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Kila Maisamma Temple: हैदराबाद की प्रसिद्ध ऐतिहासिक इमारतों से अलग, पहाड़ियों और प्राकृतिक चट्टानों के बीच एक ऐसी धरोहर भी मौजूद है जो सदियों पुरानी आस्था, स्थापत्य और लोककथाओं को समेटे हुए है. कोथपेट क्षेत्र का किला मैसम्मा मंदिर गुफा के भीतर बना एक अनोखा धार्मिक स्थल है, जिसका संबंध स्थानीय मान्यताओं के अनुसार कुतुब शाही काल से जोड़ा जाता है. देवी की प्राचीन प्रतिमा मिलने की कथा से लेकर कथित गुप्त सुरंगों के रहस्य तक, यह मंदिर आज भी इतिहास और आस्था का आकर्षण बना हुआ है.
हैदराबाद. यहां का इतिहास केवल चारमीनार, गोलकुंडा किले और भव्य महलों तक सीमित नहीं है. शहर की पहाड़ियों और प्राकृतिक चट्टानों के बीच कई ऐसी धरोहरें मौजूद हैं, जो सदियों पुरानी संस्कृति, आस्था और स्थापत्य कला की कहानी कहती हैं. इन्हीं ऐतिहासिक स्थलों में शामिल है पूर्वी हैदराबाद के कोथपेट क्षेत्र में स्थित किला मैसम्मा मंदिर, जो धार्मिक आस्था के साथ-साथ अपने रहस्यमय इतिहास के लिए भी जाना जाता है. ग्रेनाइट की विशाल प्राकृतिक चट्टानों के बीच और एक प्राचीन गुफा के अंदर बना यह मंदिर मध्यकालीन स्थापत्य और स्थानीय लोक परंपराओं का अनोखा संगम प्रस्तुत करता है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का संबंध लगभग 16वीं शताब्दी से माना जाता है.
स्थानीय कथाओं के अनुसार, गोलकुंडा के कुतुब शाही शासनकाल में यह पहाड़ी क्षेत्र सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण स्थान था. माना जाता है कि यहां सैन्य चौकी या निगरानी स्थल के रूप में इसका उपयोग किया जाता था. पहाड़ी की ऊंचाई से आसपास के क्षेत्र पर नजर रखना आसान था, जिसके कारण यह स्थान रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा होगा. आज भी मंदिर के आसपास मौजूद पत्थरों की पुरानी संरचनाएं और बुर्ज उस दौर की सैन्य वास्तुकला की झलक दिखाते हैं.
जंगलों के बीच मिली थी देवी की प्रतिमा, शुरू हुई पूजा
मंदिर की स्थापना को लेकर एक रोचक लोककथा प्रचलित है. कहा जाता है कि कई सदियों पहले यह पूरा इलाका घने जंगलों से घिरा हुआ था. एक स्थानीय महिला जब कटीली झाड़ियों और सूखी लकड़ियों की तलाश में इस क्षेत्र में पहुंची, तो उसे प्राकृतिक चट्टानों के बीच देवी मैसम्मा की प्राचीन प्रतिमा दिखाई दी. इस घटना के बाद यहां पूजा-अर्चना की परंपरा शुरू हुई, जो आज तक जारी है. स्थानीय मान्यता के अनुसार, जिस महिला को देवी की प्रतिमा मिली थी, उसी के वंशज आज भी मंदिर के गर्भगृह में मुख्य पुजारी के रूप में सेवा दे रहे हैं. किला मैसम्मा मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसका प्राकृतिक स्वरूप है. मंदिर का मुख्य गर्भगृह एक गुफा के भीतर स्थित है, जहां पहुंचने के लिए चट्टानों को काटकर बनाए गए पुराने रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है. गुफा के अंदर देवी किला मैसम्मा के साथ-साथ एल्लम्मा देवी और दुर्गा देवी के चरणों के दर्शन भी होते हैं. मंदिर की बनावट यह दर्शाती है कि प्राचीन समय में प्राकृतिक संरचनाओं को धार्मिक और सुरक्षा उद्देश्यों के लिए किस तरह उपयोग किया जाता था.
गुप्त सुरंग की कहानी आज भी कायम
मंदिर और किले से जुड़ी सबसे चर्चित मान्यता यहां मौजूद कथित गुप्त सुरंग को लेकर है. स्थानीय लोगों का विश्वास है कि इस गुफा के अंदर से एक रास्ता चारमीनार और गोलकुंडा किले तक जाता था. हालांकि, इतिहासकारों और पुरातत्व विशेषज्ञों ने इतनी लंबी सुरंग के अस्तित्व की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी संरचनाएं संभवतः सुरक्षा व्यवस्था, जल निकासी या स्थानीय संपर्क मार्गों के रूप में बनाई गई छोटी दीर्घाएं रही होंगी. किला मैसम्मा मंदिर आज भी स्थानीय लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है. वहीं, इतिहास और स्थापत्य में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह स्थल हैदराबाद की छिपी हुई विरासत को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है. शहर के आधुनिक विकास के बीच यह प्राचीन मंदिर याद दिलाता है कि हैदराबाद की पहचान केवल प्रसिद्ध स्मारकों से नहीं, बल्कि पहाड़ियों और गुफाओं में छिपी उन कहानियों से भी बनी है, जो सदियों से अपनी परंपरा को जीवित रखे हुए हैं.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

