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भारत समंदर में अपनी ताकत कई गुना बढ़ाने जा रहा है. भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने 53866.50 करोड़ रुपये के दो रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं. इसके तहत 8 नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट युद्धपोत तैयार किए जाएंगे. ये न केवल दुश्मनों की नींद हराम करेंगे बल्कि भारत को समंदर में हर मोर्चे पर मजबूती देंगे.
पृथ्वी को हर तरफ से घेरे समंदर पर अब भारत का राज होगा. दुश्मनों की नींद उड़ाने के लिए भारत जल्द ही 8 महा-ब्रह्मास्त्र तैयार करने जा रहा है. देश के जंगी बेड़े में शामिल होने वाले इन नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट से न केवल नोसेना की ताकत दोगुनी होगी बल्कि भारत के दुश्मन भी थर-थर कांपेंगे.
(इंडियन नेवी के फेसबुक अकाउंट से साभार)
Indian Navy Warship Project: भारतीय नौसेना की ताकत को कई गुना बढ़ाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने दो बड़े रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं. इन सौदों के तहत भारत 8 नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट यानि समंदर के असली सिकंदर बनाएगा. मंत्रालय ने इसके लिए 53,866.50 करोड़ रुपये के दो बड़े रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर किया है.(फाइल फोटो/PTI)
समुद्र में भारतीय सेना को मजबूती देने वाले इन युद्धपोतों के लिए ये समझौते 2 नवंबर को दिल्ली में गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) के साथ किए गए हैं. इसके तहत GRSE पांच और GSL तीन युद्धपोत बनाए जाएंगे. खास बात यह है कि इन सभी युद्धपोतों का डिजाइन भारतीय नौसेना खुद तैयार करेगी और इनका निर्माण देश के सरकारी शिपयार्ड में किया जाएगा.
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ये कॉर्वेट अत्याधुनिक मिसाइलों, हाईटेक हथियारों और सेंसर सिस्टम से लैस होंगे. इनसे समुद्री सुरक्षा, दुश्मन के जहाजों और पनडुब्बियों के खिलाफ कार्रवाई, तटीय सुरक्षा और समुद्री निगरानी की क्षमता बढ़ेगी. इनकी ताकत के आगे चीन और पाकिस्तान जैसे देश पानी भरेंगे. (इंडियन नेवी के फेसबुक अकाउंट से साभार)
इस समझौते पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ‘भारत के स्वदेशी जहाज निर्माण क्षेत्र के लिए यह एक अच्छी खबर है.भारतीय नौसेना के लिए नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट (NGCs) परियोजना से देश के जहाज निर्माण क्षेत्र को बड़ा बढ़ावा मिलेगा. इस परियोजना के तहत रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों (DPSUs), निजी शिपयार्ड और MSMEs सहित भारतीय औद्योगिक भागीदारों के बीच सहयोग मजबूत होगा.(फाइल फोटो)
उन्होंने कहा कि इन युद्धपोतों के निर्माण से अगले 10 वर्षों में शिपयार्ड में लगभग 72 लाख और सहायक उद्योगों तथा MSMEs में करीब 460 लाख रोजगार दिवस (Person-days) के बराबर रोजगार पैदा होने का अनुमान है. सबसे खास है कि भारत में निर्मित सामग्रियों और उपकरणों, स्वदेशी तकनीकों तथा भारतीय कौशल और विशेषज्ञता के इस्तेमाल को बढ़ावा देकर यह परियोजना रक्षा निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है.(प्रतीकात्मक तस्वीर – Indian Navy)
इस परियोजना से देश के स्वदेशी युद्धपोत निर्माण क्षेत्र को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा. यह परियोजना रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है. ये 8 जहाज समंदर में खेल के समीकरण को बदल देने के लिए भारत की बड़ी ताकत बनेंगे.
(फाइल फोटो/PTI)

