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मध्य-पूर्व में गहराते तनाव के बीच ब्रिक्स के दो प्रमुख सदस्यों ईरान और यूएई के अलग-अलग रुख को लेकर भारत ने संतुलन साधने की बड़ी पहल की है. विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, ब्रिक्स का मूल ढांचा सर्वसम्मति और संवाद पर आधारित है. इसलिए भारत सभी भागीदार मुल्कों के साथ गहन बातचीत कर एक साझा सहमति तैयार करने पर जोर दे रहा है.
भारत मंडपम में 12-13 सितंबर को ब्रिक्स समिट का आयोजन होगा.
नई दिल्ली: मिडिल-ईस्ट संकट को लेकर BRICS के सदस्य ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अलग-अलग रुख के बीच भारत ने संगठन के भीतर संवाद और सहमति की प्रक्रिया को प्राथमिकता देने की बात कही है. विदेश मंत्रालय (एमईए) के सूत्रों के मुताबिक, BRICS का पूरा फ्रेमवर्क सहमति के आधार पर काम करता है और भारत की कोशिश रही है कि सभी सदस्य देशों के साथ बातचीत कर साझा सहमति बनाई जाए.
MEA सूत्रों ने कहा कि BRICS में शामिल देशों को अपने-अपने राष्ट्रीय हित और राष्ट्रीय पक्ष रखने का पूरा अधिकार है. ईरान और UAE ने भी संकट को लेकर अपने-अपने राष्ट्रीय रुख सामने रखे हैं. भारत की जिम्मेदारी है कि संगठन के सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिले. सूत्रों के मुताबिक, BRICS का व्यापक रुख अब तक वार्ता, संवाद और शांति के पक्ष में रहा है. भारत भी लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि तनाव को कम करने और संकट के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाया जाना चाहिए.
संयुक्त बयान पर बातचीत जारी
BRICS सम्मेलन के दौरान प्रस्तावित संयुक्त बयान को लेकर सदस्य देशों के बीच बातचीत जारी है. MEA सूत्रों के अनुसार, भारत अपनी अध्यक्षता के दौरान सभी सदस्य देशों के साथ लगातार संवाद कर रहा है और जहां तक संभव होगा, साझा सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी. सूत्रों ने कहा कि BRICS के मंच पर अब तक सदस्य देशों की ओर से संकट को जल्द खत्म करने और तनाव कम करने की जरूरत पर जोर दिया गया है. ऐसे में संयुक्त बयान को लेकर भी अलग-अलग देशों के विचारों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है.
भारत की कूटनीति-डायलॉग पर जोर
भारत का रुख स्पष्ट तौर पर डायलॉग, डिप्लोमेसी और तनाव कम करने के पक्ष में रहा है. MEA सूत्रों के मुताबिक, भारत ने BRICS के सभी सदस्यों और समूह से जुड़े देशों को सम्मेलन में आमंत्रित किया है. सूत्रों ने बताया कि सम्मेलन में भाग लेने को लेकर सदस्य देशों और आमंत्रित देशों की ओर से अच्छा रिस्पांस मिल रहा है. भारत की कोशिश है कि BRICS को ऐसा मंच बनाया जाए जहां अलग-अलग भू-राजनीतिक संकटों पर सदस्य देश अपनी बात रख सकें और मतभेदों के बावजूद संवाद के जरिए साझा आधार तलाशा जा सके. ईरान और UAE के अलग-अलग राष्ट्रीय रुख के बीच अब निगाहें इस बात पर हैं कि BRICS सम्मेलन के संयुक्त बयान में मध्य एशिया संकट को लेकर कितनी व्यापक सहमति बन पाती है.
भारत चौथी बार कर रहा ब्रिक्स की अध्यक्षता
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 12-13 सितंबर को होगा. भारत इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है. इस शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स के सदस्य और सहयोगी देशों के नेताओं के साथ-साथ आउटरीच के लिए आमंत्रित नेता भी शामिल होंगे. भारत ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य है और इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में इसकी अध्यक्षता कर चुका है. भारत ने 1 जनवरी 2026 को चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली. वर्ष 2026 एक महत्वपूर्ण पड़ाव भी है क्योंकि इस साल ब्रिक्स अपनी स्थापना के बीस साल पूरे कर रहा है.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…
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