शहरी खपत के इंडिकेटर कमजोर
नोमुरा ने कहा कि शहरी खपत के इंडिकेटर कमजोर हुए हैं। उसने यात्री वाहन बिक्री में गिरावट, एयरलाइन यात्री यातायात में कमी और एफएमसीजी कंपनियों की ओर से कमजोर शहरी मांग का हवाला दिया है। उसने यह भी कहा है कि कंपनियां अपने वेतन भुगतान को कम कर रही हैं।
सस्ती कारें भी नहीं खरीद पा रहे हैं लोग
बीते रोज मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) के चेयरमैन आर सी भार्गव ने भी सस्ती कारों की बिक्री में गिरावट पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि 10 लाख रुपये से कम कीमत वाली कारों की बिक्री घटना चिंता का विषय है। एक समय कुल बिक्री में इन कारों की हिस्सेदारी 80 फीसदी होती थी। अब यह लगातार घट रही है। इसका कारण लोगों के पास खर्च योग्य आय यानी डिस्पोसेबल इनकम का कम होना है।
आठ प्रमुख बुनियादी उद्योगों की ग्रोथ पड़ी सुस्त
बुधवार को एक और ऐसा आंकड़ा आया जो अर्थव्यवस्था की खराब होती सेहत की ओर इशारा करता है। देश के आठ प्रमुख बुनियादी उद्योगों की ग्रोथ सितंबर महीने में सुस्त पड़कर दो फीसदी पर आ गई है। एक साल पहले समान महीने में आठ बुनियादी उद्योगों का उत्पादन 9.5 फीसदी बढ़ा था। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त, 2024 में बुनियादी उद्योगों के उत्पादन में सालाना आधार पर 1.6 फीसदी की गिरावट आई थी।
आठ प्रमुख क्षेत्रों में कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस और बिजली क्षेत्र ने सितंबर के महीने में निगेटिव ग्रोथ दर्ज की। आठ बुनियादी उद्योगों में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली क्षेत्र शामिल हैं। बुनियादी उद्योगों का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक यानी आईआईपी में 40.27 फीसदी वेटेज होता है।

