भारत ने पाकिस्तान की दुखती रग पर ऐसा पैर रखा है कि इस्लामाबाद में चीखें गूंज रही हैं. बिना एक भी गोली चलाए, बिना कोई मिसाइल दागे, भारत ने अपने खूंखार पड़ोसी को तबाह करने का पुख्ता इंतजाम कर लिया है. भारत का यह ‘वाटर अटैक’ पाकिस्तान के लिए किसी भी सैन्य हमले से कहीं ज्यादा खौफनाक साबित होने वाला है. रणनीति एकदम साफ और बेहद आक्रामक है- ‘पहले प्यास से तड़पाओ, और फिर बाढ़ में डुबा दो’. आने वाले सिर्फ चार महीने पाकिस्तान के वजूद के लिए सबसे बड़ा खतरा बनने जा रहे हैं. भारत ने ‘शाहपुर कंडी डैम’ को पूरा करके और ‘सिंधु जल समझौते’ (IWT) को रद्द करके पाकिस्तान की मौत का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार कर दिया है.
गर्मियों की शुरुआत के साथ ही पाकिस्तान का असली टॉर्चर शुरू होगा. मई और जून के महीनों में जब पाकिस्तान में पारा चरम पर होगा, तब उन्हें पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसना पड़ेगा. भारत ने जम्मू-कश्मीर और पंजाब बॉर्डर पर ‘शाहपुर कंडी डैम’ का काम पूरा कर लिया है. अब तक रावी नदी का जो बेशकीमती पानी बहकर मुफ्त में पाकिस्तान चला जाता था, वह अब पूरी तरह से रोक दिया गया है. इस पानी को अब जम्मू-कश्मीर के कठुआ और सांबा के सूखाग्रस्त इलाकों की तरफ मोड़ दिया गया है.
इसका सीधा असर पाकिस्तान के सबसे उपजाऊ सूबे ‘पंजाब’ और ‘सिंध’ पर पड़ेगा. पाकिस्तान की 80 फीसदी खेती इसी पानी पर जिंदा है. रावी का पानी रुकते ही पाकिस्तान के खेत बंजर होने लगेंगे. वहां का किसान पानी के बिना त्राहि-त्राहि करेगा. महंगाई और भुखमरी से जूझ रहे पाकिस्तान में अनाज का भयंकर अकाल पड़ेगा. ये दोनों महीने पाकिस्तान को आर्थिक रूप से पूरी तरह अपाहिज कर देंगे.
बाढ़ का खौफ: जुलाई और अगस्त में आएगा ‘जलजला’
सूखे की मार से पाकिस्तान अभी संभल भी नहीं पाएगा कि जुलाई और अगस्त का मानसून उसके लिए साक्षात काल बनकर आएगा. यहीं पर भारत का दूसरा और सबसे घातक दांव काम करेगा. 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने ‘सिंधु जल समझौते’ को सस्पेंड कर दिया था. इस समझौते के रद्द होने का सबसे बड़ा और खौफनाक मतलब यह है कि भारत अब पाकिस्तान के साथ बाढ़ और नदियों के जलस्तर का ‘एडवांस डेटा’ साझा करने के लिए बिल्कुल भी बाध्य नहीं है. पहले भारत मानसून के दौरान पाकिस्तान को बता देता था कि वो बांधों से कितना पानी छोड़ने वाला है, जिससे पाकिस्तान तैयारी कर लेता था.
अब भारत ऐसा कोई अलर्ट नहीं देगा. बरसात के दिनों में जब नदियां उफान पर होंगी, भारत अपने बांधों से बिना कोई पूर्व चेतावनी दिए अतिरिक्त पानी छोड़ेगा. यह पानी अचानक पाकिस्तान के निचले इलाकों में घुसेगा और भयंकर बाढ़ लाएगा. शहरों के शहर और बचे-खुचे खेत इस पानी में डूब जाएंगे.
तबाही का चार महीने का कैलेंडर
मई: भीषण गर्मी की शुरुआत. रावी का पानी रुकने से पाकिस्तान की नहरें सूखनी शुरू होंगी.
जून: खेतों में दरारें पड़ेंगी. फसलें बर्बाद होंगी और पाकिस्तान में पीने के पानी तक के लाले पड़ जाएंगे.
जुलाई: मानसून की एंट्री. भारत बिना बताए अतिरिक्त पानी छोड़ेगा. पाकिस्तान में अचानक बाढ़ के हालात बनेंगे.
अगस्त: बाढ़ चरम पर होगी. पाकिस्तान का इन्फ्रास्ट्रक्चर और बची-खुची कृषि पूरी तरह जलमग्न हो जाएगी.
आतंकवाद की कीमत चुका रहा है पाकिस्तान
पाकिस्तान आज जो भुगत रहा है, वह उसके दशकों तक पाले गए आतंकवाद का सीधा नतीजा है. भारत ने बार-बार समझाया था कि ‘खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते’. लेकिन पाकिस्तान ने अपनी नापाक हरकतों को नहीं रोका. अब भारत ने साफ कर दिया है कि दुश्मनी के माहौल में कोई भी रियायत नहीं दी जाएगी. पाकिस्तान के पास पानी स्टोर करने की क्षमता सिर्फ 30 दिन की है. ऐसे में भारत की यह दोहरी मार (सूखा और अचानक बाढ़) पाकिस्तान की रीढ़ की हड्डी पूरी तरह तोड़ देगी. पाकिस्तान की सरकार अब दुनिया के सामने चाहे जितना रोना रो ले, भारत अपने फैसले से पीछे हटने वाला नहीं है. पाकिस्तान की तबाही की उल्टी गिनती अब शुरू हो चुकी है.

