NLA में सैनिक बिना पारंपरिक रैंक के सामूहिक ढांचे में रहते हैं। उन्हें वेतन नहीं मिलता और वे यह संकल्प लेते हैं कि जब तक ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं होता, वे विवाह नहीं करेंगे। इस संगठन का नेतृत्व मरियम राजवी करती हैं, जिनके नेतृत्व में महिलाओं को कमांडिंग रोल और रणनीतिक फैसलों में बराबरी का अधिकार दिया गया है।
- यहां महिलाएं सिर्फ ट्रेनिंग तक सीमित नहीं हैं। वे टैंक चलाती हैं,फाइटर हेलीकॉप्टर उड़ाती हैं और मिक्स बटालियनों की कमान संभालती हैं। पुरुष सैनिक भी उनके सैन्य कौशल को सम्मान देते हैं। पारंपरिक इरानी समाज की तुलना में यह तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आती है।

बटूल एब्रहामी की कहानी (Women in Iranian Resistance)
18 साल की बटूल एब्रहामी तेहरान की एक सामान्य छात्रा थीं। पढ़ाई के दौरान उन्होंने महसूस किया कि धार्मिक नियमों के कारण महिलाओं को कई अधिकारों से वंचित रखा जाता है। गिरफ्तारी के डर से वे इराक चली गईं और NLA में शामिल हो गईं। वहां उन्हें नेतृत्व और लड़ाकू भूमिका मिली। बटूल जैसी हजारों युवतियों के लिए यह संगठन सिर्फ सेना नहीं, बल्कि सम्मान और समानता का मंच बन गया।
इतिहास में महिलाओं की भूमिका (Iranian Women Military History)
ईरान में महिलाओं की सैन्य भागीदारी कोई नई बात नहीं है। प्राचीन फारसी साम्राज्य, खासकर आकेमेनिड और सस्सानियन काल में महिला योद्धाओं के प्रमाण मिलते हैं। 1905 से 1911 के संवैधानिक आंदोलन में महिलाओं ने हथियार उठाए, कई बार पुरुषों का भेष बदलकर लड़ाई लड़ी और रसद आपूर्ति संभाली।
ईरान-इराक युद्ध के दौरान भी हजारों महिलाओं ने अहम भूमिका निभाई। अनुमान है कि करीब 25,000 महिलाएं डॉक्टर, नर्स और सपोर्ट स्टाफ के रूप में तैनात थीं, जबकि 500 से अधिक महिलाओं ने सीधे मोर्चे पर लड़ाई लड़ी। 6,400 से ज्यादा महिलाओं की जान गई और हजारों घायल हुईं। खुर्रमशहर जैसी लड़ाइयों में महिलाओं की सक्रिय मौजूदगी दर्ज की गई।
मार्ज़िये हदीदची जैसी महिला कमांडर रिवोल्यूशनरी गार्ड में अहम पदों पर रहीं। हालांकि आधिकारिक नैरेटिव में अक्सर महिलाओं को सहयोगी या प्रेरक भूमिका तक सीमित दिखाया गया।

बदलती तस्वीर या सीमित हकीकत
आज भी ईरान की आधिकारिक सेना में महिलाओं की भूमिका नियंत्रित और सीमित ढांचे में है। लेकिन विपक्षी संगठनों और प्रतिरोध आंदोलनों में उनकी भूमिका ज्यादा सक्रिय और नेतृत्वकारी दिखाई देती है। यही वजह है कि जब NLA में 35 प्रतिशत महिला सैनिक और 70 प्रतिशत महिला अधिकारी होने का दावा सामने आता है, तो यह पारंपरिक सैन्य संरचना से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करता है।
ईरान की महिलाओं की यह कहानी सिर्फ आंकड़ों की नहीं है, बल्कि सामाजिक बदलाव, संघर्ष और बराबरी की तलाश की कहानी भी है। मौजूदा तनाव के बीच यह सवाल और भी अहम हो जाता है कि आने वाले समय में ईरान की सैन्य और राजनीतिक व्यवस्था में महिलाओं की भूमिका कितनी और कैसे बदलती है।
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