डीआरडीओ में भी किया था काम
शिखा त्यागी ने बताया कि डॉ. रमेश चंद त्यागी ने आईआईटी दिल्ली, पुणे में रक्षा अकादमी और देश में डीआरडीओ में काम किया। उन्होंने कहा कि मेरे चाचा ने 1970 के दशक में नासा के साथ काम किया था। दरअसल, भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रिवर्स ब्रेन ड्रेन पर जोर दिया था। इसको लेकर डॉ. त्यागी को मिसाइल मिशन पर काम करने के लिए भारत वापस बुलाया गया।
शिखा बताती है कि डॉ. त्यागी अपने देश वापस आए और वरिष्ठ वैज्ञानिक के रूप में डीआरडीओ में शामिल हो गए। फंड के मुद्दों के कारण यह कार्यक्रम विफल हो गया। इसलिए, डॉ. रमेश चंद त्यागी को पुणे में रक्षा अकादमी में भेज दिया गया।
प्रोफेसर ने दी जानकारी
सीसीएसयू में निदेशक (अनुसंधान और विकास) प्रोफेसर बीर पाल सिंह ने बताया कि मैंने त्यागी जी के साथ बहुत काम किया। हमने इस घर को एक शोध केंद्र और पुस्तकालय में बदलने की योजना बनाई थी। हम इस जगह का नाम वैज्ञानिक के नाम पर रखेंगे। शिखा त्यागी ने कहा कि यह उनकी अंतिम इच्छा थी कि उनकी एकमात्र संपत्ति, यह घर, सामाजिक कारणों के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। अंत में हमने सीसीएसयू पर ध्यान केंद्रित किया। कानूनी कार्यवाही पूरी की और विश्वविद्यालय की कुलपति संगीता शुक्ला को दस्तावेज सौंप दिए।

