भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हुआ तो सियासत गर्म हो गई. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कांग्रेस को इस डील का क्रेडिट देने की कोशिश की और सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा-इस डील से ऑटोमोबाइल से लेकर स्टील सेक्टर तक बुरा असर पड़ने जा रहा है. इसके बाद केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने धागे खोल दिए. उन्होंने जयराम रमेश के एक-एक बिंदु का सिलसिलेवार जवाब देते हुए न सिर्फ उनके दावों की हवा निकाल दी, बल्कि तंज दे मारा- अंगूर खट्टे हैं.
जयराम रमेश ने मोदी सरकार की इस डील पर कई गंभीर सवाल खड़े किए.
- अंधाधुंध छूट और व्यापार घाटा: रमेश ने दावा किया कि यह डील भारत द्वारा किसी भी व्यापार भागीदार को दी गई “सबसे बड़ी ओपनिंग” है. इसमें यूरोपीय संघ के 96% से अधिक निर्यात पर शुल्क में कटौती या राहत दी गई है. उन्होंने आशंका जताई कि इससे ईयू से भारत का आयात दोगुना हो जाएगा, जिससे व्यापार घाटा खतरनाक स्तर पर पहुंच सकता है.
- कार्बन टैक्स (CBAM) पर विफलता: कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार भारत के एल्युमीनियम और स्टील निर्माताओं के लिए ‘कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म’ (CBAM) से छूट हासिल करने में विफल रही है. उन्होंने कहा कि 1 जनवरी, 2026 से इसके लागू होने के बाद भारत का निर्यात और गिरेगा, जो पहले ही 7 बिलियन डॉलर से गिरकर 5 बिलियन डॉलर हो चुका है.
- ऑटो सेक्टर और ईवी पर खतरा: जयराम रमेश ने सबसे बड़ी चिंता ऑटोमोबाइल सेक्टर को लेकर जताई. उन्होंने कहा कि यूके के बाद अब ईयू के लिए ऑटो सेक्टर खोलना घरेलू निर्माताओं के लिए जोखिम भरा है. उन्होंने विशेष रूप से इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इंडस्ट्री के “विनाश” (Vanquished) होने का डर दिखाया.
- नॉन-टैरिफ बैरियर: उन्होंने ईयू के सख्त स्वास्थ्य और सुरक्षा नियमों को लेकर भी चिंता जताई, जो भारतीय निर्यात के लिए बाधा बन सकते हैं. साथ ही, दवा उद्योग के लिए बौद्धिक संपदा (IPR) अधिकारों पर भी सवाल उठाए.
पीयूष गोयल का आक्रामक पलटवार
पीयूष गोयल ने जयराम रमेश के 5 प्रमुख आरोपों पर पॉइंट-टू-पॉइंट जवाब देकर उनकी समझ पर सवाल खड़े कर दिए.
1. हाइप नहीं, यह ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ है
जयराम रमेश ने जिसे हाइप बताया, उस पर गोयल ने आंकड़ों के साथ जवाब दिया. उन्होंने पूछा कि मेरे मित्र को यह हाइप क्यों लग रहा है? गोयल ने बताया कि यह 25 ट्रिलियन डॉलर की संयुक्त जीडीपी, 11 ट्रिलियन डॉलर के वैश्विक व्यापार और 2 अरब लोगों के साझा बाजार का समझौता है. डील के पहले ही दिन से भारत के 33 बिलियन डॉलर के लेबर इंटेंसिव एक्सपोर्ट पर टैक्स शून्य हो जाएगा. गोयल ने समझाया कि भारत और यूरोप की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं. यह जीरो सम गेम नहीं, बल्कि दोनों की जीत है.
2. कार्बन टैक्स (CBAM) पर ‘अपरिपक्व’ सोच
जयराम रमेश ने आरोप लगाया था कि सरकार स्टील और एल्युमीनियम सेक्टर को बचाने में विफल रही. इस पर गोयल ने करारा जवाब देते हुए कहा कि मोदी सरकार ने इन सेक्टरों के हितों को ऐसे उठाया है, जैसा पहले कभी किसी ने नहीं किया. गोयल ने कहा, हमने अपने भागीदारों के साथ बातचीत, विश्वास और सहयोग के माध्यम से इन जटिल विषयों को संभालने के रचनात्मक तरीके ढूंढे हैं. हम ‘माई वे ऑर हाईवे’ (मेरी मर्जी या कुछ नहीं) जैसी अपरिपक्व, अतार्किक और कठोर स्थिति नहीं अपनाते, जैसा कि विपक्ष सोचता है.” उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार ने समाधान के रास्ते खोज लिए हैं.
