उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पीएम नरेंद्र मोदी के बीच एक महत्वपूर्ण मीटिंग हुई। अब दोनों कई महत्वपूर्ण समझौतों पर पहुंच गए हैं, तो वे हमारे दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने में दिशानिर्देश बनेंगे। मुझे उम्मीद है कि मार्गदर्शन के जरिए इस सर्वसम्मति से हमारे संबंध भविष्य में सुचारू रूप से आगे बढ़ेंगे और वे हमारे दोनों पक्षों के बीच विशिष्ट असहमति से प्रतिबंधित या बाधित नहीं होंगे।’
मीटिंग एक अच्छा उदाहरण
राजदूत ने यह भी कहा कि पड़ोसी देशों के बीच कुछ मतभेद स्वाभाविक हैं। उन्होंने आगे कहा, ‘सबसे महत्वपूर्ण कि उन्हें कैसे संभाला जाए और हल किया जाए। दोनों नेताओं की बैठक ने हमारे लिए बहुत अच्छा उदाहरण स्थापित किया है कि इन मतभेदों को कैसे संभाला जाए।’
भारत और चीन के बीच 2020 में सीधी उड़ान रोक दी गई थी। इसे शुरू करने को लेकर सवाल पर राजदूत ने हंसते हुए कहा, ‘मैं भी सीधी उड़ानों के इंतजार में हूं ताकि मैं सीधे बीजिंग के लिए उड़ान भर सकूं।’ उन्होंने कहा कि सीधी उड़ान हर किसी के लिए फायदेमंद है। इससे पैसा और समय दोनों बचेगा।
पांच साल बाद पहली मुलाकात
व्यापार संबंधों को लेकर सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि वह व्यापार, शिक्षा विज्ञान और हर क्षेत्र में भारत और चीन के बीच सहयोग चाहते हैं। रिपोर्ट्स आई हैं कि दोनों क्षेत्रों में सैनिकों की वापसी पूरी हो चुकी है और जल्द ही गश्त फिर शुरू होगी। रूस के कजान में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच मुलाकात हुई थी। पांच साल बाद दोनों देशों के बीच यह पहली मुलाकात थी।

