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Diwali Holiday: दिल्ली की PR फर्म Elite Marque ने कर्मचारियों को 9 दिन की दिवाली छुट्टी के साथ ‘नो ईमेल’ पॉलिसी देकर हैरान कर दिया. सीईओ रजत ग्रोवर ने एंप्लॉइज को आराम करने, परिवार के साथ रहने और रिचार्ज होने के लिए कहा है. यह फैसला वर्क-लाइफ बैलेंस का बड़ा उदाहरण बन गया है.
Diwali Holiday: कंपनी ने 9 दिनों की छुट्टी देकर सबको हैरान कर दियानई दिल्ली (Diwali Holiday). आज की भागदौड़ भरी कॉर्पोरेट दुनिया में ‘Always On Duty’ की संस्कृति हावी है. कई कंपनियों में एंप्लॉइज एक दिन की छुट्टी के लिए भी तरस जाते हैं. प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले ज्यादातर लोग त्योहारों या छुट्टियों के दौरान भी ऑफिशियल ईमेल और फोन कॉल से बंधे रहते हैं. छुट्टी पर जाने का मतलब बस यह होता है कि आप अपनी डेस्क से दूर हैं, लेकिन डिजिटली काम से जुड़े हुए हैं. इसी दौर में एक कंपनी ने अपने एंप्लॉइज को 9 दिनों का दिवाली ब्रेक दिया है.
कंपनी ने पेश किया वर्क-लाइफ बैलेंस का उदाहरण
पीआर कंपनी का यह फैसला वर्क-लाइफ बैलेंस के प्रति कंपनी की सच्ची कमिटमेंट को दर्शाता है. कंपनी के इस कदम से प्रभावित होकर एक एंप्लॉई रिया पांडे ने लिंक्डइन पर ईमेल का स्क्रीनशॉट शेयर किया. यह देखते ही देखते वायरल हो गया. इस पोस्ट ने पूरी इंडस्ट्री को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि Employee-first Culture वास्तव में कैसा दिखता है और कैसे कुछ दिनों का ब्रेक कर्मचारियों के लिए सबसे बेहतरीन उपहार साबित हो सकता है.
सपने जैसी छुट्टी
एलीट मार्के के फाउंडर और सीईओ रजत ग्रोवर ने यह अनोखा हॉलिडे ईमेल भेजकर अपने एंप्लॉइज को सरप्राइज कर दिया. ईमेल में लिखा था कि एंप्लॉइज इन 9 दिनों का इस्तेमाल ‘ईमेल से स्विच ऑफ होने’, ‘परिवार के साथ देर रात तक हंसी-मजाक करने’, ‘ढेरों मिठाई खाने’, ‘घर की साफ-सफाई’ करने और सोने की कला में महारत हासिल करने के लिए करें. इस हल्के-फुल्के लेकिन दिल को छू लेने वाले लहजे ने सुनिश्चित किया कि कर्मचारी काम का बोझ महसूस किए बिना त्योहार का आनंद ले सकें.
वर्कप्लेस कल्चर में नया स्टैंडर्ड
जहां अन्य कंपनियां छुट्टी के दिनों में भी कर्मचारियों से ‘जरूरी ईमेल’ का जवाब देने की अपेक्षा रखती हैं, वहीं एलीट मार्के ने 9 दिनों का डिजिटल डिस्कनेक्शन अनिवार्य कर दिया. इससे पता चलता है कि कंपनी अपने एंप्लॉइज पर भरोसा करती है और मानती है कि आराम करने से उनकी प्रोडक्टिविटी कम नहीं होगी, बल्कि उसमें सुधार आएगा. एक पॉजिटिव वर्कप्लेस कल्चर केवल ऊंची सैलरी तक सीमित नहीं होता है, बल्कि उसमें कर्मचारियों की भलाई और पर्सनल लाइफ को महत्व देना भी शामिल है.
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With over more than 10 years of experience in journalism, I currently specialize in covering education and civil services. From interviewing IAS, IPS, IRS officers to exploring the evolving landscape of academi…और पढ़ें
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