Agency:एजेंसियां
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Earthquake Today News: चीन के शिनजियांग क्षेत्र में गुरुवार रात 5.0 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका केंद्र चीन-लद्दाख सीमा के पास था. इसके झटके जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में महसूस किए गए, हालांकि किसी बड़े नुकसान या जनहानि की खबर नहीं है. इससे पहले गुरुवार को लक्षद्वीप सागर और दिल्ली से सटे फरीदाबाद में भी हल्के भूकंप दर्ज किए गए. हाल के महीनों में हिमालय और तिब्बती पठार के आसपास भूकंपीय गतिविधियां बढ़ने से प्राकृतिक आपदाओं का खतरा भी चिंता का विषय बना हुआ है.
चीन-लद्दाख सीमा के पास 5.0 तीव्रता का भूकंप, जम्मू-कश्मीर में महसूस हुए झटके (सांकेतिक तस्वीर)
Earthquake Today News: हिमालयी क्षेत्र में एक बार फिर धरती कांपी है. चीन के शिनजियांग में गुरुवार देर रात 5.0 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका केंद्र चीन-लद्दाख सीमा के करीब था. इस भूकंप के झटके जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में भी महसूस किए गए. हालांकि, अब तक किसी बड़े नुकसान या जानमाल के नुकसान की खबर नहीं है. खास बात यह है कि गुरुवार को भारत के दो अन्य इलाकों में भी भूकंप के झटके दर्ज किए गए.
जी हां, चीन के शिनजियांग क्षेत्र में गुरुवार रात 10:26 बजे 5.0 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया. भूकंप का केंद्र चीन-लद्दाख सीमा के पास स्थित था. कश्मीर वेदर के अनुसार, भूकंप का केंद्र 35.587 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 78.130 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था. इसकी गहराई 164 किलोमीटर बताई गई है.
भूकंप के झटके जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में महसूस किए गए. हालांकि, देर रात तक किसी बड़े नुकसान या जनहानि की कोई सूचना नहीं मिली थी. इससे पहले गुरुवार को भारत के अन्य हिस्सों में भी हल्के भूकंप दर्ज किए गए. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के अनुसार, शाम 7:54 बजे लक्षद्वीप सागर में 3.2 तीव्रता का भूकंप आया था. वहीं, शाम 6:33 बजे दिल्ली से सटे फरीदाबाद में 2.9 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया. हालांकि, इनकी तीव्रता काफी कम रही. ऐसे में यह भूकंप सामान्य तौर पर लोगों को महसूस नहीं होते.
बता दें कि हाल के महीनों में तिब्बती पठार और आसपास के हिमालयी क्षेत्रों में भूकंपीय गतिविधियां बढ़ी हुई हैं. तिब्बत में 22 अक्टूबर को 7.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था. भारत के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, उस भूकंप का केंद्र ल्हासा से करीब 400 किलोमीटर दूर था और इसकी गहराई 173 किलोमीटर दर्ज की गई थी.
यह भूकंप ऐसे समय आया था जब क्षेत्र पहले से ही प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव झेल रहा था. अगस्त में नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन से आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी. इस आपदा में नेपाल में 1,455 लोगों की मौत हुई थी, जबकि हजारों लोग लापता हुए थे। तिब्बत की ओर भी कई लोगों के मारे जाने और सैकड़ों के लापता होने की खबरें सामने आई थीं.
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते तापमान, ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और चरम मौसमी घटनाओं के कारण किंगहाई-तिब्बत पठार क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम लगातार बढ़ रहा है.
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