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HSL MINI RATNA: HSL की यह उपलब्धि न केवल संगठन की क्षमता और रिवाइवल की कहानी को दर्शाती है, बल्कि भारत की आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन नीति (Aatmanirbhar Bharat) की दिशा में एक मजबूत कदम भी है.
HSL भारत का नया मिनी रत्नHSL MINI RATNA: हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) ने 14 अक्टूबर 2025 को प्रतिष्ठित मिनी रत्न का दर्जा प्राप्त कर लिया. यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है. यह मान्यता HSL की फाइनेंशियल रिवाइवल, ऑपरेशनल एक्सिलेंस, और भारत के समुद्री व रक्षा क्षेत्रों में बढ़ते योगदान की यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है. 1941 में स्थापित HSL, भारत की जहाज निर्माण क्षमता का एक प्रमुख स्तंभ रहा है, जो देश की नौसेना और कमर्शियल बेड़े को सहयोग प्रदान करता है. 1980 के दशक से शिपयार्ड को लंबे समय तक वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा, और 2010 में रक्षा मंत्रालय को स्थानांतरित किए जाने के बाद भी, सरकारी समर्थन के बावजूद इसकी शुद्ध संपत्ति नकारात्मक बनी रही. 2015 के बाद, HSL ने वित्तीय प्रबंधन, उत्पादकता और तकनीकी आधुनिकीकरण में लक्षित सुधार (targeted reforms) लागू किए, जिससे एक स्थायी रिवाइवल की शुरुआत हुई. HSL ने वित्तीय वर्ष 2015-16 से लेकर 2024-25 तक, पिछले 9 वर्षों में लगातार शुद्ध लाभ दर्ज किया है. हालांकि, कोविड के चलते वित्तीय वर्ष 2020-21 में प्रोडक्शन लॉस और सप्लाइ चेन के डिस्टर्ब होने के लिए चलते नुक्सान हुआ.
पूर्वी नौसेना कमांडर ने HSL प्रोजेक्ट की समीक्षा की
समय-समय पर नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी इन शिपयार्ड्स में चल रहे प्रोजेक्ट्स की समीक्षा के लिए दौरे पर जाते रहते हैं. इसी कड़ी में, ईस्टर्न नेवल कमांडर वाइस एडमिरल राजेश पेंढारकर ने भी विशाखापत्तनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने HSL में जारी विभिन्न प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की थी. वर्तमान में इस शिपयार्ड में कई महत्वपूर्ण नौसैनिक वॉरशिप्स का निर्माण जारी है. यहां पनडुब्बियों का ओवरहॉल और रिफिटिंग भी की जा रही है, विशेष रूप से स्कॉर्पीन क्लास और अन्य पनडुब्बियों की मरम्मत इसमें शामिल है.
नेवी के जारी प्रोजेक्ट्स
‘निस्तार क्लास प्रोजेक्ट’ के तहत कुल दो डाइविंग सपोर्ट वेसेल्स तैयार किए जाने थे. हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड और नौसेना के बीच इस प्रोजेक्ट को लेकर साल 2018 में समझौता हुआ था. करार के अनुसार, दोनों जहाजों को डील साइन होने के 36 महीने के भीतर नौसेना को सौंपा जाना था, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसमें देरी हुई. फिर भी, हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने इस प्रोजेक्ट को सफलतापूर्वक पूरा किया और पहला स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसेल ‘निस्तार’ नौसेना को सौंप दिया. दूसरा स्वदेशी पोत ‘निपुण’ भी तेज़ी से निर्माणाधीन है. वहीं, फ्लीट सपोर्ट शिप प्रोजेक्ट की ज़िम्मेदारी भी HSL को मिली है. वर्ष 2023 में सरकार ने भारतीय नौसेना के लिए 5 सपोर्ट फ्लीट शिप्स की खरीद को मंज़ूरी दी थी. उसी वर्ष भारतीय नौसेना और हिंदुस्तान शिपयार्ड के बीच समझौता भी हुआ. इस करार के मुताबिक, पहला जहाज 4 साल बाद, यानी 2027 में भारतीय नौसेना को सौंपा जाएगा, और बाकी बचे जहाज 10 से 12 महीने के अंतराल में सौंपे जाएंगे. 8 वर्षों के भीतर सभी 5 सपोर्ट फ्लीट शिप्स नौसेना को सौंपे जाने की समयसीमा तय की गई है.

