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Home » All News » Growing Inequality In India,ब्रिटिश राज से भी खराब हालात, 1% के पास देश की 40% दौलत… गडकरी की चिंता के बीच एक्‍सपर्ट की चेतावनी – indias inequality worse than british rule 1 percent holds 40 percent wealth expert warning amid nitin gadkari concern
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Growing Inequality In India,ब्रिटिश राज से भी खराब हालात, 1% के पास देश की 40% दौलत… गडकरी की चिंता के बीच एक्‍सपर्ट की चेतावनी – indias inequality worse than british rule 1 percent holds 40 percent wealth expert warning amid nitin gadkari concern

HawkNewsBy HawkNewsJuly 5, 2025No Comments5 Mins Read
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वित्तीय विश्लेषक हार्दिक जोशी ने वर्ल्ड इनइक्वलिटी डेटाबेस के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा है कि भारत में आय और संपत्ति की असमानता ब्रिटिश राज से भी बदतर हो गई है। शीर्ष 1% आबादी के पास देश की 40.1% संपत्ति है, जबकि नीचे की आधी आबादी के पास केवल 6.4% संपत्ति है।

indias inequality worse than british rule 1 percent holds 40 percent wealth expert warning amid nitin gadkari concern

नई दिल्‍ली: मुंबई के वित्तीय विश्लेषक हार्दिक जोशी ने वर्ल्ड इनइक्‍वल‍िटी डेटाबेस के नए आंकड़ों का विश्लेषण किया है। उन्होंने पाया कि भारत में आय और संपत्ति की असमानता बहुत ज्‍यादा बढ़ गई है। यह असमानता ब्रिटिश राज के समय से भी ज्‍यादा है। जोशी ने लिंक्‍डइन पर लिखा कि कुछ मायनों में यह स्थिति ब्रिटिश शासन से भी बदतर है। उन्होंने वर्ल्ड इनइक्‍वलि‍टी डेटाबेस (2024), इंडिया टुडे और वर्ल्ड इनइक्‍वलि‍टी लैब वर्किंग पेपर की रिपोर्टों का हवाला दिया। इन रिपोर्टों के अनुसार, भारत की टॉप 1% आबादी के पास देश की 40.1% संपत्ति है। वहीं, नीचे की आधी आबादी के पास केवल 6.4% संपत्ति है। टॉप 10% लोग राष्ट्रीय आय का 57.7% से ज्‍यादा हिस्सा ले जाते हैं। हार्दिक जोशी ने यह बात ऐसे समय कही है जब केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी गरीबों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई है। साथ ही माना है कि देश का धन कुछ अमीर लोगों के हाथों में जमा हो रहा है।

हार्दिक जोशी के अनुसार, देश का आधा हिस्सा रोटी के टुकड़ों के लिए लड़ रहा है। जबकि कुछ लोग बहुत ही शानदार जीवन जी रहे हैं। उन्होंने इस असमानता के पीछे की वजहों को भी बताया है। इनमें टैक्स नीतियां, कमजोर श्रम कानून, कॉर्पोरेट समेकन, रियल एस्टेट और शेयर बाजार में बढ़ती कमाई के साथ राजनीतिक दान शामिल हैं। जोशी का मानना है कि यह असमानता कोई दुर्घटना नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी नीति है।

हार्दिक जोशी के अनुसार, भारत में आय और संपत्ति की असमानता बहुत ज्‍यादा बढ़ गई है। उन्होंने वर्ल्ड इनइक्‍वलिटी डेटाबेस के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि यह स्थिति ब्रिटिश शासन से भी बदतर है। उन्होंने इस असमानता के पीछे की वजहों को भी बताया है।

क्‍यों बढ़ रही है असानता?