3. स्वास्थ्य नियम और सेवाओं पर जवाब
रमेश ने ईयू के सख्त हेल्थ रूल्स और सेवाओं में विदेशी कंपनियों के दबदबे का डर दिखाया था. इस पर गोयल ने धागे खोलते हुए समझाया. उन्होंने कहा, सभी देश, जिसमें भारत भी शामिल है, स्वास्थ्य और सुरक्षा कारणों से नियम बनाने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं. कोई भी देश ट्रेड डील में इसे छोड़ता नहीं है. डील में यह सुनिश्चित किया गया है कि ये नियम व्यापार में अनावश्यक बाधा न बनें. गोयल ने साफ किया कि इंटेलैक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (IPR) के नियम WTO के TRIPS समझौते के अनुरूप ही हैं. इसमें जनस्वास्थ्य के लिए लचीलापन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की जरूरत पर जोर दिया गया है. फाइनेंशियल और मैरीटाइम सर्विसेज में ईयू का निवेश और तकनीक आने से भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा और हमारे व्यवसायों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी.
4. ऑटो सेक्टर: ‘थोड़ा समय निकालकर समझें मेरे दोस्त’
ऑटोमोबाइल सेक्टर पर जयराम रमेश की चिंता को पीयूष गोयल ने “जानकारी का अभाव” करार दिया. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “मुझे उम्मीद है कि मेरे मित्र ऑटो सेक्टर को समझने के लिए और हम क्या करने का इरादा रखते हैं, इस पर थोड़ा और समय देंगे.” गोयल ने ऑटो सेक्टर की रणनीति का खुलासा किया. उन्होंने कहा- भारत ने जो छूट दी है, वह सीमित कोटे पर है और केवल प्रीमियम सेगमेंट यानी महंगी गाड़ियों पर केंद्रित है. इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के लिए शुल्क में कटौती तत्काल लागू नहीं होगी, इसमें 5 साल का ‘टाइम लैग’ रखा गया है ताकि घरेलू इंडस्ट्री तैयार हो सके. इससे भारत में हाई-एंड मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस, क्वालिटी स्टैंडर्ड और एडवांस R&D आएगा. इससे उपभोक्ताओं को भी बेहतर विकल्प और सुरक्षा मिलेगी.
5. रिफाइंड फ्यूल और रूस कनेक्शन
जयराम रमेश ने अंत में रूसी तेल से बने रिफाइंड फ्यूल के निर्यात और वाशिंगटन के दबाव का मुद्दा उठाया था. इस पर गोयल ने दो टूक कहा कि यह बिंदु अनावश्यक कारणों से जोड़ा गया है. उन्होंने कहा, ईयू के साथ हमारा व्यापार समझौता विश्वास और आपसी सम्मान पर आधारित एक दीर्घकालिक रणनीतिक जुड़ाव है, जो हमारे व्यापार मार्गों को मजबूत करेगा.” उन्होंने परोक्ष रूप से संकेत दिया कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीति पर किसी तीसरे देश (अमेरिका) के दबाव में नहीं है.
नकारात्मकता छोड़ें, दुनिया से जुड़ें
पीयूष गोयल ने अपने जवाब के अंत में जयराम रमेश और कांग्रेस को नसीहत भी दी. उन्होंने लिखा, मैं केवल यह उम्मीद करता हूं कि मेरे मित्र इस नकारात्मक और निराशावादी दृष्टिकोण को त्याग देंगे. यह दृष्टिकोण हमारे उन आकांक्षी लोगों को देख नहीं पा रहा है जो बाहर जाकर दुनिया के साथ व्यापार करने के लिए बेताब हैं. आइए उनके लिए बाधाएं बनने के बजाय, उनकी समृद्धि की राह में अवसर खोलें

