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Festive Market : त्योहारी सीजन शुरू हो चुका है और इस बार भी बाजार में हजारों करोड़ की खरीदारी होने का अनुमान है. कंपनियां भी इसके लिए तैयारी कर रही हैं और ग्राहकों को लुभाने के लिए कंटेंट क्रिएटर्स पर खुल कर पैसे लुटा रही हैं. इस बार कंटेंट बाजार पर करीब 900 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.
त्योहारी सीजन में कंपनियां इंफ्लूएशंर्स पर 900 करोड़ खर्च करेंगी.
नई दिल्ली. दो दिन बाद रक्षाबंधन के साथ त्योहारों का सिलसिला शुरू हो जाएगा. भारतीय त्योहार परंपरा के साथ बाजार का भी पोषण करते हैं. कहा भी जाता है कि भारत की अर्थव्यवस्था में त्योहारों और संस्कृति का विशेष योगदान है. जिनके पास पैसे हैं, वे तो खरीदारी करते ही हैं जिनके पास नहीं है, वो कर्ज लेकर त्योहार मनाते हैं. अगर आप इसे आंकड़ों में देखना चाहते हैं तो कैट की उस रिपोर्ट को देखें जिसमें इस साल राखी के त्योहार पर 30 हजार करोड़ के कारोबार का अनुमान रखा गया है. कंपनियों ने भी उपभोक्ताओं को लुभाने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि ग्राहकों को खुद तक पहुंचाने के लिए यह कंपनियां कहां पैसे लगाती हैं. इस काम पर कंपनियां इस साल 900 करोड़ रुपये खर्च करने को तैयार हैं.
क्रिएटर्स इंटेलीजेंस प्लेटफॉर्म Qoruz’s का कहना है कि कंपनियां अब ग्राहकों को लुभाने के लिए कंटेंट क्रिएटर्स का सहारा ले रही हैं. यही वजह है कि इस साल त्योहारों पर इंफ्लूएंशर्स का बाजार करीब 900 करोड़ का पहुंच जाएगा. पिछले साल त्योहारी सीजन में कंटेंट बाजार पर किया गया खर्च करीब 700 करोड़ रुपये था, जिसमें इस साल 29 फीसदी का उछाल आने का अनुमान है. कंटेंट क्रिएटर्स की डिमांड किस कदर बढ़ रही है, इसका अंदाजा भी आप आंकड़ों से लगा सकते हैं. साल 2025 में करीब 6 हजार कंपनियों ने क्रिएटर्स का सहारा लिया था, जबकि इस साल यह संख्या बढ़कर 7,200 हो चुकी है. साल 2024 में 5,200 ब्रांड तो 2023 में 4,500 ब्रांड ने क्रिएटर्स का सहारा लिया था.
छोटे क्रिएटर्स की बड़ी डिमांड
इस साल त्योहारी सीजन में छोटे कंटेंट क्रिएटर्स की डिमांड ज्यादा रहने वाली है. रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले सत्र में कुल डिमांड का 75 फीसदी हिस्सा नैनो और माइक्रो क्रिएटर्स के हिस्से आया था. इसके मुकाबले मेगा क्रिएटर्स और सेलिब्रिटीज का हिस्सा महज 5 फीसदी रहा था. इसका मतलब है कि कंपनियां अब लोक इंफ्लयूएशंर्स पर ज्यादा भरोसा करती हैं, जो अपने आसपास के माहौल को बेहतर तरीके से समझते हैं.
छोटे शहरों ने बढ़ाए मौके
कंटेंट क्रिएटर्स बाजार में भी तेजी से बदलाव आ रहा है. अब छोटे बाजार के क्रिएटर्स भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं. मेट्रो में रहने वाले क्रिएटर्स की कुल हिस्सेदारी अब भी 62 फीसदी के साथ काफी ज्यादा है. हालांकि, सबसे अच्छी बात ये है
कि टीयर-2 और टीयर-3 शहरों के क्रिएटर्स की हिस्सेदारी बढ़कर 38 फीसदी पहुंच चुकी है. ब्रांड और कंपनियां जैसे-जैसे अपना मार्केट बजट बढ़ा रही हैं, वे अब नाम वाले क्रिएटर्स के बजाय लोकल कंटेंट पर ज्यादा जोर दे रही हैं.
हर साल 37 फीसदी बढ़ रहा बाजार
Qoruz के को-फाउंडर और सीईओ प्रणेश भुवनेश्वर का कहना है कि भले ही साल 2023 के बाद कंपनियों की भागीदारी इस बाजार में 60 फीसदी ही बढ़ी है, लेकिन वैल्यू के हिसाब से देखें तो 350 करोड़ से 900 करोड़ रुपये पहुंच गया है. यह सालाना 37 फीसदी का तगड़ा ग्रोथ दिखा रहा है. इस बाजार की सबसे खास बात ये है कि अब कंपनियां भी अपने त्योहारी बजट का बड़ा हिस्सा कंटेंट क्रिएटर्स बाजार में खर्च करना चाहती हैं. उन्होंने बताया कि त्योहारी सीजन में कंटेंट पर होने वाले कुल खर्च में से 65 फीसदी हिस्सा तो सिर्फ 10 से 15 फीसदी क्रिएटर्स ही उठा लेते हैं. इस बार भी अनुमान है कि कुल खर्च का करीब 66 फीसदी हिस्सा 700 से 1,100 कंपनियां ही करेंगी.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
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