जोशी ने कहा कि भारत में टैक्स नीतियां अमीरों को ज्‍यादा फायदा पहुंचाती हैं। कमजोर श्रम कानूनों के कारण मजदूर असुरक्षित हैं। कॉर्पोरेट समेकन से छोटे व्यवसायों के लिए अवसर कम हो रहे हैं। रियल एस्टेट और शेयर बाजार में बढ़ती कमाई का फायदा ज्‍यादातर उन लोगों को मिल रहा है जिनके पास पहले से ही पूंजी है। राजनीतिक दान और लॉबीइंग के कारण अमीरों के हितों की रक्षा हो रही है और सुधारों को रोका जा रहा है।

जोशी ने कहा, ‘यह गंभीर असमानता कोई दुर्घटना नहीं है। यह नीति है।’ उन्होंने सवाल किया कि कोई कुछ क्यों नहीं कर रहा है? उनका तर्क है कि भारत में सत्ता संरचनाएं इस असंतुलन पर टिकी हुई हैं। वे चुनाव में पैसा लगाते हैं, मीडिया में अपनी बात रखते हैं, रीडिस्‍ट्रीब्‍यूशन के खिलाफ लॉबीइंग करते हैं और मध्यम वर्ग को यह समझाते हैं कि गरीबों को मदद देना ‘खैरात’ है, जबकि वे खुद सब्सिडी और टैक्स ब्रेक लेते हैं।

जोशी का मानना है कि भारत में धन की कमी नहीं है, बल्कि धन के वितरण में कमी है। उन्होंने कहा, ‘हम पर्याप्त धन पैदा करते हैं। हम इसे बस समान रूप से साझा नहीं करते हैं।’

एक्‍सपर्ट ने दी बड़ी चेतावनी

जोशी के अनुसार, इस समस्या का समाधान राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने कहा कि धन पर टैक्स लगाना, श्रम अधिकारों को मजबूत करना, सभी के लिए स्वास्थ्य और शिक्षा में निवेश करना और कॉर्पोरेट कॉन्‍सेंट्रशन को सीमित करना जरूरी है। अगर ये कदम नहीं उठाए गए तो असमानता और बढ़ेगी। दुनिया के सबसे ज्‍यादा आबादी वाले लोकतंत्र में दरारें और गहरी होंगी।

गडकरी ने भी जताई है चिंता

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी गरीबों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि धन कुछ अमीर लोगों के हाथों में केंद्रित हो रहा है। गडकरी ने नागपुर में एक कार्यक्रम में यह बात कही। उन्होंने धन के विकेंद्रीकरण, कृषि, मैन्‍यूफैक्‍चरिंग, टैक्‍सेशन और बुनियादी ढांचे के विकास जैसे मुद्दों पर बात की। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्रियों पीवी नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह की उदार आर्थिक नीतियों की सराहना की। साथ ही, उन्होंने अनियंत्रित केंद्रीकरण के खिलाफ चेतावनी भी दी। गडकरी ने सड़क विकास के लिए धन की कोई कमी नहीं होने की बात कही।

अमित शुक्‍ला

लेखक के बारे मेंअमित शुक्‍लापत्रकारिता और जनसंचार में पीएचडी की। टाइम्‍स इंटरनेट में रहते हुए नवभारतटाइम्‍स डॉट कॉम से पहले इकनॉमिकटाइम्‍स डॉट कॉम में सेवाएं दीं। पत्रकारिता में 15 साल से ज्‍यादा का अनुभव। फिलहाल नवभारत टाइम्स डॉट कॉम में असिस्‍टेंट न्‍यूज एडिटर के रूप में कार्यरत। टीवी टुडे नेटवर्क, दैनिक जागरण, डीएलए जैसे मीडिया संस्‍थानों के अलावा शैक्षणिक संस्थानों के साथ भी काम किया। इनमें शिमला यूनिवर्सिटी- एजीयू, टेक वन स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेशन, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय (नोएडा) शामिल हैं। लिंग्विस्‍ट के तौर पर भी पहचान बनाई। मार्वल कॉमिक्स ग्रुप, सौम्या ट्रांसलेटर्स, ब्रह्मम नेट सॉल्यूशन, सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी और लिंगुअल कंसल्टेंसी सर्विसेज समेत कई अन्य भाषा समाधान प्रदान करने वाले संगठनों के साथ फ्रीलांस काम किया। प्रिंट और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म में समान रूप से पकड़। देश-विदेश के साथ बिजनस खबरों में खास दिलचस्‍पी।… और पढ़ें