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India AMCA Jet Engine Deal: अमेरिका की जनरल एयरोस्पेस के साथ इंजन डील अटकने के बाद भारत दूसरे रास्ते तलाश रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत अपने फिफ्थ जनरेशन फाइटर जेट एएमसीए के लिए अब ब्रिटेन और फ्रांस के इंजनों पर विचार कर रहा है. अमेरिकी कंपनी ने इंजन की कीमत तीन गुना बढ़ा दी है. इसके साथ ही टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर भी पेंच फंसा है.
देश के सबसे घातक स्टील्थ फाइटर जेट के इंजन के लिए अमेरिका की जगह फ्रांस और ब्रिटेन पर दांव. (AI Photo)
नई दिल्ली: भारत के सबसे महत्वाकांक्षी डिफेंस प्रोजेक्ट पर बड़ा अपडेट है. अपने फिफ्थ जनरेशन एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के लिए भारत अब फ्रांस और ब्रिटेन के इंजनों पर विचार कर रहा है. सीएनएन-न्यूज18 की ताजा रिपोर्ट ने इस बात का खुलासा किया है. दरअसल अमेरिका की जनरल एयरोस्पेस के साथ चल रही बातचीत फिलहाल अटक गई है. बताया जा रहा है कि अमेरिकी कंपनी ने जीई इंजनों की कीमत में भारी बढ़ोतरी कर दी है. इसके अलावा टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और मेंटेनेंस जैसी अहम शर्तों पर भी सहमति नहीं बन पा रही है. इन अड़चनों को देखते हुए भारत ने अब फ्रांस की सफरान और ब्रिटेन की रोल्स-रॉयस की ओर रुख किया है.
अमेरिका के साथ आखिर क्यों टूट रही है यह अहम इंजन डील?
सूत्रों के मुताबिक अमेरिकी कंपनी ने इंजन की कीमत लगभग तीन गुना तक बढ़ा दी है. शुरुआत में एक जीई एफ414-आईएनएस6 इंजन की कीमत 70 से 80 करोड़ रुपये के बीच तय होने की उम्मीद थी. लेकिन अब भारी डिमांड के कारण पूरा बजट बिगड़ रहा है. इसके अलावा टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर भी अमेरिकी कंपनी पीछे हट रही है. लाइसेंस्ड मैन्युफैक्चरिंग और लॉन्ग-टर्म सपोर्ट एग्रीमेंट को लेकर भी बात नहीं बन सकी है. स्पेयर पार्ट्स और वारंटी की शर्तें भी भारत के पक्ष में नहीं दिख रही हैं.
फ्रांस और ब्रिटेन के इंजनों पर भारत का फोकस क्यों है?
अमेरिकी डील में पेंच फंसने के बाद भारत के पास अब फ्रांस और ब्रिटेन के मजबूत विकल्प मौजूद हैं. भारत फ्रांस की कंपनी सफरान और ब्रिटेन की रोल्स-रॉयस के इंजनों को परख रहा है. आपको बता दें कि भारत पहले से ही राफेल और मिराज फाइटर जेट्स में सफरान के इंजनों का इस्तेमाल करता आ रहा है. ऐसे में फ्रांस के साथ नई डील करना भारत के लिए ज्यादा भरोसेमंद और सुरक्षित साबित हो सकता है.
तेजस मार्क 2 और एएमसीए प्रोजेक्ट पर इस देरी का क्या असर होगा?
भारत ने पहले एएमसीए मार्क 1 और तेजस मार्क 2 के लिए अमेरिकी जीई इंजन को ही चुना था. यह इंजन अपने हाई-थ्रस्ट के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है. तेजस मार्क 2 का प्रोडक्शन अभी चल रहा है. लेकिन अमेरिकी इंजनों की डिलीवरी में कई सालों की देरी हो चुकी है. इस कारण तेजस प्रोजेक्ट पहले से ही काफी पिछड़ रहा है. शुरुआत में एएमसीए के 36 से 72 विमानों को जीई इंजनों से लैस करने का प्लान था. अब अगर नया इंजन चुना जाता है तो पूरा काम फिर से सेट करना पड़ सकता है.
भारत के फिफ्थ जनरेशन फाइटर जेट का भविष्य अब क्या होने वाला है?
एएमसीए प्रोग्राम के तहत भारत अपना खुद का फिफ्थ जनरेशन स्टील्थ फाइटर जेट बना रहा है. इसे डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन की एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी डिजाइन कर रही है. एडीए ने पहले कहा था कि 2028 के अंत तक 5 प्रोटोटाइप तैयार हो जाएंगे. इस जेट की पहली टेस्ट फ्लाइट भी इसी दौरान करने का लक्ष्य रखा गया है. एक रिपोर्ट की मानें तो भारत भविष्य में 100 से ज्यादा एएमसीए फाइटर जेट अपने बेड़े में शामिल कर सकता है.
चीन और पाकिस्तान के खतरे के बीच फाइटर जेट्स की जरूरत क्यों है?
यह सारी डेवलपमेंट ऐसे समय में हो रही है जब भारतीय वायुसेना की ताकत अपने निचले स्तर पर है. वायुसेना में फाइटर स्क्वाड्रन की भारी कमी एक बहुत बड़ी चिंता का विषय है. रक्षा मामलों के एनालिसिस बताते हैं कि चीन और पाकिस्तान के दोहरे खतरे से निपटने के लिए भारत को तुरंत नए जेट्स चाहिए. इसी को ध्यान में रखते हुए भारत 114 राफेल फाइटर जेट्स खरीदने की प्रक्रिया में भी तेजी से जुटा है. इन्हें मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट के तहत खरीदा जाएगा.
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दीपक वर्मा (Deepak Verma) की गिनती हिंदी डिजिटल मीडिया के तेजी से उभरते चेहरों में होती है. वह News18हिंदी के साथ डिप्टी न्यूज़ एडिटर की भूमिका में जुड़े हैं. प्रिंट से डिजिटल का रुख करने वाले दीपक के पास पत्र…और पढ़ें

