Hawk News
  • Hindi News
  • Business
  • Education
  • Health
  • Jobs
  • Politics
  • Sports
  • Tech
  • All
  • Hindi News
  • Business
  • Education
  • Health
  • Jobs
  • Politics
  • Sports
  • Tech
  • All
Facebook Twitter Instagram
Wednesday, July 8
Facebook Twitter LinkedIn VKontakte
Hawk News
Banner
  • Hindi News
  • Business
  • Education
  • Health
  • Jobs
  • Politics
  • Sports
  • Tech
  • All
Hawk News
Home » All News » EVM Candidate Listing: ईवीएम में आपका उम्मीदवार पहले या बाद में, क्या है चुनाव आयोग का क्रम निर्धारित करने का नियम?
Hindi News

EVM Candidate Listing: ईवीएम में आपका उम्मीदवार पहले या बाद में, क्या है चुनाव आयोग का क्रम निर्धारित करने का नियम?

HawkNewsBy HawkNewsOctober 25, 2025No Comments5 Mins Read
Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email
Total Views: 0

How EVM Works and Candidate Listing: बिहार में अगले विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट है. जब भी मतदान होता है तो इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का इस्तेमाल होता है. वोट डालने और वोटों की गिनती को आसान बनाने वाली EVM में उम्मीदवारों के नाम किस क्रम में होंगे, यह जानना मतदाताओं के लिए बेहद जरूरी है. चुनाव आयोग (Election Commission) ने इसके लिए स्पष्ट नियम और मानक तय किए हैं, ताकि किसी भी तरह का कोई असमंजस न रहे.

ईवीएम में उम्मीदवारों के नाम का क्रम राज्य की राजकीय भाषा के आधार पर तय होता है. बिहार की आधिकारिक भाषा हिंदी है, इसलिए यहां उम्मीदवारों के नाम हिंदी वर्णमाला के क्रमानुसार (अ, आ, इ, ई… क, ख, ग…) ईवीएम में सेट किए जाते हैं. चूंकि बिहार में सरकारी कामकाज देवनागरी लिपि में होता है, इसलिए ईवीएम में नाम इसी लिपि के क्रम के अनुसार व्यवस्थित होंगे. भले ही क्रम हिंदी से तय हो, वोटरों की सुविधा के लिए अक्सर हिंदी के साथ-साथ उम्मीदवार का नाम अंग्रेजी में भी लिखा जाता है. इससे राज्य में रहने वाले गैर-हिंदी भाषी या अन्य राज्यों के वोटर भी नाम आसानी से पढ़ पाते हैं.

राष्ट्रीय पार्टियों के उम्मीदवार पहले
ईवीएम में उम्मीदवारों के नाम एक तय व्यवस्था और वरीयता क्रम के अनुसार लगाए जाते हैं. यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भ्रम न हो, चुनाव आयोग ने एक स्पष्ट पदानुक्रम (Hierarchy) निर्धारित किया है. ईवीएम में सबसे पहले राष्ट्रीय पार्टियों के उम्मीदवारों के नामों को स्थान दिया जाता है. राष्ट्रीय दलों के बाद पंजीकृत मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय पार्टियों के उम्मीदवारों के नाम प्रदर्शित होते हैं. तीसरे क्रम पर वे दल आते हैं जो चुनाव आयोग में पंजीकृत तो हैं, लेकिन जिन्हें कोई मान्यता प्राप्त नहीं है. अंत में निर्दलीय उम्मीदवारों के नामों को रखा जाता है. इन सभी श्रेणियों के उम्मीदवारों के नामों को प्रदर्शित करने के बाद सबसे आखिरी में मतदाताओं के लिए NOTA (नोटा – इनमें से कोई नहीं) का विकल्प दिया जाता है.

एक ईवीएम में अधिकतम कितने उम्मीदवार?
ईवीएम की क्षमता को लेकर अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि एक मशीन में अधिकतम कितने उम्मीदवारों के लिए वोट डाला जा सकता है. एक ईवीएम की बैलेट यूनिट में अधिकतम 16 उम्मीदवारों के नाम समाहित किए जा सकते हैं. चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार एक कंट्रोल यूनिट के साथ अधिकतम चार बैलेट यूनिट को जोड़ा जा सकता है. इसका मतलब है कि एक पूरी ईवीएम सेट-अप (1 कंट्रोल यूनिट + 4 बैलेट यूनिट) में अधिकतम 64 उम्मीदवारों के लिए वोटिंग की जा सकती है. यदि किसी निर्वाचन क्षेत्र में उम्मीदवारों की संख्या 64 से अधिक हो जाती है, तो चुनाव आयोग के पास ईवीएम के बजाय पारंपरिक मतपत्र (Ballot Paper) का उपयोग करके मतदान कराने का निर्णय लेने का विकल्प होता है.

