वित्तीय विश्लेषक हार्दिक जोशी ने वर्ल्ड इनइक्वलिटी डेटाबेस के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा है कि भारत में आय और संपत्ति की असमानता ब्रिटिश राज से भी बदतर हो गई है। शीर्ष 1% आबादी के पास देश की 40.1% संपत्ति है, जबकि नीचे की आधी आबादी के पास केवल 6.4% संपत्ति है।

हार्दिक जोशी के अनुसार, देश का आधा हिस्सा रोटी के टुकड़ों के लिए लड़ रहा है। जबकि कुछ लोग बहुत ही शानदार जीवन जी रहे हैं। उन्होंने इस असमानता के पीछे की वजहों को भी बताया है। इनमें टैक्स नीतियां, कमजोर श्रम कानून, कॉर्पोरेट समेकन, रियल एस्टेट और शेयर बाजार में बढ़ती कमाई के साथ राजनीतिक दान शामिल हैं। जोशी का मानना है कि यह असमानता कोई दुर्घटना नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी नीति है।
हार्दिक जोशी के अनुसार, भारत में आय और संपत्ति की असमानता बहुत ज्यादा बढ़ गई है। उन्होंने वर्ल्ड इनइक्वलिटी डेटाबेस के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि यह स्थिति ब्रिटिश शासन से भी बदतर है। उन्होंने इस असमानता के पीछे की वजहों को भी बताया है।
क्यों बढ़ रही है असानता?
जोशी ने कहा कि भारत में टैक्स नीतियां अमीरों को ज्यादा फायदा पहुंचाती हैं। कमजोर श्रम कानूनों के कारण मजदूर असुरक्षित हैं। कॉर्पोरेट समेकन से छोटे व्यवसायों के लिए अवसर कम हो रहे हैं। रियल एस्टेट और शेयर बाजार में बढ़ती कमाई का फायदा ज्यादातर उन लोगों को मिल रहा है जिनके पास पहले से ही पूंजी है। राजनीतिक दान और लॉबीइंग के कारण अमीरों के हितों की रक्षा हो रही है और सुधारों को रोका जा रहा है।
जोशी ने कहा, ‘यह गंभीर असमानता कोई दुर्घटना नहीं है। यह नीति है।’ उन्होंने सवाल किया कि कोई कुछ क्यों नहीं कर रहा है? उनका तर्क है कि भारत में सत्ता संरचनाएं इस असंतुलन पर टिकी हुई हैं। वे चुनाव में पैसा लगाते हैं, मीडिया में अपनी बात रखते हैं, रीडिस्ट्रीब्यूशन के खिलाफ लॉबीइंग करते हैं और मध्यम वर्ग को यह समझाते हैं कि गरीबों को मदद देना ‘खैरात’ है, जबकि वे खुद सब्सिडी और टैक्स ब्रेक लेते हैं।
जोशी का मानना है कि भारत में धन की कमी नहीं है, बल्कि धन के वितरण में कमी है। उन्होंने कहा, ‘हम पर्याप्त धन पैदा करते हैं। हम इसे बस समान रूप से साझा नहीं करते हैं।’
एक्सपर्ट ने दी बड़ी चेतावनी
जोशी के अनुसार, इस समस्या का समाधान राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने कहा कि धन पर टैक्स लगाना, श्रम अधिकारों को मजबूत करना, सभी के लिए स्वास्थ्य और शिक्षा में निवेश करना और कॉर्पोरेट कॉन्सेंट्रशन को सीमित करना जरूरी है। अगर ये कदम नहीं उठाए गए तो असमानता और बढ़ेगी। दुनिया के सबसे ज्यादा आबादी वाले लोकतंत्र में दरारें और गहरी होंगी।
गडकरी ने भी जताई है चिंता
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी गरीबों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि धन कुछ अमीर लोगों के हाथों में केंद्रित हो रहा है। गडकरी ने नागपुर में एक कार्यक्रम में यह बात कही। उन्होंने धन के विकेंद्रीकरण, कृषि, मैन्यूफैक्चरिंग, टैक्सेशन और बुनियादी ढांचे के विकास जैसे मुद्दों पर बात की। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्रियों पीवी नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह की उदार आर्थिक नीतियों की सराहना की। साथ ही, उन्होंने अनियंत्रित केंद्रीकरण के खिलाफ चेतावनी भी दी। गडकरी ने सड़क विकास के लिए धन की कोई कमी नहीं होने की बात कही।


