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Home » All News » Hormuz Crisis | Diesel ATF Tax | होर्मुज संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला, डीजल निर्यात पर 14 और ATF पर 12.5 रुपये लीटर ड्यूटी बढ़ी, जानें आप पर असर
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Hormuz Crisis | Diesel ATF Tax | होर्मुज संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला, डीजल निर्यात पर 14 और ATF पर 12.5 रुपये लीटर ड्यूटी बढ़ी, जानें आप पर असर

HawkNewsBy HawkNewsJune 16, 2026No Comments4 Mins Read
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Total Views: 0

Last Updated:June 16, 2026, 05:53 IST

Diesel- ATF Export Duty: केंद्र सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाली ड्यूटी बढ़ाने का बड़ा फैसला किया है. सरकार का कहना है कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए यह कदम उठाया गया है.

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डीजल पर 14 और ATF पर 12.5 रुपये लीटर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ी, जानें आप पर असरZoom

डीजल के निर्यात पर अब 14 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ के निर्यात पर 12.5 रुपये प्रति लीटर की ड्यूटी लगेगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

अमेरिका और ईरान भले ही शांति समझौते पर पहुंच गए हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने का ऐलान भी चुके हैं. लेकिन हालात पूरी तरह सामान्य होने और पेट्रोल गैस की किल्लत खत्म होने में अभी समय लगने का अनुमान है. यही वजह है कि केंद्र सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाली ड्यूटी बढ़ाने का बड़ा फैसला किया है. सरकार का कहना है कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए यह कदम उठाया गया है.

वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग की तरफ से जारी अधिसूचना के मुताबिक, डीजल के निर्यात पर अब 14 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ के निर्यात पर 12.5 रुपये प्रति लीटर की ड्यूटी लगेगी. हालांकि पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है. घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा उत्पाद शुल्क (Excise Duty) भी जस का तस रहेगा. सरकार की तरफ से तय की गई ये नई दरें आज से लागू हो जाएंगी.

क्यों बढ़ाई गई ड्यूटी?

सरकार ने मार्च 2026 में अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ईरान की जंग के बीच पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) और रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस (RIC) लागू किया था. इसका मकसद कंपनियों को अत्यधिक निर्यात से रोकना और घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना था. सरकार हर 15 दिन में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ की कीमतों की समीक्षा कर इन दरों में बदलाव करती है. इससे पहले 1 जून को इन टैक्सों में बदलाव किया गया था.

‘पेट्रोल-डीजल की कमी नहीं’

पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने सोमवार को प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है. उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में कुछ इलाकों में जो दबाव देखने को मिला, वह सप्लाई की कमी नहीं बल्कि मांग के स्वरूप में बदलाव की वजह से था.

आखिर दिक्कत कहां आई?

सरकार के अनुसार, औद्योगिक और कमर्शियल उपभोक्ताओं के निजी पंपों से होने वाली करीब 42 करोड़ लीटर डीजल की खपत मई महीने में खुदरा पेट्रोल पंपों की ओर शिफ्ट हो गई. इससे कुछ क्षेत्रों में रिटेल आउटलेट्स पर अतिरिक्त दबाव पैदा हुआ.

इसी स्थिति को कंट्रोल करने के लिए केंद्र सरकार ने 11 जून को एक अस्थायी आदेश जारी किया, जिसके तहत खुदरा पंपों से एक व्यक्ति को एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल ही बेचा जा सकेगा. बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को अपने उपभोक्ता पंपों से ही डीजल लेने के निर्देश दिए गए हैं.

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था करीब 90 दिनों के लिए अस्थायी तौर पर लागू की गई है और इसका मकसद आम उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी से बचाना है.

पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि देश में ईंधन की उपलब्धता पूरी तरह सामान्य है और घबराने या अतिरिक्त खरीदारी करने की कोई जरूरत नहीं है. सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर आगे भी कदम उठाए जा सकते हैं.

About the Author

Saad Omar

साद बिन उमर को पत्रकारिता के क्षेत्र में 15 साल से अधिक का अनुभव है, जिनमें से 12 साल उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता को दिए है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने आज तक, एनडीटीवी, पीटीआई और नया इंडिया जैसे प्र…और पढ़ें

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