ये भी पढ़ें- बिहार में आज भी क्यों मायने रखते हैं कर्पूरी ठाकुर, पीएम मोदी ने क्यों उनके गृहनगर में किया याद

ईवीएम में वोटों की अधिकतम संख्या
ईवीएम की तकनीकी क्षमता और मतदान केंद्र (Polling Booth) पर वोटरों की संख्या के बीच एक स्पष्ट संबंध है, जिसके नियम चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित हैं. एक ईवीएम की कंट्रोल यूनिट में अधिकतम 3,840 वोट दर्ज करने की क्षमता होती है. भारत में प्रत्येक मतदान केंद्र या बूथ पर अधिकतम 1,500 मतदाता ही वोट डाल सकते हैं. यदि किसी क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या इससे अधिक होती है तो दूसरा बूथ बनाया जाता है. चूंकि ईवीएम की क्षमता (3,840 वोट) मतदान केंद्र के मानक (1,500 वोटर) से काफी अधिक है, इसलिए एक मतदान केंद्र पर एक ईवीएम सेट-अप आमतौर पर पर्याप्त होता है. 

कब हुआ था पहली बार ईवीएम का प्रयोग
भारत में ईवीएम के प्रयोग की शुरुआत आजादी के बाद से चली आ रही मतपत्र व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव था. ईवीएम का प्रयोग पहली बार 1982 में किया गया था. यह ऐतिहासिक प्रयोग केरल राज्य के परावुर विधानसभा क्षेत्र के 50 मतदान केंद्रों पर किया गया था. हालांकि, इस प्रयोग को तुरंत कानूनी चुनौती मिली. चुनाव में हारने वाले उम्मीदवार ई. सी. जोस ने ईवीएम के माध्यम से हुए मतदान और परिणाम को अदालत में चुनौती दी थी. कोर्ट ने जोस की याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसके परिणामस्वरूप उन बूथों पर ईवीएम से हुए मतदान को अमान्य घोषित किया गया और पुनः मतदान कराने का आदेश दिया गया था. इस घटना के बाद ईवीएम के व्यापक उपयोग के लिए कानूनी ढांचा तैयार करने में कुछ समय लगा, लेकिन यह भारतीय चुनाव प्रणाली के आधुनिकीकरण की दिशा में पहला कदम था.

ईवीएम को कब मिली कानूनी मान्यता
ईवीएम को पूरे देश में चुनावों के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति तब मिली जब भारत की संसद ने इसके संबंध में कानून में संशोधन किया. दिसंबर 1988 में संसद ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में संशोधन किया. इस संशोधन के तहत अधिनियम में एक नई धारा 61(क) जोड़ी गई. इस धारा ने भारत निर्वाचन आयोग को चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का उपयोग करने के लिए आधिकारिक रूप से अधिकार प्रदान किया. यह कानूनी संशोधन 15 मार्च, 1989 से प्रभावी हुआ. इस कानूनी आधार के बाद ईवीएम के उपयोग को लेकर आगे की राह साफ हो गई. वर्ष 2004 के आम चुनावों में देश के सभी 543 संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में पहली बार ईवीएम का इस्तेमाल किया गया, जिसने भारत को पूरी तरह से ई-लोकतंत्र की ओर बढ़ा दिया.

Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
Previous ArticleLIC Row: क्या अदाणी ग्रुप ने एलआईसी पर बनाया था दबाव? कंपनी ने वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट पर किया बड़ा खुलासा | LIC Row Adani Group Investments Corporation Denies Washington Post Report news in hindi
Next Article Chhattisgarh News: पंडवानी से मिली वैश्विक पहचान: मुख्यमंत्री श्री साय ने महासम्मेलन समापन में की विकास योजनाओं की घोषणा | पंडवानी: छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को मिली वैश्विक मान्यता
HawkNews
  • Website

Related Posts

OBC, दलित- मुस्लिम और सवर्ण… कौन सी जाति किस पार्टी के साथ? यूपी की सत्ता का पूरा गणित समझिए

July 8, 2026

खजराना सिविल अस्पताल के नाम पर नहीं खरीदी गई दवाएं या उपकरण, जिला प्रशासन ने बताया पूरा मामला | इंदौर में खजराना सिविल अस्पताल में ज़मीन हस्तांतरण में देरी

July 8, 2026

रेगिस्तान की देसी फसल बनी सुपरफूड, काकड़िया का जैम बढ़ाएगा किसानों की आय

July 8, 2026

Comments are closed.

