45 देशों के राजनयिकों द्वारा भाग लिए गए वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन में गुजरात के महत्वपूर्ण वैश्विक आर्थिक योगदान और विभिन्न क्षेत्रों में भविष्य के निवेश के अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
India
-Oneindia Staff
मुख्यमंत्री
श्री
भूपेंद्र
पटेल
की
उपस्थिति
में
आज
राजधानी
दिल्ली
में
वाइब्रेंट
गुजरात
रीजनल
कॉन्फ्रेंस
(VGRC)
के
पूर्वार्ध
के
रूप
में
एक
महत्वपूर्ण
संवाद
बैठक
आयोजित
की
गई,
जिसमें
45
देशों
के
राजदूत,
उच्चायुक्त
और
मिशन
प्रमुखों
ने
भाग
लिया।
इस
बैठक
का
उद्देश्य
गुजरात
की
वैश्विक
आर्थिक
भूमिका
को
रेखांकित
करना
और
आगामी
निवेश
अवसरों
को
साझा
करना
था।

मुख्यमंत्री
पटेल
ने
कहा
कि
गुजरात
ने
अब
तक
69
बिलियन
अमेरिकी
डॉलर
के
प्रत्यक्ष
विदेशी
निवेश
(FDI)
और
निर्यात
में
27%
का
योगदान
दिया
है,
जिससे
यह
राज्य
वैश्विक
संपर्क
का
एक
सशक्त
केंद्र
बन
चुका
है।
उन्होंने
यह
भी
उल्लेख
किया
कि
गुजरात
अब
पारंपरिक
‘व्यापारी
राज्य’
की
छवि
से
आगे
बढ़कर
न्यू
एज
इंडस्ट्री
का
हब
बन
रहा
है।
उन्होंने
बताया
कि
राज्य
एआई,
स्पेस
टेक,
फिनटेक,
सेमीकंडक्टर,
डिफेंस
एंड
एयरोस्पेस,
इलेक्ट्रिक
व्हीकल्स
और
ग्रीन
एनर्जी
जैसे
फ्यूचरिस्टिक
सेक्टर्स
में
अग्रणी
भूमिका
निभा
रहा
है।
इसके
अलावा,
गुजरात
देश
के
सबसे
लंबे
समुद्री
तट,
49
पोर्ट्स
और
पीएम
गतिशक्ति
मल्टीमॉडल
ट्रांसपोर्ट
नेटवर्क
के
साथ
लॉजिस्टिक्स
में
भी
अग्रणी
राज्य
बन
चुका
है।
मुख्यमंत्री
ने
राजदूतों
को
VGRC
की
थीम
“क्षेत्रीय
आकांक्षाएँ,
वैश्विक
महत्वाकांक्षाएँ”
के
तहत
गुजरात
के
साथ
साझेदारी
करने
का
आमंत्रण
दिया।
उन्होंने
कहा
कि
यह
पहल
MSME
को
सशक्त
बनाएगी
और
राज्य
के
हर
क्षेत्र
में
संतुलित
विकास
को
बढ़ावा
देगी।
इस
अवसर
पर
विदेश
मंत्रालय
के
आर्थिक
संबंध
प्रभाग
के
सचिव
श्री
सुधाकर
दलेला
ने
VGRC
को
वाइब्रेंट
गुजरात
ग्लोबल
समिट
की
सफलता
के
बाद
एक
महत्वपूर्ण
कदम
बताया।
उन्होंने
कहा
कि
यह
प्लेटफॉर्म
स्थानीय
आकांक्षाओं
को
‘विकसित
भारत@2047’
और
‘विकसित
गुजरात@2047’
के
विजन
से
जोड़ने
का
कार्य
करेगा।
बैठक
में
राज्य
के
मुख्य
सचिव
श्री
पंकज
जोशी,
मुख्यमंत्री
के
अपर
मुख्य
सचिव
श्री
एम.
के.
दास,
उद्योग
विभाग
की
प्रधान
सचिव
श्रीमती
ममता
वर्मा
और
विदेश
मंत्रालय
के
संयुक्त
सचिव
श्री
पी.
एस.
गंगाधर
सहित
कई
वरिष्ठ
अधिकारी
उपस्थित
रहे।
यह
संवाद
बैठक
गुजरात
की
वैश्विक
निवेश
रणनीति
को
मजबूती
देने
और
अंतरराष्ट्रीय
साझेदारों
के
साथ
सहयोग
को
बढ़ाने
की
दिशा
में
एक
महत्वपूर्ण
पहल
साबित
हुई।

