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Berkshire Hathaway Chairman : वॉरेन बफे ने अपने बेटे हावर्ड को बर्कशायर हैथवे का चेयरमैन नियुक्त किया है और खुद सक्रिय पद से अलग हो गए हैं. उनके इस ऐलान के बाद से ही यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि क्या हावर्ड को उनकी संपत्ति भी मिलेगी और एक चेयरमैन के तौर पर उन्हें कंपनी से कितना पैसा मिलने वाला है.
वॉरेन बफे के बेटे हावर्ड बीते 33 साल से कंपनी के बोर्ड में शामिल हैं.
नई दिल्ली. दुनिया के सबसे बड़े निवेश गुरु वॉरेन बफे ने आखिरकार खरबों डॉलर की अपनी कंपनी का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया. उन्होंने अपने बड़े बेटे हावर्ड ग्राहम बफे (Howard Graham Buffett) को बर्कशायर हैथवे का चेयरमैन बना दिया है. करीब 33 साल से कंपनी के बोर्ड से जुड़े हावर्ड अब उनकी बनाई संस्कृति और कामकाज के तरीकों को आगे बढ़ाने पर फोकस करेंगे. वॉरेन बफे ने भले ही अपने बेटे को कंपनी की कमान सौंप दी है, लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या हावर्ड को उनकी खरबों डॉलर की संपत्ति भी मिल जाएगी और कंपनी के चेयरमैन के तौर पर उन्हें सैलरी कितनी मिलेगी.
सबसे पहले बात करते हैं हावर्ड की. वॉरेन बफे को तो सब जानते हैं कि हावर्ड शुरुआत से ही बिजनेसमैन या अपने पिता के साथ काम नहीं करते थे. हावर्ड अपने पिता की कंपनी में जुड़ने से पहले एक किसान थे, वह भी कोई छोटे-मोटे किसान नहीं हजारों एकड़ जमीन पर खेती करने वाले किसान थे. इतना ही नहीं, उन्होंने करियर की शुरुआत एक पुलिस शेरिफ के तौर पर की थी. इसके बाद उन्होंने वार फोटोग्राफर के तौर पर भी काम किया. हावर्ड कोई बड़ी कंपनी चलाने के बजाय 1 अरब डॉलर यानी करीब 9.6 हजार करोड़ रुपये का एक एनजीओ चलाते थे. उन्होंने खासकर सूडान और कांगो जैसे गरीब देशों के लिए काम किया. हावर्ड को उनके देश में लोग भले ही ज्यादा सम्मान से नहीं जानते लेकिन उन्हें मैक्सिको, कोलंबिया और रवांडा जैसे देशों में उनके सामाजिक कार्यों के लिए काफी सराहना मिली है.
कितनी है उनकी सैलरी
वॉरेन बफे ने कंपनी को जारी लेटर में साफ कहा है कि फिलहाल रोजाना के ऑपरेशंस चलाने का काम सीईओ ग्रेग एबेल करेंगे, जबकि हावर्ड का काम कंपनी के मूल्यों और संस्कृति को आगे बढ़ाना है. उनका काम बैलेस शीट देखना और संभालना नहीं होगा. हावर्ड साल 1993 से ही बर्कशायर के बोर्ड में हैं और उन्हें साल 2025 में निदेशक भी बनाया गया था. तब उन्हें 3 हजार डॉलर यानी करीब 2.70 लाख रुपये सैलरी मिलती थी. एक चेयरमैन के तौर पर भी उनकी सैलरी और कमाई का खुलासा नहीं किया गया है.
फाइनेंस से बाहर ही रहे हावर्ड
वॉरेन ने आज भले ही हावर्ड के हाथ में बर्कशायर जैसी इनवेस्टमेंट कंपनी की कमान सौंप दी है, लेकिन जहां तक हावर्ड की बात है तो वे हमेशा से ही फाइनेंस की दुनिया से बाहर ही रहे हैं. उन्होंने लंबे समय तक पाना, इलिनोइस में 1,500 एकड़ का फैमिली फार्म चलाया और एरिजोना में भी 1,500 एकड़ का रिसर्च फार्म चलाया. इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका में 9,200 एकड़ में उन्होंने खेती की. उन्होंने पुलिस शेरिफ और नेब्रास्का के कमिश्नर के तौर पर भी साल 1989 से 1992 तक सेवा दी. उन्हें 2017-18 में इलिनोइस का शेरिफ भी बनाया गया और वे आज भी इस पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
यूक्रेन युद्ध में की फोटोग्राफी
हावर्ड ने रूस-यूक्रेन युद्ध में बतौर फोटोग्राफर भी काम किया है. इसके अलावा वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर के तौर पर भी उन्होंने 130 देशों में काम किया है. इस दौरान उन्होंने तमाम किताबें भी लिखीं. अब उन्हें बर्कशायर का चेयरमैन तो बना दिया गया है, लेकिन फिलहाल उनका काम कंपनी के रोजाना कामकाज को देखना नहीं है, बल्कि वॉरेन की बनाई नीतियों को आगे बढ़ाना और उसे लागू करना है.
हावर्ड को कितना पैसा मिलेगा
हावर्ड भले ही कंपनी के चेयरमैन बन गए हैं, लेकिन उन्हें वॉरेन बफे का उत्तराधिकारी मान लेना सही नहीं होगा. उनके पिता की करीब 145 अरब डॉलर की नेट वर्थ में दो और बच्चों का भी हक होगा. हावर्ड की बहन सूजी और भाई पीटरसन का भी इस संपित्त में हिस्सा है. फिलहाल वॉरेन ने अपने बच्चों को सालाना 50 करोड़ डॉलर की कमाई का जुगाड़ कर दिया है, लेकिन पूरी संपत्ति को दान देने की मंशा जताई है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
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