Tags
culture fashion Featured fitness gadgets Just In leisure lifestyle Opinion phones Picks Science technology Top News
Categories
  • Beauty (12)
  • Business (19)
  • Celebrities (11)
  • Education (8)
  • Entertainment (6)
  • Fashion (12)
  • Fitness (11)
  • Health (3)
  • Hindi News (11,134)
  • Jobs (14)
  • Leisure (15)
  • Lifestyle (17)
  • Opinion (13)
  • Picks (7)
  • Politics (4)
  • Sports (3)
  • Tech (13)
  • Travel (10)
Editors Picks

Review: Record Shares of Voters Turned Out for 2020 election

January 11, 2021

EU: ‘Addiction’ to Social Media Causing Conspiracy Theories

January 11, 2021

World’s Most Advanced Oil Rig Commissioned at ONGC Well

January 11, 2021

Melbourne: All Refugees Held in Hotel Detention to be Released

January 11, 2021
Latest Posts

Queen Elizabeth the Last! Monarchy Faces Fresh Demand to be Axed

January 20, 2021

Pico 4 Review: Should You Actually Buy One Instead Of Quest 2?

January 15, 2021

A Review of the Venus Optics Argus 18mm f/0.95 MFT APO Lens

January 15, 2021

Subscribe to News

Get the latest sports news from NewsSite about world, sports and politics.

Advertisement
Demo
Demo
Top Posts

PM Modi के परमात्मा और महात्मा गांधी वाले बयान पर ऐसा क्या बोले राहुल गांधी? सदन में बजने लगी तालियां

July 1, 202412 Views

Katra Srinagar Mata Vashno Devi Vande Bharat Indian Railways New Train Rote

April 14, 202515 Views

CBSE Board Result 2025: क्या 6 मई को आएगा सीबीएसई रिजल्ट? सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पोस्ट, बोर्ड ने दी सफाई

May 4, 202513 Views
Stay In Touch
  • Facebook
  • YouTube
  • TikTok
  • WhatsApp
  • Twitter
  • Instagram
Latest Reviews

Queen Elizabeth the Last! Monarchy Faces Fresh Demand to be Axed

By HawkNewsJanuary 20, 2021

Pico 4 Review: Should You Actually Buy One Instead Of Quest 2?

By HawkNewsJanuary 15, 2021

A Review of the Venus Optics Argus 18mm f/0.95 MFT APO Lens

By HawkNewsJanuary 15, 2021

Subscribe to Updates

Get the latest tech news from FooBar about tech, design and biz.

Demo
  • Facebook
  • Twitter
  • Instagram
  • Pinterest
Our Picks

OBC, दलित- मुस्लिम और सवर्ण… कौन सी जाति किस पार्टी के साथ? यूपी की सत्ता का पूरा गणित समझिए

July 8, 2026

खजराना सिविल अस्पताल के नाम पर नहीं खरीदी गई दवाएं या उपकरण, जिला प्रशासन ने बताया पूरा मामला | इंदौर में खजराना सिविल अस्पताल में ज़मीन हस्तांतरण में देरी

July 8, 2026

रेगिस्तान की देसी फसल बनी सुपरफूड, काकड़िया का जैम बढ़ाएगा किसानों की आय

July 8, 2026

Lawrence Bishnoi गैंग के खिलाफ अमेरिका का Operation Hardball, FBI ने गोल्डी बराड़ पर रखा ₹48 लाख का इनाम | US FBI Announces Bounty On Goldy Brar Lawrence Bishnoi Operation Hardball Latest News

July 8, 2026
Don't Miss

Stay updated with our comprehensive news portal, delivering timely insights on global events, politics, tech, culture, and more. Your reliable source for informed perspectives.

We're social. Connect with us:

Facebook Twitter Instagram Pinterest YouTube

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

About

Your source for the lifestyle news. This demo is crafted specifically to exhibit the use of the theme as a lifestyle site. Visit our main page for more demos.

We're social, connect with us:

Facebook Twitter Pinterest LinkedIn VKontakte
From Flickr
Ascend
terns
casual
riders on the storm
chairman
mood
monument
liquid cancer
blue
basement
ditch
stars
Popular Posts

OBC, दलित- मुस्लिम और सवर्ण… कौन सी जाति किस पार्टी के साथ? यूपी की सत्ता का पूरा गणित समझिए

July 8, 2026

खजराना सिविल अस्पताल के नाम पर नहीं खरीदी गई दवाएं या उपकरण, जिला प्रशासन ने बताया पूरा मामला | इंदौर में खजराना सिविल अस्पताल में ज़मीन हस्तांतरण में देरी

July 8, 2026

रेगिस्तान की देसी फसल बनी सुपरफूड, काकड़िया का जैम बढ़ाएगा किसानों की आय

July 8, 2026
Copyright © 2017. Designed by Webdadz.

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.