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Home » All News » Haryana News,हरियाणा में बेटी के माता-पिता कराना चाहते हैं IVF तो सरकार की अनुमति लेना जरूरी, जानें नए नियम – haryana couples with daughter trying for 2nd baby via ivf need government approval
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Haryana News,हरियाणा में बेटी के माता-पिता कराना चाहते हैं IVF तो सरकार की अनुमति लेना जरूरी, जानें नए नियम – haryana couples with daughter trying for 2nd baby via ivf need government approval

HawkNewsBy HawkNewsJuly 10, 2025No Comments5 Mins Read
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हरियाणा में, IVF से दूसरा बच्चा चाहने वाले दंपतियों को अब सरकार से अनुमति लेनी होगी, खासकर अगर उनकी पहले से बेटी है। लिंग अनुपात में गिरावट के चलते यह फैसला लिया गया है, जिसका उद्देश्य सहायक प्रजनन तकनीक के दुरुपयोग को रोकना है। नियमों का उल्लंघन करने वाले IVF क्लीनिकों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

Husband wife with girl child
एआई तस्वीर
गुरुग्राम : हरियाणा में अब अगर किसी दंपत्ति को बेटी है और वे दूसरा बच्चा IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) तकनीक से चाहते हैं, तो उन्हें सरकार से पहले इजाजत लेनी होगी। स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने एक आदेश जारी किया है। इस आदेश के अनुसार, IVF का विकल्प चुनने वाले जोड़ों को जिला उपयुक्त प्राधिकारी (District Appropriate Authority – DAA) के पास आवेदन करना होगा। आवेदन के साथ बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र, प्रसव या गर्भपात से जुड़े दस्तावेज और IVF कराने के कारण भी बताने होंगे।

यह फैसला राज्य कार्य बल (State Task Force – STF) की साप्ताहिक समीक्षा बैठक में लिया गया। हरियाणा में जन्म के समय लिंग अनुपात 2023 में 916 से गिरकर 2024 में 910 हो गया है। इससे राज्य में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि यहां पहले भी कन्या भ्रूण हत्या के मामले सामने आते रहे हैं। बैठक की अध्यक्षता स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री आरती राव और ACS स्वास्थ्य सुधीर राजपाल ने की।

किन लोगों को लेनी होगी IVF की परमिशन

IVF की इजाजत लेने का नियम उन दंपत्तियों पर लागू होगा जिनकी एक या एक से अधिक बेटियां हैं। यह नियम उन दंपत्तियों पर भी लागू होगा जिनके एक बेटा और एक बेटी है। अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का मकसद सहायक प्रजनन तकनीक का दुरुपयोग कर लिंग चयन को रोकना है। DAA के अध्यक्ष उपायुक्त (Deputy Commissioner) होते हैं और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (Chief Medical Officer – CMO) सदस्य सचिव होते हैं। DAA को आवेदनों की समीक्षा करने और IVF केंद्रों की निगरानी करने का काम सौंपा गया है।

DAA स्वास्थ्य से जुड़े कई कानूनों और कार्यक्रमों के तहत एक महत्वपूर्ण नियामक और प्रवर्तन भूमिका निभाता है। इनमें प्री-कॉन्सेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स (Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques – PCPNDT) एक्ट भी शामिल है। हरियाणा की स्वास्थ्य टीमें इस एक्ट के तहत सालों से अवैध गर्भपात रैकेट का पता लगा रही हैं।

आदेश का पालन नहीं करने वाले IVF क्लीनिक पर लगेगा PCPNDT एक्ट

अधिकारियों ने बताया कि जो IVF क्लीनिक इस आदेश का पालन नहीं करेंगे, उन पर PCPNDT एक्ट के तहत जुर्माना लगाया जाएगा। उनका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा और उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा भी चलाया जा सकता है। राजपाल ने कहा कि जिला अधिकारियों को ऐसे IVF मामलों में कड़ी निगरानी रखनी चाहिए ताकि सहायक प्रजनन तकनीकों के माध्यम से लिंग भेदभाव की कोई संभावना न रहे।

