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How Hantavirus Named: हंता वायरस चूहों से फैलने वाला पुराना वायरस है जो फेफड़ों और किडनी पर असर डालता है. यह कोरिया से फैला था जो अमेरिका, यूरोप, एशिया, और दक्षिण अमेरिका में घातक कहर दिखा चुका है. इस वायरस की अभी तक कोई वैक्सीन नहीं है, आइए जानते हैं कि इसका नाम कैसे पड़ा?

हंता वायरस का नाम कैसे पड़ा, जानें इस वायरस के बारे में दिलचस्प फैक्ट.
Hantavirus facts: हंता वायरस सदियों पुराना है, लेकिन 20वीं सदी में वैज्ञानिक रूप से पहचाना गया. यह हमें याद दिलाता है कि प्रकृति के साथ संतुलन बिगड़ने पर ऐसे वायरस इंसानों तक पहुंच सकते हैं.
हंता वायरस (Hantavirus) एक रॉडेंट-जनित वायरस है जो चूहों और अन्य कृंतकों के मूत्र, लार या मल के माध्यम से मनुष्यों में फैलता है. इसका नाम हांतान नदी (Hantan River) से पड़ा, जो दक्षिण कोरिया में बहती है.
1976-1978 में कोरियाई वैज्ञानिकों ने इस वायरस को पहली बार हांतान नदी के पास striped field mouse (Apodemus agrarius) से अलग किया. इसे Hantaan virus नाम दिया गया. बाद में इसी परिवार के सभी वायरस को Hantavirus कहा जाने लगा.
यह कहां से आया और कितना पुराना है?
हंता वायरस नया नहीं है. इसके प्रमाण हजारों साल पुराने हैं. चीनी चिकित्सा अभिलेखों में 960 ईस्वी के आसपास इसी तरह की बीमारी का जिक्र मिलता है. 1913 में रूस के साइबेरिया में भी इसके लक्षण दर्ज हुए थे.
आधुनिक इतिहास में सबसे पहले 1950-53 के कोरियाई युद्ध के दौरान UN सैनिकों में बड़े पैमाने पर Hemorrhagic Fever with Renal Syndrome (HFRS) के मामले सामने आए और लगभग 3,000 सैनिक प्रभावित हुए. 1978 में वायरस की पहचान के बाद इसे कोरियाई युद्ध से जोड़ा गया.
अमेरिका में भी फैला वायरस
1993 में अमेरिका के Four Corners क्षेत्र (न्यू मैक्सिको, एरिजोना, कोलोराडो, यूटा) में अचानक सांस की गंभीर बीमारी (Hantavirus Pulmonary Syndrome – HPS) फैली. युवा नवाजो जोड़े की मौत ने जांच शुरू की. इसे Sin Nombre virus (बिना नाम का वायरस) नाम दिया गया क्योंकि स्थान-आधारित नामों पर आपत्ति हुई थी.
अब तक कितनी हुई मौतें?
- एशिया और यूरोप: हंता वायरस का HFRS रूप मुख्य रूप से यहां फैलता है. चीन में हर साल हजारों मामले होते हैं. मृत्यु दर 1-15% तक रहती है.
- 1993 अमेरिका: 53 मामले, 50% से ज्यादा मौतें. कुल मिलाकर 1993 से 2023 तक अमेरिका में 890 मामले दर्ज हुए, जिनमें करीब 35% मौतें हुईं.
- दक्षिण अमेरिका: एंडीज वायरस से ह्यूमन टू ह्यूमन ट्रांसमिशन भी हुआ. इसी की वजह से अर्जेंटीना और चिली में बड़े आउटब्रेक हुए.
- दुनिया के कई इलाकों में भी ऐसे मामले आते रहते हैं.
क्या इसकी कोई वैक्सीन या दवा है?
कोई वैक्सीन या विशेष दवा नहीं है. कोरोना की तरह इसके सिर्फ सहायक इलाज दिए जाते हैं.
कैसे करें बचाव?
इस वायरस से बचाव के लिए सावधानी जरूरी है. खासतौर पर चूहों वाले इलाकों में सफाई, मास्क और दस्ताने ही सबसे अच्छा बचाव है.
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Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें

