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Difference Between Lawyer and Advocate: क्या आप लॉयर और एडवोकेट को एक ही समझते हैं? भले ही दोनों कानून की बात करते हैं, लेकिन कोर्ट में केस लड़ने का हक सिर्फ एक के पास होता है. जानिए लॉयर और एडवोकेट के बीच का असली अंतर.
Lawyer vs Advocate: लॉयर और एडवोकेट एक नहीं होते हैं, इनके बीच बहुत बड़ा अंतर है
नई दिल्ली (Difference Between Lawyer and Advocate). कोई कानूनी मामला आने पर या फिल्मों में कोर्ट-कचहरी का सीन देखने पर हमारे मुंह से अक्सर निकलता है- वकील साहब. आम बोलचाल में हम वकील, लॉयर और एडवोकेट शब्दों का इस्तेमाल इस तरह करते हैं मानो ये सब एक ही हों. लेकिन कानून की दुनिया में इन दोनों शब्दों के बीच जमीन-आसमान का अंतर होता है. अगर आप किसी लॉ के स्टूडेंट से पूछेंगे तो वो आपको बताएगा कि हर एडवोकेट लॉयर होता है, लेकिन हर लॉयर एडवोकेट नहीं हो सकता.
लॉयर कौन होता है?
लॉयर वह व्यक्ति होता है जिसने कानून की पढ़ाई की है और जिसके पास लॉ की डिग्री (LLB) है. जैसे ही आप किसी मान्यता प्राप्त कॉलेज से 3 साल या 5 साल का लॉ कोर्स पूरा कर लेते हैं, आप कानूनी तौर पर ‘लॉयर’ बन जाते हैं. अब ट्विस्ट यह है कि लॉयर के पास कानून की पूरी जानकारी तो होती है, वह कानूनी सलाह भी दे सकता है, कानूनी दस्तावेज भी तैयार कर सकता है, लेकिन वह कोर्ट में जाकर आपके लिए केस नहीं लड़ सकता. जज के सामने खड़े होकर बहस करने का अधिकार लॉयर के पास नहीं होता है.
एडवोकेट कौन होता है?
एडवोकेट को हिंदी में ‘अधिवक्ता’ कहते हैं, जिसका मतलब है- दूसरों के पक्ष में बोलने वाला. जब एक लॉयर अपनी डिग्री पूरी करने के बाद ‘बार काउंसिल ऑफ इंडिया’ (BCI) में खुद को रजिस्टर करवाता है और ‘ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन’ (AIBE) पास कर लेता है, तब उसे कोर्ट में प्रैक्टिस करने का लाइसेंस मिलता है. लाइसेंस मिलते ही वह लॉयर से एडवोकेट बन जाता है. अब उसके पास यह पावर आ जाती है कि वह किसी भी कोर्ट में अपने क्लाइंट का पक्ष रख सके और उसके हक के लिए जज के सामने दलीलें दे सके.
लॉयर और एडवोकेट के काम और पावर में क्या अंतर है?
लॉयर का काम ज्यादातर डेस्क वर्क या लीगल एडवाइजरी तक सीमित होता है. वे बड़ी-बड़ी कंपनियों के लिए कॉन्ट्रैक्ट ड्राफ्ट करते हैं, कानूनी बारीकियां समझाते हैं और बैक-एंड पर काम करते हैं. इसके विपरीत, एडवोकेट कोर्ट रूम का असली खिलाड़ी होता है. उसका मुख्य काम अदालत में केस को रिप्रेजेंट करना, गवाहों से जिरह करना और अपने मुवक्किल यानी क्लाइंट को न्याय दिलाना होता है.
बैरिस्टर और सॉलिसिटर क्या होते हैं?
अगर कोई व्यक्ति कानून की डिग्री भारत से नहीं बल्कि इंग्लैंड (UK) से लेकर आता है तो उसे ‘बैरिस्टर’ कहा जाता है (जैसे महात्मा गांधी बैरिस्टर थे). वहीं, ‘सॉलिसिटर’ वह होता है जो कोर्ट के बाहर कानूनी मामलों की तैयारी करता है और एडवोकेट्स की मदद करता है. अगली बार जब आप किसी ‘वकील साहब’ से मिलें तो समझ जाइएगा कि डिग्री होना एक बात है और कोर्ट में केस लड़ने का लाइसेंस होना दूसरी बात!
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Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें

