भारत और जापान मिलकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में डिफेंस और नेवी पावर का एक नया समीकरण खड़ा कर रहे हैं. जापानी रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी का भारत दौरा और राजनाथ सिंह के साथ बैठक इसी का हिस्सा है. दोनों देशों ने नौसेना के युद्धपोत बनाने पर ऐतिहासिक डील की है. इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग का सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक वो ‘अनऑफिशियल शर्त’ थी, जो भारत ने बड़े ही सधे हुए लहजे में जापान के सामने रखी ही ‘अपनी एडवांस्ड डिफेंस टेक्नोलॉजी किसी भी सूरत में पाकिस्तान के हाथ मत लगने देना’. अब सवाल ये है कि जब टोक्यो और इस्लामाबाद के बीच कोई मिलिट्री या टेक डील चल ही नहीं रही है, तो भारत ने अचानक ये मुद्दा क्यों उठाया?
‘पाकिस्तान को लीक मत कर देना’, भारत की चिंता के पीछे क्या है वजह?
जापान के साथ अपने डिफेंस रिश्तों को मजबूत बनाते हुए भी भारत ग्लोबल सिक्योरिटी पर एक बहुत सख्त ‘रेड लाइन’ खींच दी है. भारत ने जापान को बिल्कुल साफ कह दिया है कि वो पाकिस्तान को किसी भी तरह की संवेदनशील, ड्यूअल-यूज यानी दोहरे इस्तेमाल वाली एडवांस मिलिट्री टेक्नोलॉजी न दे.
भारत की इस सलाह के पीछे कोई आशंका नहीं, बल्कि इतिहास का एक कड़वी और सच्ची घटना है. पाकिस्तान का अतीत अवैध परमाणु और मिसाइल तकनीक की तस्करी का रहा है. इसी बातचीत के दौरान भारत ने पाकिस्तानी परमाणु वैज्ञानिक एक्यू खान के कुख्यात ‘ब्लैक मार्केट’ नेटवर्क की याद दिलाई. एक्यू खान वही शख्स थे, जिन्होंने चोरी-छिपे उत्तर कोरिया को यूरेनियम संवर्धन के लिए सेंट्रीफ्यूज डिजाइन, आधुनिक पुर्जे और तकनीकी मदद बेची थी.
ए क्यू खान ने 1980 और 1990 के दशक में दुनिया भर में परमाणु तकनीक और उपकरणों की तस्करी का एक गुप्त नेटवर्क चलाया था. अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों और खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस नेटवर्क ने यूरेनियम संवर्धन के लिए इस्तेमाल होने वाले कई उच्च तकनीक वाले उपकरण, पार्ट-पुर्जे और मापक यंत्र अवैध रास्तों से जापानी कंपनियों और बिचौलियों के जरिए हासिल किए थे.
नॉर्थ कोरिया का वो मिसाइल टेस्ट और भारत का सटीक निशाना
भारत की ये चेतावनी सिर्फ पुरानी बातों पर आधारित नहीं है, बल्कि आज के हालात भी इसकी तस्दीक करते हैं. जिस समय दिल्ली में राजनाथ सिंह और शिंजिरो कोइज़ुमी बंद कमरे में बैठक कर रहे थे, ठीक उसी समय दक्षिण कोरिया की सेना ने खबर दी कि उत्तर कोरिया ने समुद्र की तरफ एक और अज्ञात मिसाइल दागी है.
आज के वक्त में अगर जापान की कोई भी उच्च तकनीक इस्लामाबाद के हाथ लगती है, तो इस बात का पूरा जोखिम है कि वह पाकिस्तान से लीक होकर उत्तर कोरिया जैसे आक्रामक और तानाशाह देश तक पहुंच जाएगी.
उत्तर कोरिया का ये कदम भारत की बात को और भी मजबूत कर गया. भारत ने जापान को समझाया कि उत्तर कोरिया जिस तरह आए दिन जापान के समुद्री क्षेत्र और हवाई सीमा के आसपास मिसाइलें दागकर धमकियां देता रहता है, उस उत्तर कोरिया को ताकतवर बनाने में पाकिस्तान का ही हाथ रहा है. ऐसे में अगर जापान से कोई तकनीक पाकिस्तान जाती है और वहां से उत्तर कोरिया पहुंचती है, तो ये खुद जापान के गले की हड्डी बन जाएगी.
नेवी शिप बनाने में साथ आए भारत और जापान
पाकिस्तान को लेकर अपनी चिंताएं मजबूती से सामने रखने के साथ ही, भारत और जापान ने डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में एक नया इतिहास भी रच दिया. जापानी रक्षा मंत्री कोइजुमी ने अपने भारत दौरे की शुरुआत मुंबई में भारतीय नौसेना की ताकतवर ‘वेस्टर्न नेवल कमान’ का दौरा करके की. इसके बाद दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों ने एक साझा बयान जारी किया, जो पूरी तरह से समुद्री सुरक्षा और नौसैनिक सहयोग पर टिका हुआ था. ये पहला मौका है जब दोनों देशों ने खास तौर पर सिर्फ रक्षा सहयोग को लेकर ऐसा साझा बयान जारी किया है.
इस डील के तहत दोनों देश एक नए और अलग मॉडल पर काम कर रहे हैं. इसके तहत जापान की शानदार डिजाइनिंग और एडवांस टेक्नोलॉजी को भारत की बड़ी मैन्युफैक्चरिंग ताकत के साथ जोड़ा जाएगा. फिर इस बेहतरीन तालमेल का इस्तेमाल भारतीय नौसेना और हमारे साथी देशों के लिए आधुनिक युद्धपोत और समुद्री जहाज बनाने में किया जाएगा.
इंडो-पैसिफिक में चीन को जवाब और नया लॉजिस्टिक्स नेटवर्क
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते खतरे के बीच ‘भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी’ बहुत मायने रखती है. दोनों देशों ने माना कि इस पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए मिलकर काम करना जरूरी है.
इसी रणनीति के तहत दोनों रक्षा मंत्रियों ने तीसरे देशों के साथ भी समुद्री सहयोग बढ़ाने के प्लान पर मुहर लगाई. इसमें सबसे खास है ‘इंडो-पैसिफिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क’ (IPLN) का विस्तार. यह एक ऐसा सिस्टम है जो किसी भी मानवीय संकट, प्राकृतिक आपदा या सुरक्षा चुनौती के समय साझेदार देशों तक तेजी से राहत सामग्री, उपकरण और नौसैनिक कर्मियों को पहुंचाने का काम करता है. इस नेटवर्क को और मजबूत करने के लिए जापान का रक्षा मंत्रालय इसी साल सितंबर में दूसरी IPLN टेबलटॉप एक्सरसाइज की मेजबानी करने जा रहा है.