राजपाल ने अवैध गर्भपात के प्रति जीरो टॉलरेंस की बात कही। उन्होंने CMO को 24 सप्ताह तक किए गए सभी गर्भपात की जांच करने का आदेश दिया ताकि इसमें शामिल चिकित्सा प्रफेशनल्स की पहचान की जा सके। उन्होंने कहा कि रिवर्स-ट्रैकिंग के लिए एक विस्तृत प्रोटोकॉल पहले ही जारी कर दिया गया है, और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें लाइसेंस रद्द करना भी शामिल है।

हेल्थ डिपार्टमेंट को भेजनी होगी रिपोर्ट

IVF केंद्रों को हर महीने स्वास्थ्य विभाग को रिपोर्ट भी देनी होगी। इस आदेश के पीछे का कारण बताते हुए, स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि IVF के दौरान, भ्रूण शरीर के बाहर बनाए जाते हैं। आरोपण से पहले, क्लीनिक भ्रूण में आनुवंशिक बीमारियों की जांच के लिए प्रीइम्प्लांटेशन जेनेटिक टेस्टिंग (Preimplantation Genetic Testing – PGT) की पेशकश कर सकते हैं। PGT से भ्रूण के लिंग का भी पता चल सकता है, भले ही यह भारत में कानूनी रूप से प्रतिबंधित हो। कुछ अनैतिक क्लीनिक इस तकनीक का उपयोग केवल पुरुष भ्रूणों का चयन करने के लिए कर सकते हैं। क्लीनिक या जोड़े केवल पुरुष भ्रूणों को प्रत्यारोपित करना चुन सकते हैं, महिला भ्रूणों को त्याग या फ्रीज कर सकते हैं, भले ही दोनों स्वस्थ हों। जबकि भारत में PCPNDT एक्ट के तहत भ्रूण या भ्रूण के लिंग का खुलासा करना प्रतिबंधित है, कुछ क्लीनिक अवैध रूप से जोड़ों को IVF प्रक्रियाओं के दौरान या बाद में लिंग के बारे में बताते हैं, जिससे लिंग-चयनात्मक गर्भपात होता है।

लिंग अनुपात सुधरने की उम्मीद

अन्य उपायों के अलावा, STF ने सभी जिलों को हर हफ्ते 10 से अधिक छापे मारने के निर्देश दिए हैं। ये छापे अवैध गर्भपात केंद्रों और बीएएमएस (Bachelor of Ayurvedic Medicine and Surgery) सहित अनधिकृत चिकित्सकों को टारगेट करेंगे, जिन पर गर्भावस्था को गैरकानूनी रूप से समाप्त करने का संदेह है। CMO को साप्ताहिक रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा गया है। STF स्वास्थ्य अधिकारियों, पुलिस और जिला प्रशासनों के बीच मजबूत समन्वय के लिए भी जोर दे रहा है ताकि इन निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। ऐसा इसलिए है ताकि राज्य ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान शुरू करने के बाद से लिंग अनुपात में जो सुधार किया है, वह खो न जाए।

हरियाणा में सेक्स रेशियो क्या?

आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य के लिंग अनुपात में थोड़ा सुधार हुआ है। 7 जुलाई तक प्रति 1,000 लड़कों पर लड़कियों की संख्या 904 है, जो पिछले साल की समान अवधि के दौरान 903 थी। पिछले साल, हरियाणा के 22 जिलों में से 13 में जन्म के समय लिंग अनुपात में गिरावट आई, जिसके कारण 6 अंकों की गिरावट आई।

शशि मिश्रा

लेखक के बारे मेंशशि मिश्रानिष्पक्षता, ईमानदारी, आत्मविश्वास और जिज्ञासु वृत्ति के साथ पत्रकारिता। जुनून की शुरुआत 2007 में अमर उजाला से। दैनिक जागरण कानपुर ने तराशा। सहारा में पॉलिशिंग और नवभारत टाइम्स ने दी चमक। सफर Navbharattimes.com के साथ जारी। लिखने, घूमने और नई बातों को जानने एक्सप्लोर करने में दिलचस्पी। जीवन का फंडा: हर किसी के पास दो रास्ते होते हैं, भाग लो (Run) या भाग लो (Part)। मैं भागने की जगह भाग लेना चुनती हूं।… और पढ़ें