भारत अपनी स्टील्थ बेस्ड एयर वॉरफेयर कैपेबिलिटी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. इसी कड़ी में DRDO ने अत्याधुनिक Astra Mk2 मिसाइल का एक विशेष फोल्डिंग फिन (मुड़ने वाले पंख) वाला संस्करण विकसित करना शुरू कर दिया है. इस नई तकनीक का उद्देश्य भारत के आगामी स्टील्थ प्लेटफॉर्म (Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) और Ghatak UCAV) की मारक क्षमता को बढ़ाते हुए उनकी रडार से बचने की क्षमता को बरकरार रखना है. स्टील्थ फाइटर जेट्स की डिजाइन में सबसे बड़ी चुनौती उनके बाहरी ढांचे को पूरी तरह चिकना (smooth) बनाए रखना होता है, ताकि दुश्मन के रडार उन्हें पहचान न सकें. कन्वेंशनल एयर-टू-एयर मिसाइलों में लगे स्थिर (fixed) फिन्स ज्यादा जगह घेरते हैं, जिससे उन्हें विमान के इंटरनल वेपन बे में सीमित संख्या में ही रखा जा सकता है. ‘डिफेंस डॉट इन’ की रिपोर्ट के अनुसार, इसी समस्या को हल करने के लिए DRDO ने Astra Mk2 के लिए स्प्रिंग लोडेड फोल्डिंग फिन सिस्टम विकसित किया है. यह फिन्स स्टोरेज के दौरान मिसाइल के शरीर से चिपके रहते हैं और लॉन्च के समय हवा में निकलते ही स्वतः खुल जाते हैं. इस तकनीक से मिसाइल की बाहरी चौड़ाई कम हो जाती है और उसे स्टील्थ विमान के अंदर अधिक संख्या में रखा जा सकता है.
अस्त्र मिसाइल के नए वर्जन से Su-30MKI फाइटर जेट और भी घातक बन जाएगा. फाइल फोटो/PTI)
AMCA की मारक क्षमता में बड़ा इजाफा
इस तकनीकी बदलाव का सबसे बड़ा लाभ AMCA को मिलेगा. पहले जहां इसके आंतरिक हथियार कक्ष में केवल चार मिसाइलें रखने का अनुमान था, वहीं अब यह संख्या बढ़कर छह Astra Mk2 तक पहुंच सकती है. इसका मतलब है कि AMCA बिना अपनी स्टील्थ पहचान खोए ज्यादा हथियारों के साथ मिशन पर जा सकेगा. इस परियोजना को सफल बनाने के लिए Aeronautical Development Agency (ADA) और DRDO मिलकर AMCA के हथियार कक्ष के डिजाइन को अंतिम रूप दे रहे हैं. साथ ही साल 2025 के अंत में सुपरसोनिक गति पर सुरक्षित मिसाइल सेपरेशन (separation) के महत्वपूर्ण परीक्षण भी सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं, जिससे इस प्रणाली की विश्वसनीयता और बढ़ गई है.
घातक UCAV में भी होगी तैनाती
फोल्डिंग फिन तकनीक का उपयोग केवल AMCA तक सीमित नहीं रहेगा. DRDO इसे Ghatak UCAV में भी लागू कर रहा है, जो एक स्टील्थ ड्रोन है और दुश्मन के क्षेत्र में घुसकर हमले करने के लिए डिजाइन किया गया है. यह ड्रोन इन संशोधित Astra Mk2 मिसाइलों को अपने अंदर छिपाकर ले जाएगा, जिससे वह हवाई खतरों से खुद की रक्षा कर सकेगा और दुश्मन के महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर सटीक प्रहार कर सकेगा. मार्च 2026 में Defence Acquisition Council (DAC) द्वारा Ghatak के चार स्क्वाड्रन खरीदने की मंजूरी के बाद इस परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है. इससे स्पष्ट है कि भारत स्टील्थ ड्रोन युद्ध क्षमता को भी प्राथमिकता दे रहा है.
Astra Mk2 की उन्नत क्षमता
तकनीकी दृष्टि से Astra Mk2 पहले से ही एक अत्याधुनिक मिसाइल है. इसमें ड्यूल पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर लगी है, जो इसे 160 से 200 किलोमीटर तक की मारक दूरी प्रदान करती है. इस मोटर का दूसरा चरण (second pulse) अंतिम चरण में सक्रिय होता है, जिससे मिसाइल को अतिरिक्त गति और ऊर्जा मिलती है और वह तेजी से बचाव करने वाले लक्ष्यों को भी भेद सकती है. इसके अलावा इसमें स्वदेशी Ku-बैंड एक्टिव रडार सीकर लगाया गया है, जो लक्ष्य को सटीक रूप से ट्रैक और हिट करने में सक्षम बनाता है. यह भारत की रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
अस्त्र मिसाइल के फोल्डिंग फिन वेरिएंट से AMCA के तहत डेवलप किए जाने वाले नेक्सट जेनरेशन फाइटर जेट को और शक्ति मिलेगी. (फाइल फोटो/Reuters)
Astra Mk3 ‘गांडीव’
फोल्डिंग फिन तकनीक भारत के अगले उन्नत प्रोजेक्ट (Astra Mk3) के लिए भी रास्ता तैयार कर रही है, जिसे गांडीव नाम दिया गया है. यह मिसाइल विशेष रूप से स्टील्थ प्लेटफॉर्म के लिए विकसित की जा रही है और इसमें सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) प्रोपल्शन सिस्टम का उपयोग होगा. अप्रैल 2026 तक DRDO Integrated Test Range से इस तकनीक का सफल परीक्षण कर चुका है. SFDR तकनीक के कारण यह मिसाइल अपनी थ्रस्ट को नियंत्रित कर सकती है और लगभग Mach 4.5 की गति से 300 से 350 किलोमीटर तक के दूरस्थ लक्ष्यों (जैसे AWACS और एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग विमान) को निशाना बना सकती है.
डिफेंस टेक्नोलॉजी में लंबी छलांग
Astra Mk2 के फोल्डिंग फिन वेरिएंट का विकास भारत की रक्षा तकनीक में एक महत्वपूर्ण छलांग माना जा रहा है. यह न केवल स्टील्थ प्लेटफॉर्म की प्रभावशीलता बढ़ाएगा, बल्कि भारतीय वायुसेना को भविष्य के युद्धक्षेत्र में निर्णायक बढ़त भी देगा. AMCA और Ghatak जैसे प्लेटफॉर्म के साथ यह तकनीक भारत को वैश्विक सैन्य शक्ति संतुलन में एक मजबूत और आत्मनिर्भर खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगी.

